जंग के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में ऑयल की बारिश हो रही है. यह कोई प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा पैदा की गई आपदा है. तेहरान के नागरिकों के लिए ये दोहरी आपदा है. ईरान पहले से ही इजरायल और अमेरिका के मिसाइल हमले झेल रहा है. इस बीच 'काली बारिस या तेल की बारिश ने ईरान की जनता को जानलेवा मुश्किलों में डाल दिया है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने मंगलवार को चेतावनी दी कि तेल प्लांट पर हमले के बाद ईरान में हो रही "ब्लैक रेन" से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. WHO ने कहा कि उसे इस हफ्ते तेल से भरी बारिश की कई रिपोर्ट मिली हैं. सोमवार को एक तेल रिफाइनरी पर हमला होने के बाद तेहरान काले धुएं में डूब गया.
8-9 मार्च 2026 को इजरायल ने तेहरान के आसपास के बड़े तेल डिपो और रिफाइनरियों जैसे शाहरान फ्यूल डिपो पर एयर स्ट्राइक की. इन हमलों से लाखों गैलन कच्चा तेल और ईंधन जलने लगा. उस आग से निकला घना काला धुआं जिसमें सूट, ब्लैक कार्बन, हाइड्रोकार्बन होते हैं, आसमान में फैल गया.
लगा आसमान से डीजल-पेट्रोल बरस रहा है...
ईरानी न्यूज एजेंसी FARS के मुताबिक पिछले शनिवार को इजरायली सेना के हमलों में तेहरान और अल्बोर्ज में चार तेल डिपो और तेल प्रोडक्शन ट्रांसफर सेंटर्स को नुकसान पहुंचा.
यहां जब बारिश हुई तो वह धुआं पानी के साथ मिलकर तेल-मिश्रित काली, चिपचिपी और जहरीली बारिश के रूप में नीचे गिरा. लोगों ने बताया कि कारें, छतें, सड़कें और बालकनी पूरी तरह काली चिपचिपी परत से ढक गईं, और बारिश में तेल की तेज बदबू आ रही थी. तेहरान का दिन भी रात जैसा काला हो गया. सांस के रोगियों के लिए ये स्थिति काफी परेशान करने वाली रही.
तेहरान में रिपोर्टिंग कर रही एजेंसियों ने कहा कि बारिश के पानी को छूकर ऐसा लगा जैसे तेहरान में डीजल जैसी चिपचिपी और काली लिक्विड की बारिश हो रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने जिनेवा में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "काली बारिश और उसके साथ आने वाली एसिडिक बारिश सच में लोगों के लिए खतरा है, खासकर सांस की बीमारियों के लिए." उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है.
WHO के एक स्टाफ मेंबर ने रॉयटर्स को एक वीडियो भेजा था, जिसमें उन्होंने कहा कि 8 मार्च को तेहरान में उसके ऑफिस के प्रवेश द्वार पर एक सफाईकर्मी काला लिक्विड साफ कर रहा था.
काली बारिश के पीछे का विज्ञान
ब्लैक रेन, या काली बारिश या 'तेल की बारिश' वातावरण की एक अनोखी घटना है जिसमें बारिश का रंग गहरा काला दिखाई देता है क्योंकि इसमें कालिख, राख, धूल या तेल की बूंदों जैसे सस्पेंडेड मैटर बहुत ज़्यादा होते हैं. वैज्ञानिक नजरिए से ब्लैक रेन वह बारिश है जो वायुमंडल से धरती तक आते आते काली हो जाती है. क्योंकि वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर उच्चतम होता है.
काली बारिश में हाइड्रोकार्बन और तेल के कण, PM 2.5, कैंसर पैदा करने वाले पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और अम्लीय बारिश कराने वाले सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड होते हैं.