अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य संघर्ष और मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जलडमरूमध्य) को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है. सेना ने चेतावनी दी है कि इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा. वहीं, IRGC के इस फैसले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर युद्ध का खतरा गहरा गया है.
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने सोमवार को जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा की है. ईरानी सेना ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को जला दिया जाएगा.
जबारी ने कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है...अगर कोई भी इसे पार करने की कोशिश करता है तो हमारे गार्ड्स और नौसेना के जवान उन जहाजों को आग लगा देंगे.'
दुनिया की लाइफलाइन पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में से एक है. वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ती है. इसी संकरे रास्ते से होकर सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन और यूएई का तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. इस आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा चीन समेत एशियाई देशों को जाता है. हालांकि, सऊदी अरब और यूएई के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग हैं, लेकिन अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, हॉर्मुज से गुजरने वाले अधिकांश ऊर्जा भंडार के पास क्षेत्र से बाहर निकलने का कोई दूसरा व्यवहार्य विकल्प नहीं है.
फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला ये रास्ता बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है. पहले भी ईरान ने तनाव के दौरान इस रास्ते को बंद करने की धमकियां दी हैं. हालांकि, ये एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां वाणिज्यिक जहाजों को पार करने का अधिकार है. पर ईरान और ओमान इसके क्षेत्रीय जल पर नियंत्रण रखते हैं. इससे पहले फरवरी में सैन्य अभ्यास के दौरान ईरान ने यातायात को आंशिक रूप से प्रतिबंधित किया था, जिससे तेल की कीमतों में 6% का उछाल आया था. पूर्ण बंदी का ये ऐलान 1980 के दशक के 'टैंकर युद्ध' के बाद पहली बार हुआ है.
डगमगा सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था
वहीं, खामेनेई की मौत के बाद भड़की इस आग ने वित्तीय बाजारों को पहले ही संकट में डाल दिया है. अगर ये रास्ता लंबे वक्त तक बंद रहता है तो दुनिया भर में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है.
वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इस रास्ते में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है. फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस रणनीतिक जलमार्ग पर टिकी हैं, क्योंकि यहां होने वाली कोई भी छोटी-सी सैन्य हलचल महायुद्ध की शुरुआत कर सकती है.