मिडल ईस्ट में जारी युद्ध की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है. अमेरिका और ईरान में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा पेश किया है. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने गुरुवार को कहा कि यदि अमेरिका ईरान की धरती पर जमीनी हमला करता है, तो देश के 70 लाख लोग हथियार उठाकर लड़ने के लिए तैयार हैं.
मोहम्मद बघेर गालिबफ, जिनके बारे में US के साथ बातचीत करने वाले संभावित पार्टनर के तौर पर चर्चा होती रही है, अब युद्ध शुरू होने के बाद से बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि बहुत कम समय में पूरे देश में एक बड़ा अभियान चला है, जिसके तहत लाखों लोगों ने हथियार उठाकर देश की रक्षा करने की इच्छा जताई है.
उनके अनुसार, सिर्फ एक हफ्ते के अंदर करीब 70 लाख ईरानी आगे आए हैं और उन्होंने कहा है कि वे देश की रक्षा के लिए लड़ने को तैयार हैं.
हालांकि, इस आंकड़े को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. यह साफ नहीं है कि 70 लाख का यह आंकड़ा कहां से आया और इसे कैसे मापा गया. फिर भी, यह दावा पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था और अब पहली बार किसी बड़े सरकारी नेता ने इसे सार्वजनिक रूप से दोहराया है.
बता दें कि ईरान की कुल आबादी करीब 9 करोड़ (90 मिलियन) है. ऐसे में 70 लाख लोगों का युद्ध के लिए तैयार होना एक बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. इस बयान को ईरान की ओर से अमेरिका को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
इस बीच, ईरानी सरकार और राज्य मीडिया लगातार लोगों से सेना में शामिल होने और देश की रक्षा के लिए आगे आने की अपील कर रहे हैं. मोबाइल मैसेज और प्रचार अभियानों के जरिए लोगों को वॉलंटियर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. सरकार ने रिटायर्ड सैनिकों से भी संपर्क किया है और उनसे दोबारा सेवा देने की इच्छा जताने को कहा है.
इसके अलावा, ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स ‘बसीज’ भी सक्रिय हो गई है. बसीज नाम की यह फोर्स स्वैच्छिक रूप से काम करती है और इसमें आम नागरिक भी शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फोर्स ने 12 साल तक के बच्चों को भी अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
मिडिल ईस्ट में एक महीने से चल रही जंग
ईरान और अमेरिका के बीच यह तनाव 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से चरम पर है. ईरान ने पहले ही सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाबी कार्रवाई की है. ईरानी संसद अध्यक्ष का यह बयान न केवल अमेरिका को चेतावनी है, बल्कि घरेलू स्तर पर ईरानी नागरिकों के राष्ट्रवाद को जगाने की एक कोशिश भी मानी जा रही है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे पहाड़ी और विशाल देश में जमीनी हमला करना अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होगी. ईरान के पास दुनिया की सबसे बड़ी मिसाइल ताकतों में से एक है और उसकी 'बसिज' फोर्स गुरिल्ला युद्ध में माहिर मानी जाती है. ऐसे में 70 लाख लोगों के लड़ने के दावे को एक मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूप में भी देखा जा रहा है, ताकि अमेरिका को जमीनी कार्रवाई करने से रोका जा सके.