ईरान में एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि प्रदर्शनकारियों और 'दंगाइयों' में फर्क है और दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी. खामेनेई का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब हिंसक झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है. 86 वर्षीय खामेनेई ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुना जा सकता है, लेकिन दंगाइयों से किसी तरह की बातचीत का कोई मतलब नहीं है और उन्हें 'उनकी जगह पर रखा जाना चाहिए.'
तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए खामेनेई के भाषण को सरकारी टीवी चैनलों पर प्रसारित किया गया. उन्होंने कहा, हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को भी उनसे बात करनी चाहिए. लेकिन दंगाइयों से बात करने का कोई फायदा नहीं है. दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी.
ईरान में पिछले एक हफ्ते से जारी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है. ये प्रदर्शन मुख्य रूप से देश की खराब आर्थिक स्थिति, मुद्रा रियाल के तेजी से गिरते मूल्य और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए थे. हालांकि धीरे-धीरे इनमें सरकार विरोधी नारे भी सुनाई देने लगे हैं. यहां 90 शहरों और कस्बों में विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है.
विदेशी ताकतों पर आरोप
खामेनेई ने एक बार फिर यह दावा दोहराया कि मौजूदा प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है. उन्होंने बिना किसी सबूत के कहा कि अमेरिका और इजरायल जैसे देश इन आंदोलनों को हवा दे रहे हैं. उन्होंने कहा, दुश्मन द्वारा उकसाए गए या पैसे देकर खड़े किए गए कुछ लोग व्यापारियों और दुकानदारों के बीच घुसकर इस्लाम, ईरान और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारे लगवा रहे हैं. यही सबसे गंभीर मामला है.
'अमेरिका को जाना ही होगा'
खामेनेई ने ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था और रियाल की कमजोरी के लिए भी ‘दुश्मन’ को जिम्मेदार ठहराया. खामेनेई ने अमेरिका के खिलाफ तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र से जाना ही होगा. उन्होंने कहा, 'क्षेत्र के देशों के संकल्प के साथ अमेरिका को इस इलाके से जाना पड़ेगा और वह जाएगा.'
अमेरिका की धमकी और तीखी प्रतिक्रिया
इन प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से कुचलता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. ट्रंप के इस बयान के बाद ईरानी नेतृत्व में तीखी नाराजगी देखी गई.
ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर ट्रंप की धमकियों को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए उनकी निंदा करने की मांग की है.
वहीं, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता फैलाने और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने के बराबर होगा.
2022 के बाद सबसे बड़े प्रदर्शन
ईरान में मौजूदा प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं. उस समय 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में जबरदस्त आंदोलन हुआ था. हालांकि मौजूदा प्रदर्शन अभी उतने व्यापक और हिंसक नहीं हुए हैं, लेकिन सरकार के लिए यह बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं.
महसा अमीनी को कथित तौर पर हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी. उस घटना ने ईरान में बड़े पैमाने पर जनआक्रोश को जन्म दिया था.