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'जिनको CPR दिया, उनका मुंह धुएं से काला था', दिल्ली अग्निकांड के चश्मदीद ने बताई खौफनाक दास्तां

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिस स्टे होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई. हादसे के दौरान हौजरानी गांव के स्थानीय लोगों और मैक्स अस्पताल के कर्मचारियों ने पुलिस व फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर बचाव अभियान चलाया. वसीम राजा और उनके साथियों ने धुएं से बेहोश लोगों को सीपीआर दिया, जबकि मोहम्मद अफजल ने साथियों के साथ गद्दे और बेडशीट की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने में सहयोग किया. बचाव दल ने कई लोगों की जान बचाई, हालांकि कुछ को नहीं बचाया जा सका.

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दिल्ली अग्निकांड के ज्यादातर पीड़ित विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं. Photo PTI
दिल्ली अग्निकांड के ज्यादातर पीड़ित विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं. Photo PTI

दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब फ्लोरिस स्टे नामक होटल में अचानक भीषण आग भड़क उठी. इस दुर्घटना में अब तक 21 लोगों के जान गंवाने की सूचना है. घटना की खबर मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के साथ-साथ फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया. कई लोगों को इमारत से बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन आग और घने धुएं के कारण कई लोग इसकी चपेट में आ गए. दिल्ली मालवीय नगर के वे हीरो जिन्होंने पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर लोगों की जान बचाई सुनिए उनकी जुबानी.

'जिन लोगों की जान बची है, उससे हमें खुशी है'
वसीम राजा ने बताया, 'मैं हौजरानी गांव का रहने वाला हूं और मैक्स अस्पताल में काम करता हूं. हमें ट्रेनिंग दी जाती है कि किसी भी आपात स्थिति, जैसे आग लगने पर, लोगों को सीपीआर कैसे दिया जाए और बचाव कार्य कैसे किया जाए. हमने होटल के अंदर भी लोगों को सीपीआर दिया और बाहर निकालकर एंबुलेंस में भी उनकी मदद की. साथ ही हमने तुरंत अपने प्रबंधन को भी सूचना दी. पूरी टीम समय पर पहुंच गई. जिन लोगों की जान बची है, उससे हमें खुशी है.'

'धुएं की वजह से बेहोश हो गए'
उन्होंने आगे कहा, अधिकांश लोग आग से नहीं जले थे, बल्कि धुएं की वजह से बेहोश हो गए थे. जिन लोगों को हमने मुंह से सीपीआर दिया, उनका मुंह धुएं से काला पड़ गया था, लेकिन वे जले नहीं थे. हमने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें मुंह से सांस देकर बचाने की कोशिश की. इसी वजह से कुछ लोगों की जान बच सकी. हालांकि, कुछ लोगों को हम नहीं बचा पाए.

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गद्दे बिछाए ताकि ऊपर फंसे लोग कूदकर अपनी जान बचा सकें
मोहम्मद अफजल ने बताया, 'मेरा नाम मोहम्मद अफजल है. जब हम सुबह यहां पहुंचे, तब तक इमारत में भीषण आग लग चुकी थी. हमने सामने मौजूद गद्दे की दुकान से गद्दे लेकर नीचे बिछाए, ताकि ऊपर फंसे लोग कूदकर अपनी जान बचा सकें. कुछ लोग कूदने में सफल रहे और उन्होंने अपनी जान बचा ली. आग बहुत ज्यादा थी. इसके बाद हाजी जी ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी. फायर ब्रिगेड के पहुंचने और आग पर काबू पाने के बाद हम अंदर जाकर लोगों को बाहर निकाल सके.'

मोहम्मद अफजल ने कहा, 'हमने अरमान नाम की दुकान से गद्दे और बेडशीट लीं. दुकान मालिक ने हमारी मदद करने से इनकार नहीं किया. घायल लोगों को नीचे उतारने के लिए हमारे पास कोई साधन नहीं था, इसलिए हमने बेडशीट का इस्तेमाल स्ट्रेचर की तरह किया और लोगों को सुरक्षित बाहर लेकर आए.'

'ज्यादातर पीड़ित विदेशी नागरिक थे'
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'मेरी उम्र 35 साल है और मैं हौजरानी में रहता हूं. हमारे अन्य साथी भी यहीं के रहने वाले हैं. सुबह करीब 8:45 बजे हम यहां पहुंचे. उस समय तक आग काफी फैल चुकी थी. हमने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और ऊपर से कूदने वाले लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की. फायर ब्रिगेड के पहुंचने के बाद हम उनके साथ इमारत के अंदर भी गए और वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला. कुछ लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि कुछ लोग जीवित थे. ज्यादातर पीड़ित विदेशी नागरिक थे.' हमें आग बुझाने और बचाव कार्य का प्रशिक्षण मिला हुआ है. मैं मैक्स अस्पताल का कर्मचारी हूं और इसी प्रशिक्षण की मदद से हमने राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया.'

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