
ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है. पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने उस पोस्ट को डिलीट कर दिया है जिसमें उन्होंने वार्ता में शामिल होने के लिए ईरानी डेलीगेट्स के पाकिस्तान में पहुंचने की जानकारी दी थी. शुक्रवार इस्लामाबाद में शुरू होने वाली वार्ता से पहले ईरान के राजदूत के इस कदम को बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघदम ने गुरुवार को अपनी एक X पोस्ट डिलीट कर दी. इस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि देश का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाला है.
मोघदम ने कहा था कि लेबनान में इजरा/ल द्वारा संघर्ष-विराम के उल्लंघन के बावजूद, ईरान "गंभीर बातचीत" के लिए गुरुवार रात को इस्लामाबाद आ रहा है. उनकी ये टिप्पणियां ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ की टिप्पणियों के विपरीत थीं. ग़ालिबफ़ ने दावा किया था कि इन उल्लंघनों के कारण बातचीत "अतार्किक" है.

तो अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान की टीम इस्लामाबाद नहीं आ रही है. या ईरान अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए ऐसा कर रहा है.
अमेरिका के साथ वार्ता बेकार
इस बीच तेहरान के मेयर अलीरजा जकानी का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत "बेकार" है. तेहरान के मेयर ने वॉशिंगटन पर संघर्ष-विराम से जुड़े वादों को तोड़ने का आरोप लगाया है. ज़कानी ने रूहोल्लाह खोमैनी की उस चेतावनी का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका पर "भरोसा नहीं किया जा सकता."
उन्होंने कहा कि अब ईरानी लड़ाकों के "हाथ खुले हैं" और वे कड़ा जवाबी हमला कर सकते हैं. ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब इस क्षेत्र में कथित संघर्ष-विराम उल्लंघनों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है.
कल से शुरू होगी वार्ता
ये वार्ता 10 अप्रैल 2026 को शुरू होने वाली है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों पक्षों को आमंत्रित किया है और मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं. यह वार्ता 8 अप्रैल को घोषित दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए हो रही है. ईरान अपनी 10 सूत्री प्रस्ताव के आधार पर बातचीत कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे “काम करने लायक आधार” मान रहा है.

लेकिन इस वार्ता से पहले वार्ता की शर्तों, लेबनान पर हमले को लेकर इस जंग के पक्षकारों के बीच गंभीर मतभेद है.
ईरान अपनी सहयोगी सशस्त्र समूहों पर हमले रोकने और लेबनान में इजराजल की कार्रवाई बंद करने की मांग कर रहा है. पाकिस्तान का दावा है कि सीजफायर “हर जगह” लागू है, जिसमें लेबनान भी शामिल है, लेकिन इजरायल कह रहा है कि इस समझौते में लेबनान लागू नहीं है. प्रॉक्सी अभी भी सक्रिय हैं, जो सीजफायर को तोड़ सकते हैं.
होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर विवाद है. ईरान ने सीजफायर के बावजूद इसे पूरी तरह से बंद रखा है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार बाधित हो रहा है, तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और ईंधन की कमी हो रही है. ईरान अपनी 10 सूत्री योजना में यहां अपना “नियंत्रण और ओवरसाइट” चाहता है और उसे फीस भी चाहिए. जबकि ट्रंप इसे पूरी तरह से खुला रखना चाहते हैं. यह सीजफायर की शर्त का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है और वार्ता शुरू होने से पहले ही डंवाडोल हो रही है.
ईरान ने गुरुवार को कहा कि उसने होर्मुज में लैंड माइंस भी बिछा दिया है. और कोई भी टैंकर निर्धारित रूट के अलावा कहीं ओर से गुजरता है तो आपदा आ सकती है. इस वक्त होर्मुज में सैकड़ों तेल और गैस टैंकर फंसे हुए है.