पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इसके बाद से जंग की आग लगातार धधक रही है. होर्मुज लगभग बंद होने की वजह से जंग थमता हुआ नहीं दिख रहा है. और अब तो अमेरिका का एक फाइटर जेट विमान ईरान में गिर गया है. विमान में सवार दो पायलट में से एक को अमेरिका ने रेस्क्यू कर बचा लिया है. लेकिन अभी भी एक और पायलट का कोई अता-पता नहीं है.
ईरान की सरजमीं पर फाइटर जेट का गिरना इस युद्ध में निर्णायक मोड़ बन सकता है. अभी तक तो अमेरिका के जो भी विमान गिरे थे, उस पर अमेरिकी सरकार का कहना था कि फ्रेंडली फायर में नुकसान हुआ. लेकिन अब तो खुलकर सामने आ गया है कि अमेरिका का फाइटर जेट ईरान में गिरा है और पायलट की जानकारी नहीं है.
अगर अमेरिकी फाइटर पायलट को पकड़ लिया गया, तो यह जंग किस मोड़ पर जा सकती है. अगर अमेरिकी पायलट्स को मारने की बात होती है, तो उससे ईरान को कोई खास फायदा नहीं होगा. उल्टा, इससे अमेरिका और खासकर डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा सैन्य एक्शन करने का आधार मिल सकता है.
अगर जो एक लापता पायलट है उसकी मौत होती है, तो अमेरिका इसे बदले के तौर पर बड़े हमले को जस्टिफाई कर सकता है. ऐसे में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है. अगर पायलट्स जिंदा हैं, तो यह ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक फायदा हो सकता है. जैसे-
इसे ईरान के लिए “स्ट्रॉन्ग होल्ड” बताया, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुना सकता है.
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लोकेशन सबसे अहम फैक्टर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पायलट्स की लोकेशन है. इजेक्शन के बाद पायलट अक्सर घायल हो जाते हैं. ऐसे में उनका लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ईरान जैसे बड़े इलाके में उन्हें ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
ईरान की रणनीति क्या हो सकती है?
अगर पायलट जिंदा है, तो ईरान उन्हें पकड़ने की पूरी कोशिश करेगा. कैप्चर होने के बाद ही ईरान बातचीत की शर्तें रख सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पायलट्स की तस्वीर या सबूत दिखाकर दबाव बनाया जा सकता है.
दोनों देशों की रणनीति अलग लेकिन लक्ष्य स्पष्ट
इस मामले में अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने तरीके से रणनीति बना रहे हैं, लेकिन फोकस एक ही है. स्थिति को अपने पक्ष में करना.