देश में चल रहे 'इंडिया बनाम भारत' के विवाद के बीच संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने इस मामले पर टिप्पणी की है. यूएन अधिकारी ने कहा है कि जब उन्हें नाम बदलने को लेकर किसी तरह का अनुरोध मिलेगा तब यूएन उस पर विचार करेगा. यूएन महासचिव एंटोनियो गुटरेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बुधवार को इस संबंध में टिप्पणी करते हुए तुर्की का उदाहरण दिया.
तुर्की ने पिछले साल अपना नाम बदलकर तुर्किए कर लिया था. रेचेप तैय्यप एर्दोगन की सरकार ने भी देश का नाम बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र में आवेदन दिया था जिसके बाद तुर्की का नाम बदलकर तुर्किए हो गया.
इंडिया का नाम बदलकर भारत किए जाने के एक सवाल पर हक ने कहा, 'ठीक है, तुर्किये के मामले में, हमें उनकी सरकार ने एक औपचारिक अनुरोध किया था जिसका हमने जवाब दिया. जाहिर है, अगर हमें इस तरह के अनुरोध मिलते हैं, तो हम उन पर विचार करते हैं.'
कैसे शुरू हुआ देश का नाम बदलने का विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत मंगलवार को उस वक्त हुई जब जी-20 शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र पर 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा गया. निमंत्रण पत्र के सामने आने के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश का नाम इंडिया शब्द के इस्तेमाल को बंद कर केवल भारत कहे जाने की योजना बना रही है. यह भी कहा जा रहा है कि संसद का विशेष सत्र भी इसलिए बुलाया जा रहा है ताकि इंडिया का नाम भारत कर दिया जाए.
बीजेपी के नेताओं ने भी इस संबंध में ट्वीट किए हैं जिससे नाम बदलने की खबरों को हवा मिल रही है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जी-20 का अपनी निमंत्रण पत्र एक्स (ट्विटर) पर साझा किया है जिसमें प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपना निमंत्रण पत्र साझा किया है जिस पर प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा है.
इंडिया बनाम भारत के विवाद पर पीएम मोदी क्या बोले?
वहीं, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मंत्रियों के साथ बैठक की जिसमें उन्होंने कहा कि वो इंडिया बनाम भारत के विवाद में बयानबाजी न करें, जिन्हें बोलने के लिए अधिकृत किया जाए, केवल वही बोलें.
इस मीटिंग में पीएम मोदी ने मंत्रियों से यह भी कहा कि जी-20 बैठक को देखते हुए सभी मंत्री दिल्ली में मौजूद रहें. मंत्रियों को पहले से ही कहा गया है कि उन्हें विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ रहना है इसलिए वो इस बात का ध्यान रखें कि विदेशी नेताओं को किसी तरह की दिक्कत न हो. पीएम मोदी ने भी मंत्रियों से कहा है कि वो विदेशी नेताओं के देशों की संस्कृति, रहन-सहन और खान-पान की बुनियादी जानकारी पहले से ही हासिल कर लें.
जी-20 शिखर सम्मेलन 9-10 सितंबर के बीच नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटिश राष्ट्रपति ऋषि सुनक समेत दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल हो रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हालांकि, बैठक में नहीं आ रहे हैं.