scorecardresearch
 

ईरान की सत्ता असल में किसके पास? होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग से बढ़ा कंफ्यूजन

भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना से साफ है कि होर्मुज से किसी भी जहाज के लिए गुजरना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. यह सिर्फ तेल-गैस का रास्ता नहीं, बल्कि यह तय करने का मैदान बन गया है कि ईरान में असली सत्ता किसके पास है.

Advertisement
X
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के गुजरने को लेकर संशय (File Photo)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के गुजरने को लेकर संशय (File Photo)

मिडिल ईस्ट की महाजंग किस दिशा में जा रही है, तस्वीर अब तक साफ नहीं है. शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग ने इस कंफ्यूजन को और बढ़ा दिया है. सवाल यह भी है कि आखिर में ईरान की सत्ता किसके हाथ में है और फैसले कौन ले रहा है? यह भी पूरी तरह साफ नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है या नहीं. यदि खुला है तो क्या ईरान के मित्र देशों के जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति है या नहीं?

भारतीय जहाजों पर फायरिंग के बाद विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया. नई दिल्ली ने इस घटना पर अपनी गंभीर चिंता और नाराजगी व्यक्त की. हालांकि, सवाल यह है कि ईरानी फौज ने नागरिक जहाजों पर फायरिंग किन परिस्थितियों में और क्यों की? माना जा रह है कि इस पूरे मामले में ईरान की आंतरिक राजनीति की बड़ी भूमिका हो सकती है.

दरअसल, ईरानी अधिकारी ने कहा कि सभी जहाज IRGC के साथ समन्वय के बाद ही गुजर सकते हैं. वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौते के बाद यह मार्ग खुला है. अराघची के बयान के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की हलचल बढ़ने लगी. अब जहाजों पर फायरिंग से ऐसा लगता है कि जमीनी स्तर पर फैसले IRGC ले रहा है.

Advertisement

क्या होर्मुज़ खुला है या बंद?
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से IRGC और ईरान सरकार के बीच मतभेद दिख रहे थे. शनिवार को जहाजों के आवागमन को लेकर जो भ्रम पैदा हुआ, उसने इस दरार को और गहरा कर दिया. ईरानी मीडिया का कहना है कि अराघची के बयान ने कंफ्यूजन पैदा किया.

मौजूदा हालात को देखें तो ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान सरकार और IRGC अलग-अलग फैसले लेते दिख रहे हैं. राष्ट्रपति पेजेशकियन समेत कुछ नेता अमेरिका के साथ मतभेद आपसी बातचीत और कूटनीति से सुलझाना चाहते हैं, वहीं IRGC कड़ा रुख अपनाए हुए है.

ईरान में कई शक्ति केंद्र
लंदन किंग्स कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रेज क्रीग के अनुसार, ईरान की व्यवस्था में कई शक्ति केंद्र हैं, जिससे स्पष्ट नेतृत्व नहीं दिखता. होर्मुज पर IRGC का कंट्रोल है और उसने विदेश मंत्री अराघची के बयान से सहमति नहीं जताई. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल और गैस का करीब 20 फीसदी हिस्सा कारोबार होता है. भारत का भी लगभग 90 फीसदी गैस आयात इसी रास्ते से होता है.

मार्च के अंत से ही राष्ट्रपति राष्ट्रपति पेजेशकियन और IRGC के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आ रहे थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ने IRGC की कार्रवाइयों को लापरवाह बताया. वहीं IRGC ने अपने कई फैसलों से बता दिया कि ईरान की असली सत्ता उसके पास है. अप्रैल की शुरुआत में एक मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति ने IRGC पर एकतरफा फैसले” लेने का आरोप लगाया. इसके बावजूद सीनियर आईआरजीसी कमांडर अहमद वहीदी और हुसैन तएब ने अपना रुख नहीं बदला.

Advertisement

फारस की खाड़ी में अनिश्चितता
जमीनी स्तर पर भी IRGC का दबदबा साफ दिखता है. उसने जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए. कुछ पर हमले किए और समुद्री बारूदी सुरंगें भी बिछाईं. इस बीच विदेश मंत्री अराघची नरम रुख अपनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सरकार और IRGC के बीच दूरी बढ़ती गई. युद्ध के दौरान शीर्ष नेताओं की मौत के बाद सत्ता का खालीपन बना, जिसका फायदा उठाकर IRGC ने ईरान में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली.

भारतीय जहाजों पर ताजा फायरिंग की घटना से साफ नहीं है कि फिलहाल होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित या खुला नहीं है. यह सिर्फ तेल-गैस का रास्ता नहीं, बल्कि यह तय करने का मैदान बन गया है कि ईरान में असली सत्ता किसके पास है. जब तक यह सवाल सुलझता नहीं, फारस की खाड़ी में अनिश्चितता बनी रहेगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement