अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ा घटना सामने आई है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों के साथ हुई गुप्त बातचीत में स्वीकार किया है कि होर्मुज स्ट्रेट में कारोबारी जहाजों पर हमला "गलती" थी और अब वह बातचीत का रास्ता जारी रखना चाहता है.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन को बताया कि जहाजों पर हमला ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी गुट के कुछ तत्वों ने किया, जिनका मकसद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को पटरी से उतारना था. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधियों ने कहा, "हमसे गलती हो गई. हम बातचीत जारी रखना चाहते हैं."
यह भी पढ़ें: होर्मुज किया बंद तो ईरान पर टूट पड़ा अमेरिका, तेल-गैस की सप्लाई पर फिर खतरा
व्हाइट हाउस ने इस घटना को युद्धविराम का उल्लंघन माना है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करे कि जहाजों पर हमला गलत था और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी. अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान फिर किसी तरह की सैन्य आक्रामकता दिखाता है, तो उसके खिलाफ सैन्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
होर्मुज में तनाव कम करने के लिए ओमान में वार्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अपने वरिष्ठ सलाहकारों को ईरान के साथ बातचीत जारी रखने के निर्देश दिए हैं. दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ओमान में वार्ता का दौर भी प्रस्तावित है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान के दौरे पर भी गए हैं, जहां होर्मुज में तनाव को लेकर बातचीत हुई.
अमेरिका-ईरान में फिर क्यों बढ़ा तनाव
अमेरिका की एक और प्रमुख शर्त यह है कि होर्मुज स्ट्रेट पहले की तरह पूरी तरह खुला रहे और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा न आए. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर ईरान इस बुनियादी शर्त पर भी सहमत नहीं होता, तो परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा.
यह भी पढ़ें: '1000 मिसाइलें लॉक्ड एंड लोडेड', ट्रंप ने ईरान को दी मिट्टी में मिलाने की धमकी
अमेरिकी अधिकारियों का यह भी दावा है कि ईरान को उम्मीद नहीं थी कि तेल और गैस से लदे इतने जहाज ओमान के दक्षिणी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करेंगे. इसी वजह से उसने अपनी रणनीति बदली और जहाजों को निशाना बनाया. हालांकि, तेहरान ने सार्वजनिक रूप से इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है.