scorecardresearch
 

'बाजार में हेरफेर के लिए हमले रोकने की फैलाई फेक न्यूज', ट्रंप-नेतन्याहू पर बरसे ईरानी स्पीकर

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

Advertisement
X
 ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo: ITG)
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo: ITG)

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के साथ बातचीत के दावों को फर्जी खबर करार दिया. गलीबाफ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के लिए यह रणनीतिक असफलता से ध्यान हटाने और बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं की.

गलीबाफ ने अपने ट्वीट में कहा कि फर्जी खबर का उद्देश्य वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करना और अमेरिका-इजरायल को जकड़े हालात से बचाना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी अधिकारी अपने सर्वोच्च नेता और जनता के पीछे खड़े हैं और जब तक आक्रमणकारियों को पूरी तरह सजा नहीं मिलती, तब तक पीछे नहीं हटेंगे.

ईरान स्पीकर ने ट्रंप-इजरायलइजरायल वार्ता के दावे को ठुकराया

इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा स्थलों पर किसी भी हमले को अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की थी. ट्रंप ने इसे उत्पादक वार्ताओं का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि यह निर्णय वार्ता के सफल होने पर ही स्थायी रूप से लागू होगा.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है. उन्होंने कहा कि चर्चाएं गहन, विस्तृत और रचनात्मक रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पांच दिन की अवधि के लिए किसी भी सैन्य कार्रवाई को टालने का निर्णय वार्ता की सफलता पर निर्भर करेगा.

Advertisement

फर्जी खबरों का उद्देश्य वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करना

तेहरान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांदी ने ट्रंप के दावों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि हर हफ्ते, जब बाजार खुलते हैं, ट्रंप इस तरह के बयान देते हैं ताकि तेल की कीमतें कम हों. उनका कहना था कि ट्रंप की पांच-दिन की सीमा भी ऊर्जा बाजार के बंद होने के साथ मेल खाती है.

मरांदी ने कहा कि वास्तव में कोई वार्ता नहीं चल रही है और ट्रंप के पास हॉर्मुज जलसंधि को फिर से खोलने की क्षमता नहीं है. ईरान की कड़ी धमकी ने ट्रंप को फिर से पीछे हटने पर मजबूर किया है. 

इस बीच, राजनीतिक विश्लेषक कमलेश किशोर सिंह ने इस अस्थायी ठहराव के समय पर ध्यान आकर्षित किया. उनका कहना था कि यह समय संभावनाओं से भरा दिखता है और अमेरिकी व्यापारी सहयोगियों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है.

ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा स्थलों पर हमले को अस्थायी रूप से स्थगित किया

ईरान की जनता ने आरोप लगाया कि आक्रमणकारियों के खिलाफ पूरी और कठोर सजा की मांग की जानी चाहिए. गलीबाफ ने यह भी कहा कि ईरानी अधिकारी और जनता अपने नेता के पीछे मजबूती से खड़े हैं.

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही चर्चाएं पूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में हैं. उनका यह भी कहना था कि यह स्थगन केवल तभी लागू रहेगा जब वार्ता सफल हो. विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के बयान का उद्देश्य वैश्विक तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना हो सकता है. उन्होंने इसे राजनीतिक और व्यापारिक हितों से जोड़ा.

Advertisement

ईरान के स्पीकर ने दोहराया कि अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं को छुपाने के लिए यह फर्जी खबर फैलाई जा रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं हुई और ईरानी अधिकारी केवल अपने सर्वोच्च नेता और जनता के साथ खड़े हैं.

प्रोफेसर मरांदी और विश्लेषक ट्रंप के दावों पर सवाल उठाते हैं

अमेरिका-ईरान संबंधों में इस विवाद ने मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ाया है. वार्ता के दावे और ईरान की प्रतिक्रिया ने वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों पर प्रभाव डाला है. अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की रणनीति और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया से क्षेत्रीय तनाव और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है.

ईरान की सरकार ने जोर दिया कि कोई भी अमेरिकी दबाव या वार्ता का दावाकरण उनके नीति निर्धारण को प्रभावित नहीं करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी जनता और अधिकारियों की प्राथमिकता आक्रमणकारियों को न्याय दिलाना है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement