भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पाकिस्तान से भी खूब सराहना मिल रही है. पाकिस्तान में कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी-हुजूरी करने में रह गए और भारत अपनी शर्तों पर समझौता कर रहा है. डील को लेकर भारत की तारीफ करने वालों में शहबाज शरीफ के करीबी माने जाने वाले पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी भी हैं.
व्हाइट हाउस की तरफ से जानकारी दी गई है कि भारत-अमेरिका जल्द ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता करेंगे. दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौता हो चुका है जिसके बाद ट्रंप ने भारत पर लगा 50% टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है. इस ऐतिहासिक समझौते में किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और मछुआरों के लिए नए बाजार अवसर खुलेंगे.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील डील पर टिप्पणी करते हुए नजम सेठी ने कहा कि भारत किसी से इशारों पर नहीं चलता बल्कि बातचीत के जरिए समझौते में विश्वास रखता है.
'भारत किसी के इशारे पर नहीं चलता'
पाकिस्तान के एक टीवी शो में बोलते हुए नजम सेठी ने कहा, 'भारत किसी के कहे पर नहीं चलता. भारत बातचीत करता है. और वही रियायतें चुपचाप दे देता है जो उसके हित में होती हैं.'
इसी दौरान नजम सेठी ने अमेरिका से बातचीत में पाकिस्तान की कमजोरी गिनाते हुए कहा कि पाकिस्तान भावनाओं में फैसले लेता है.
सेठी ने कहा, 'भारत लिहाज रखने या किसी का सम्मान रखने के लिए कोई समझौता नहीं कर लेता. हमारे यहां की राजनीति सम्मान पर आधारित है. भारत इस तरह से बातचीत नहीं करता.'
सेठी ने इस दौरान स्वीकार किया कि भारत ने डील के लिए कुछ व्यापारिक रियायतें दी हैं, लेकिन इस दावे को खारिज किया कि ये किसानों के हितों के खिलाफ थीं.
उन्होंने कहा, 'भारत ने कुछ रियायतें दी हैं, जिनकी आलोचना हो रही है… लेकिन कहा रहा है कि भारत ने किसानों की रक्षा नहीं की. ऐसा नहीं है, किसानों की रक्षा की गई और अमेरिकी निर्यातकों को इजाजत दी गई.'
ट्रंप की जी-हुजूरी से पाकिस्तान को नहीं हुआ कोई फायदा
नजम सेठी ने शो में पाकिस्तान की विफल विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि शरीफ सरकार ने ट्रंप की खूब तारीफ की है, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा, 'मैं पहले दिन से कह रहा हूं कि डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा सकता. वो ऐसी मांगें रख सकते हैं जिन्हें पूरा करना पाकिस्तान के लिए मुश्किल होगा. और अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है तो डोनाल्ड ट्रंप आप पर जवाबी दबाव डालेंगे… भविष्य में ऐसी स्थिति बन सकती है.'
सेठी ने आगे कहा, 'इस समय ट्रंप प्रशासन के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं, लेकिन मध्य-पूर्व की बदलती स्थिति और भारत-अमेरिका संबंधों के फिर पटरी पर आने की वजह से संबंधों में तनाव आ सकता है.'
फरवरी की शुरुआत में ट्रंप ने की थी घोषणा
अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाया था जिसमें 25% टैरिफ रूसी तेल की खरीद के लिए सजा के तौर पर लगाया गया था.
2 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि ट्रेड डील पर सहमति बन गई है जिस कारण भारत पर लगा टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया है. ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद रोकने के लिए राजी हो गया है जिससे 25% टैरिफ अपनेआप कम हो रहा है और बचे 25% रेसिप्रोकल टैरिफ को भी 7% घटाकर 18% कर दिया गया.
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी. माना जा रहा था कि भारत अपने कृषि और डेयरी उद्योग के हितों को देखते हुए अमेरिका से डील करने में देरी कर रहा है. भारत अपनी शर्तों पर अड़ा रहा और आखिरकार ट्रंप ने कृषि और डेयरी सेक्टर में भारतीय किसानों के हितों का ध्यान रखा जिसके बाद डील पर सहमति बनी है.