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समंदर में पड़ा सारा रूसी तेल भारत ने खरीद लिया! चुकानी पड़ी इतनी बड़ी कीमत

भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट मिलने के बाद, भारतीय कंपनियों ने बाजार में उपलब्ध लगभग सारा रूसी कच्चा तेल खरीद लिया है. यह खरीदारी मध्य-पूर्व में तेल सप्लाई रुकने और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच हुई है.

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रूसी तेल खरीद की पेमेंट को लेकर मामला अटक रहा है (File Photo: Reuters)
रूसी तेल खरीद की पेमेंट को लेकर मामला अटक रहा है (File Photo: Reuters)

अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की जैसे ही अस्थायी छूट जारी की, भारतीय कंपनियों ने बाजार में उपलब्ध लगभग सारा रूसी कच्चा तेल खरीद लिया है. बताया जा रहा है कि एक ही हफ्ते में भारतीय रिफाइनरियों ने बाजार में उपलब्ध करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है.

ब्लूमबर्ग ने मंगलवार को इस डील से जुड़े लोगों के हवाले से ये जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक, तेल खरीद की यह मात्रा लगभग उतनी ही है जितना रूस से भारत ने फरवरी के महीने में आयात किया था. फरवरी में भारत ने रूस से रोजाना औसतन 11 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था.

3 करोड़ बैरल का एक बड़ा हिस्सा पहले ही टैंकरों पर लोड हो चुका था लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां इसे खरीद नहीं पा रही थीं. जहाजों पर लदा रूस का यह तेल भारत के आसपास के समंदर में फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में भटक रहा था और इसे कोई खरीदार नहीं मिल पा रहा था.

इस बीच भारत ने कहा है कि वो रूसी तेल की खरीद जारी रखेगा और इसके लिए अमेरिका की इजाजत की जरूरत को खारिज किया है.

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भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल कितना महंगा पड़ा

भारतीय कंपनियों ने हड़बड़ी में रूसी तेल की खरीदारी ऐसे समय में की है जब मध्य-पूर्व से तेल सप्लाई रुक रही है. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. इसकी वजह से भारत में सऊदी अरब और इराक से आने वाली तेल खेप एक हफ्ते से ज्यादा समय से फारस की खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रही हैं.

ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने का बड़ा मौका मिला है जिसका फायदा उठाते हुए उन्होंने धड़ाधड़ तेल खरीदा है. ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार, कंपनियों ने यह तेल काफी महंगी कीमत पर खरीदा है. रूस का यह तेल भारतीय रिफाइनरियों को ग्लोबल क्रूड बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल तक ज्यादा कीमत पर मिला है.

ईरान जंग ने बढ़ा दी तेल की कीमतें

पिछले शुक्रवार से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है. सोमवार सुबह कीमतें कुछ समय के लिए 120 डॉलर के करीब पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में इनमें तेज गिरावट आई. मंगलवार को 15:30 GMT तक ब्रेंट की कीमत करीब 88.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी.

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मध्य-पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले एशिया में रूसी कच्चा तेल, यूराल ब्रेंट के मुकाबले 10 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की छूट पर बिक रहा था, जिसमें खरीदार के बंदरगाह तक माल ढुलाई की लागत भी शामिल थी. लेकिन ईरान में जंग से रूसी तेल की मांग काफी बढ़ गई है.

वहीं, ब्रेंट की कीमत भी काफी बढ़ी है. पिछले साल गर्मियों से ब्रेंट ज्यादातर 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रही थी.

ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार सरकारी कंपनी 'इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन' और निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 'रिलायंस इंडस्ट्रीज' ने हाल के दिनों में करीब 1-1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है.

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