मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया फोन कॉल चर्चा में दिग्गज अरबपति एलन मस्क ने भी हिस्सा लिया था. हालांकि इसको लेकर अभी तक अमेरिका या भारत की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की. बातचीत का विषय था मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति. ट्रंप ने ईरान युद्ध के लगभग चार हफ्ते बाद पीएम मोदी को फोन किया. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट में चल रही स्थिति पर चर्चा की के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने को लेकर चर्चा हुई थी. इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से बातचीत की थी.
अब इस फोन कॉल को लेकर अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को हुई इस बातचीत में मस्क की मौजूदगी कूटनीतिक परंपराओं से हटकर एक असामान्य कदम माना जा रहा है, क्योंकि किसी युद्ध जैसी संवेदनशील स्थिति में आमतौर पर केवल सरकारी अधिकारी ही शामिल होते हैं. वहीं एलन मस्क किसी भी सरकारी पद पर नहीं हैं, ऐसे में दो देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बातचीत में उनकी मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है.
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रिपोर्ट के मुताबिक यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मस्क ने बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई या नहीं, और उन्हें इस कॉल में शामिल क्यों किया गया.
क्या बैकचैनल डिप्लोमेसी का संकेत?
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्क की मौजूदगी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंधों में सुधार का संकेत हो सकती है. पिछले साल दोनों के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं, लेकिन अब यह घटनाक्रम नए समीकरणों की ओर इशारा करता है. मस्क के बिजनेस हित जैसे स्पेस, ऊर्जा और उभरते बाजार, मिडिल ईस्ट और भारत जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं, जो इस संकट से सीधे प्रभावित हो रहे हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एलन मस्क भारत में अपने कारोबार को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. खासकर सैटेलाइट इंटरनेट जैसी सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार से मंजूरी का इंतजार है. ऐसे में उनकी मौजूदगी को रणनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले पर न तो व्हाइट हाउस और न ही भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर एलन मस्क की मौजूदगी का जिक्र किया है. व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि एलन मस्क की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग को 1 महीना पूरा हो गया है. अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है. वहीं ईरान ने भी अमेरिका के 13 बेस तबाह करने का दावा किया है. इसके साथ ही ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी कर दी गई है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं. शिपिंग में बाधा की आशंका से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है और एशिया के कई देशों में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.