मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका "भारी तबाही" मचाने से पीछे नहीं हटेगा.
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है और कई जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है. इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और कई देशों पर असर पड़ा है. यही वजह है कि अमेरिका इस रास्ते को हर हाल में खुलवाना चाहता है.
यह भी पढ़ें: ईरान में 'रिजीम चेंज' करने वाले ट्रंप की खुद की सत्ता हिली, व्हाइट हाउस में बढ़ी हलचल
ट्रंप ने पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी दी. कभी 10 दिन का समय दिया, कभी कुछ हफ्तों की बात की. हर बार या तो डेडलाइन बढ़ा दी गई या बातचीत का हवाला देकर फैसला टाल दिया गया. ट्रंप ने अपने ताजा बयान में उसी 10 दिनों के अल्टीमेटम की याद दिलाई जो उन्होंने 26 मार्च को दी थी.
ट्रंप के धमकियों की टाइमलाइन
21 मार्च को ट्रंप ने पहली बार 48 घंटे की चेतावनी देते हुए कहा था कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे को "उड़ा दिया जाएगा." हालांकि, बाद में उन्होंने बातचीत में प्रगति का हवाला देते हुए इस डेडलाइन को 5 दिन के लिए टाल दी.
26 मार्च को ट्रंप ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए 10 दिन की नई डेडलाइन दी. उन्होंने दावा किया कि यह समयसीमा ईरानी सरकार के अनुरोध पर बढ़ाई गई है. लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो सका. ईरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए किसी भी तरह की बातचीत होने से इनकार किया था.
2 अप्रैल को ट्रंप ने अपने राष्ट्र संबोधन में एक और सख्त बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान को "स्टोन एज" में पहुंचा सकता है. यह बयान साफ संकेत था कि सैन्य कार्रवाई अब बेहद करीब है और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका कोई घातक हमला कर सकता है.
अब 4 अप्रैल को जारी 48 घंटे का "फाइनल अल्टीमेटम" इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.
ईरान ने भी दी "नरक के दरवाजे" खोलने की चेतावनी
ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने ट्रंप की चेतावनी को "बेतुकी" बताते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो "नरक के दरवाजे" अमेरिका के लिए खुल जाएंगे.
यह भी पढ़ें: मौत के मुंह से बच निकला पायलट, भारी गोलीबारी के बीच ईरान से सुरक्षित खोज लाई अमेरिकी सेना
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे संघर्ष का केंद्र बन चुका है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की सप्लाई होती है. अगर यहां कोई बड़ा सैन्य टकराव होता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
अब दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं. यह तय करेगा कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त में कोई रास्ता निकाल पाएगी, या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा.
ट्रंप अगले 48 घंटे में ईरान में क्या करने वाले हैं?
अगर ईरान झुकने के बजाय जवाबी कार्रवाई तेज करता है, तो अगला कदम "स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर" पर हमले हो सकते हैं. इसमें तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल ठिकानों के साथ-साथ होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरानी नौसेना, रडार सिस्टम और एंटी-शिप मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया जा सकता है.
साथ ही, ईरान के एयर डिफेंस नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से खत्म कर अमेरिकी और इजरायली विमानों के लिए हवाई क्षेत्र लगभग खुला किया जा सकता है. यह रणनीति ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता को सीमित करने पर केंद्रित हो सकती है. सबसे जोखिम भरा विकल्प "डिकैपिटेशन-प्लस" माना जा रहा है, जिसमें ईरान के और भी शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाया जा सकता है. इसमें IRGC कमांडरों, सुरक्षा प्रमुखों और संभावित नए नेताओं पर हमले शामिल हो सकते हैं.