संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए अनुभवी फ्रांसीसी राजनयिक जीन आर्नो को अपना विशेष दूत नियुक्त किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह संघर्ष 'नियंत्रण से बाहर' होता जा रहा है और दुनिया एक बड़े युद्ध के खतरे के सामने खड़ी है. उन्होंने खास तौर पर शांति वार्ता (peace talks) और मध्यस्थता (mediation) के लिए नियुक्त किया गया है.
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गुटेरेस ने कहा कि क्षेत्र और दुनिया भर में शांति के लिए कई पहलें चल रही हैं, जिन्हें सफल होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लंबा बंद रहना तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.
गुटेरेस ने अमेरिका और इजरायल से युद्ध खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि मानवीय संकट और नागरिक हताहत लगातार बढ़ रहे हैं. वहीं, ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले रोकने को कहा. उन्होंने हिज़्बुल्लाह से इजरायल पर हमले बंद करने और इजरायल से लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने की भी अपील की.
ईरान अपनी शर्तों पर खत्म करेगा युद्ध
इस बीच मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ा युद्ध अब भी जारी है और 28 मार्च को इसे एक महीना पूरा होने जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान युद्ध समाप्त करना चाहता है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल अपनी शर्तों पर ही संघर्ष खत्म करेगा.
ईरान ने ट्रंप द्वारा तय किसी भी समयसीमा को खारिज करते हुए अमेरिकी प्रस्ताव को एकतरफा बताया है. सरकारी मीडिया के अनुसार, प्रस्ताव पर विचार जरूर किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती प्रतिक्रिया नकारात्मक है. ईरान का कहना है कि युद्धविराम का फैसला पूरी तरह उसके हाथ में रहेगा.
तेहरान ने अपनी पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिनमें हमले पूरी तरह बंद करना, भविष्य में युद्ध रोकने का ठोस तंत्र, नुकसान की भरपाई की गारंटी, सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करना और होर्मुज पर उसकी संप्रभुता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता शामिल है.
ईरान ने यह भी कहा कि जब तक उसकी मांगें नहीं मानी जातीं, उसकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी. वह न सिर्फ अपने खिलाफ बल्कि पूरे क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के अंत की बात कर रहा है.