ईरान में जंग के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आ रहा है. पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ और पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी पर अब "गद्दारी" और अमेरिका के लिए जासूसी तक के आरोप लगाए जा रहे हैं. विवाद की शुरुआत तब हुई जब ज़रीफ ने जंग को खत्म करने की बात करते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव रखा. अब उन्हें गिरफ्तार किए जाने की मांग उठ रही है. उनके खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं और यहां तक कि "अमेरिका का एजेंट" तक बताया जा रहा है.
पूर्व विदेश मंत्री जवाद जरीफ का कहना था कि ईरान को अपनी मौजूदा रणनीतिक बढ़त का इस्तेमाल करते हुए लड़ाई जारी रखने के बजाय जीत का ऐलान कर समझौते की ओर बढ़ना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युद्ध जारी रहा, तो इससे आम नागरिकों की जान और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को और भारी नुकसान होगा.
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ज़रीफ ने सुझाव दिया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं लगाने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के बदले सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने की पेशकश कर सकता है. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने, नॉन-एग्रेसन पैक्ट साइन करने और शांति समझौते की भी बात कही.
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति ने भी की जंग खत्म करने की अपील
दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा कि देश को "सम्मानजनक तरीके" से जंग खत्म करने की तैयारी करनी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय हित और जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नीतियों में तुरंत बदलाव जरूरी है. साथ ही उन्होंने फारस की खाड़ी के अहम इलाकों और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने की बात भी कही.
इन बयानों के बाद ईरानी शासन के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद हामिद रसाई ने कोर्ट से मांग की कि दोनों नेताओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाए. उनका कहना है कि इस तरह के बयान देश की सुरक्षा के खिलाफ हैं और इससे दुश्मनों को फायदा मिल सकता है.
तेहरान में आयोजित कई प्रदर्शनों में भी यह गुस्सा साफ नजर आया. प्रदर्शनकारियों ने ज़रीफ और रूहानी की तस्वीरें जलाईं और उन्हें "अमेरिका का एजेंट" बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की.
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पूर्व विदेश मंत्री के घर में घुसने की धमकी
हालात तब और गंभीर हो गई जब धार्मिक गायक सईद हद्दादियान ने ज़रीफ को खुली धमकी दे दी. उन्होंने कहा कि अगर ज़रीफ तीन दिनों के भीतर अपने बयान वापस नहीं लेते, तो लोग उनके घर तक पहुंच सकते हैं. हालांकि, ज़रीफ के समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया है. रूहानी के पूर्व सलाहकार हेसामुद्दीन आशना ने कहा कि ज़रीफ के लेख को गलत तरीके से समझा जा रहा है. उनका कहना है कि यह प्रस्ताव पश्चिमी देशों को चेतावनी देने और बदलते हालात को दिखाने के लिए था, न कि आत्मसमर्पण का संकेत.
इस बीच, मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने हाल ही में कहा था कि अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो ईरान जंग खत्म करने को तैयार है. उनके इस बयान के बाद भी देश के भीतर मतभेद और गहरे हो गए हैं. आईआरजीसी की तरफ से उनकी कड़ी आलोचना की गई है.