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ईरान युद्ध के बीच खतरनाक हुआ तेल के जहाजों के गुजरने का रास्ता! भारत ने अमेरिका से की ये मांग

पश्चिम एशिया में युद्ध के बढ़ते खतरे के बीच भारत ने मध्य पूर्व से आने वाले तेल और गैस के जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका से समुद्री कवर मांगा है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. सरकार वैकल्पिक देशों से तेल और गैस खरीदने की कोशिश भी कर रही है.

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ईरान होर्मुज स्ट्रेट में पास करने वाले शिप्स को निशाना बना रहा है.. (Photo- Reuters)
ईरान होर्मुज स्ट्रेट में पास करने वाले शिप्स को निशाना बना रहा है.. (Photo- Reuters)

पश्चिम एशिया या कहें कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और समुद्री हमलों के खतरे के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है.समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार मध्य पूर्व से आने वाले तेल और गैस के जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका से समुद्री सुरक्षा कवर पर बातचीत कर रही है.

सरकारी सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया, भारत चाहता है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों को सुरक्षा दे. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर यह सुरक्षा बेहद अहम मानी जा रही है.

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दरअसल होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया की खपत का करीब पांचवां हिस्सा तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है. लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह रास्ता अब बेहद खतरनाक हो गया है.

समुद्री व्यापार को ट्रंप ने दिया फाइनेंशियल कवर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संकट को देखते हुए अमेरिकी एजेंसियों को समुद्री व्यापार के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय गारंटी देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना जहाजों को सुरक्षा देते हुए होर्मुज स्ट्रेट से पास करा सकती है.

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भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व पर निर्भर है. भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत इसी क्षेत्र से खरीदता है. इसके अलावा रसोई गैस यानी एलपीजी की करीब 85 से 90 प्रतिशत आपूर्ति भी यहीं से आती है.

भारत की तरफ से कई देशों से तेल-गैस खरीदने की प्लानिंग

ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए भारत अब कई देशों से तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सोनाट्रैक, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी, टोटलएनर्जीज, विटोल और ट्रैफिगुरा जैसी कंपनियों से भी बातचीत कर रही है.

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अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने भी नई दिल्ली में आयोजित रायसेना डायलॉग सम्मेलन के दौरान कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करने के लिए तैयार है.

भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर जंग का असर

युद्ध का असर अब भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है. कुछ कंपनियों ने ईंधन के निर्यात को अस्थायी रूप से रोक दिया है और अपनी रिफाइनरी की कुछ इकाइयों को बंद कर दिया है.

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इसके अलावा भारत की सबसे बड़ी गैस सप्लायर देशों में शामिल कतर से भी गैस सप्लाई प्रभावित हुई है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने और आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत को करीब 60 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस रोजाना कम मिल रही है.

सरकार का कहना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो देश में गैस की सप्लाई को अलग-अलग क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बांटा जा सकता है, ताकि किसी भी उद्योग या जरूरी सेवा को पूरी तरह बंद न करना पड़े.

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