अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच खबर आई कि सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान वायुसेना अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले में अमेरिकी वायुसेना के पांच ईंधन भरने वाले विमान नष्ट हो गए. एक अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में हुए इस हमले में ये विमान जमीन पर खड़े थे, जब मिसाइलों की चपेट में आ गए. बताया गया कि विमानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन वे पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं और उनकी मरम्मत की जा रही है. इस हमले में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है.
डोनाल्ड ट्रंप ने रिपोर्ट को बताया गलत
न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान वायुसेना अड्डे पर अमेरिकी टैंकर विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. कई मीडिया संस्थानों में यह खबर आई थी कि ईरानी मिसाइल हमले में इन विमानों को भारी नुकसान पहुंचा है.
ट्रंप बोले- विमान नष्ट नहीं हुए
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि कुछ दिन पहले उस अड्डे पर हमला जरूर हुआ था, लेकिन विमान न तो सीधे निशाना बने और न ही नष्ट हुए. उन्होंने कहा कि पांच में से चार विमानों को लगभग कोई नुकसान नहीं हुआ और वे फिर से सेवा में लौट चुके हैं. एक विमान को थोड़ा ज्यादा नुकसान हुआ है, लेकिन वह भी जल्द ही उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाएगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए कई देश भेजेंगे युद्धपोत: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए अमेरिका के साथ कई देश अपने युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत अन्य देश भी इस क्षेत्र में अपने जहाज तैनात करेंगे, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रह सके.
ईरानी नौकाओं पर कार्रवाई की चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका तटवर्ती इलाकों पर जबरदस्त बमबारी करेगा और समुद्र में मौजूद ईरानी नौकाओं व जहाजों को निशाना बनाकर नष्ट करेगा. उनका कहना था कि अमेरिकी सेना लगातार ऐसी कार्रवाई करती रहेगी ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सके.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुलवाने का दावा
ट्रंप ने कहा कि किसी भी तरह से बहुत जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा. यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.