ईरानी नेवी ने शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे भारतीय झंडे वाले दो जहाजों पर गोली चला दी जिस कारण जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा. इस घटना ने तनाव बढ़ा दिया और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी. लेकिन अब ईरान एक बार फिर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है.
रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने मॉस्को स्थित रूसी अखबार वेदोमोस्ती से बातचीत की है. सोमवार को प्रकाशित इंटरव्यू में ईरानी राजदूत ने कहा कि जहाज और पोत होर्मुज से गुजर सकते हैं.
उन्होंने कहा, 'ईरान सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करता है. सुरक्षा उपायों और होर्मुज स्ट्रेट के कानूनी प्रावधानों के आधार पर जहाज और पोत यहां से गुजर सकते हैं.'
जब उनसे पूछा गया कि होर्मुज से जहाज मुफ्त में गुजर रहे हैं या उन्हें ट्रांजिट फीस चुकानी पड़ रही है तो उन्होंने कहा, 'मैं आपको इसकी डिटेल्स नहीं बता सकता. यह हमारे आंतरिक फैसले पर निर्भर करता है. इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ईरान की संसद कई विकल्पों पर काम कर रही है.'
इंटरव्यू के दौरान जलाली ने कहा कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला विफल रहा, क्योंकि उनका मकसद ईरान में शासन परिवर्तन कराना था लेकिन इसके बजाय इस्लामिक गणराज्य पहले से कहीं ज्यादा एकजुट है. उन्होंने कहा, 'हम पहले से ज्यादा एकजुट हैं और हमारा संकल्प लोहे जैसा मजबूत है.'
उन्होंने युद्ध में रूस की भूमिका से जुड़ी खबरों का भी खंडन किया और कहा, 'रूस ने ईरान को खुफिया जानकारी मुहैया कराई है, ऐसी खबरें सही नहीं हैं.'
जहाजों पर फायरिंग को लेकर भारत ने क्या कहा?
शनिवार शाम को ही विदेश मंत्रालय ने भारत में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली को बुलाकर घटना पर चिंता जताई. विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने घटना पर चिंता जताई. उन्होंने ईरानी राजदूत के साथ बैठक में समुद्री सुरक्षा और आवाजाही की आजादी के महत्व पर जोर दिया.
इस दौरान भारत ने ईरान से अपील की कि भारत की तरफ आने वाले जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए. इस अपील पर ईरानी राजदूत ने भरोसा दिया कि वो भारत का पक्ष ईरानी शासन तक पहुंचाएंगे.
ईरान की तरफ से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आई है. भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता काफी मजबूत है और यह मामला जल्द सुलझा लिया जाएगा.
ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की वार्ता शुरू होने से पहले ही हो गई फेल?
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को 14 दिनों का सीजफायर हुआ था. इस सीजफायर के बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई थी. पाकिस्तान की मेजबानी में हुई यह वार्ता विफल रही थी लेकिन दोनों पक्ष कुछ समय बाद ही दूसरे दौर की बातचीत के लिए सहमत हुए.
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी और फिर होर्मुज के बंद होने से बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान दूसरे दौर के बातचीत की तैयारी कर रहा है.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंंडल पाकिस्तान पहुंच गया है. लेकिन इस बीच ईरान ने कहा है कि जब तक ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म नहीं होती, होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला जाएगा. ईरान की सरकारी मीडिया में यह भी संकेत हैं कि ईरान बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा.