ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 36 लोगों की मौत हुई है. एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, बीते 10 दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शनों में ये जानें गईं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश की आर्थिक हालत के लिए अपनी सरकार को जिम्मेदार बताया है और कहा है कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारियों की हर बात सुनेगी.
ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के आर्थिक मुद्दों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही आरोप लगाया है कि विदेशी ताकतों से जुड़े नेटवर्क इन प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं. मंगलवार को ईरान के पुलिस प्रमुख ने कहा कि वो 'इन दंगाइयों के आखिरी बचे लोगों से भी निपटेंगे.'
विदेश स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने बताया कि मरने वालों में 34 प्रदर्शनकारी थे, जबकि दो लोग सुरक्षा बलों से जुड़े थे.
इस बीच, ईरान के निर्वासित युवराज और देश के आखिरी शाह के बेटे रजा पहलवी ने आंदोलन के बीच जनता से पहली बार खुला आह्वान किया है. उन्होंने लोगों से कहा है कि गुरुवार और शुक्रवार, यानी 8 और 9 जनवरी को ठीक रात 8 बजे, वे जहां भी हों, सड़कों पर या अपने घरों से एक साथ नारेबाजी शुरू करें. पहलवी ने कहा कि लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर वो अपने आगे की प्लानिंग की घोषणा करेंगे.
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान सरकार प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरान समर्थित इराकी मिलिशियाओं का इस्तेमाल कर रही है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि इराकी मिलिशियाओं ने करीब चार दिन पहले लड़ाकों की भर्ती शुरू की थी. अब तक लगभग 800 इराकी शिया लड़ाकों को ईरान में तैनात किया जा चुका है.
बताया गया है कि इनमें से अधिकांश लड़ाके काताइब हिज्बुल्लाह, हरकत अल-नुजाबा, सैय्यद अल-शुहदा ब्रिगेड्स और बद्र संगठन से जुड़े हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इराकी सरकारी अधिकारी इस मामले से अवगत हैं. इन लड़ाकों को शलामचेह, चाजेबह और खोस्रावी सीमा चौकियों के जरिए ईरान भेजा जा रहा है. लड़ाकों को यह कहकर ईरान भेजा जा रहा है कि वो माशहद स्थित इमाम रजा की दरगाह पर तीर्थ यात्रा के लिए जा रहे हैं.
सूत्रों का कहना है कि ये बल पहले अहवाज में अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़े एक ठिकाने पर जमा होते हैं, जिसके बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है. वहां वो प्रदर्शनों को रोकने के लिए हिंसक तरीके अपना रहे हैं.