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ईरान में अमेरिका का 'एंडगेम'... न्यूक्लियर साइट पर इजरायल का भीषण हमला, क्या शुरू होने वाला है महायुद्ध?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध एक महीने में और भीषण हो गया है. न्यूक्लियर साइट्स पर हमलों और ईरान के जवाबी हमलों से हालात खतरनाक हैं. हूती और हिजबुल्लाह की एंट्री ने तनाव बढ़ा दिया है. अमेरिका ईरान की घेराबंदी में जुटा है, जबकि ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं. परमाणु हथियार को लेकर बहस तेज है. लगातार हमलों के बीच आशंका है कि यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है.

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हूती-हिजबुल्लाह की एंट्री से जंग खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. Photo ITG
हूती-हिजबुल्लाह की एंट्री से जंग खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. Photo ITG

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध छिड़े आज एक महीने हो गए. हर दिन बीतने के साथ युद्ध और भीषण होता जा रहा है. क्योंकि अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच ईरान का जवाबी अटैक लगातार जारी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने को लेकर अमेरिका की कोई रणनीति काम नहीं आ रही है. इस बीच ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर इजरायली हमलों ने इस जंग को और खतरनाक मोड़ पर ला दिया है. जंग इसलिए और भीषण रुख लेती जा रही है क्योंकि अब इसमें हूती विद्रोहियों की भी एंट्री हो गई है. लेबनान में हिजबुल्लाह पहले ही युद्ध में पीछे ना हटने का दावा कर रहा है. इस बीच हूती विद्रोहियों के हमलों से मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और विध्वंसक रूप लेता जा रहा है.

इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमले जारी हैं. ईरान की ओर से हिज्बुल्ला मोर्चे पर डटा है. अब हूती विद्रोहियों की एंट्री से युद्ध और खतरनाक हो गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका जल्द ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाने की तैयारी में है. कई मोर्चों पर ईरान की घेराबंदी और लगातार परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जाना , इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.

क्या है अमेरिका की तैयारी?
अमेरिका ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश में लगा है, लेकिन ईरान किसी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं. तो क्या ईरान के जवाबी हमलों के बीच अब अमेरिका ने फाइनल प्रहार की तैयारी कर ली है. क्या ये जंग परमाणु युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है. दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सबसे खतरनाक सवाल खुलकर सामने आ गया है, क्या ईरान अब परमाणु बम बनाएगा?

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ईरान में परमाणु हथियार बनाने की मांग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में धार्मिक नेताओं का गुट अब खुले तौर पर परमाणु हथियार बनाने की मांग कर रहा है. ईरान पहले ही यूरेनियम को हथियार स्तर के करीब तक समृद्ध कर चुका है, इजरायल लंबे समय से दावा करता रहा है कि तेहरान कुछ महीनों में बम बना सकता है. माना जा रहा है कि यही वजह है कि अब अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.

बीते कुछ दिनों से ईरान के परमाणु साइट्स टारगेट पर हैं. लगातार हमले हो रहे हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी दावा कर रहे हैं की मध्य-पूर्व में परमाणु धमकियों को खत्म करने के लिए अमेरिका पूरी तरह से तैयार रहा.

क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
इस बीच ट्रंप ने कहा, हम मध्य-पूर्व में परमाणु धमकियों को खत्म कर रहे हैं. मेरे नेतृत्व में अमेरिका इस कट्टरपंथी शासन से पैदा खतरे को खत्म कर रहा है और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए ईरान की ताकत को तबाह कर रहा है. हमारे पास दुनिया दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है. मैंने इसे अपने पहले कार्यकाल में बनाया. हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिन्हें किसी ने नहीं देखा, और कुछ के बारे में तो कोई जानता भी नहीं है, सिवाय कुछ लोगों के. 47 साल तक ईरान को मिडिल ईस्ट का धौंस जमाने वाला देश माना जाता था, लेकिन अब वह भाग रहा है.

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यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला
इजरायल ने शुक्रवार को ईरान के यज्द में यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट को निशाना बनाया. इजराइली सेना के मुताबिक, हमले में उस फैसिलिटी को टारगेट किया गया जहां यूरेनियम समृद्ध करने के लिए जरूरी प्रोसेसिंग होती है. न्यूक्लियर ठिकानों पर अमेरिका-इजरायल के हमलों ने ईरान का गुस्सा भड़का दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि इन हमलों के लिए इजराइल को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है युद्ध?
उधर, बातचीत के तमाम दावों के बीच अमेरिका लगातार ईरान की घेराबंदी में जुटा है. फारस की खाड़ी के द्वीपों पर कब्जे की रणनीति भी सामने आ रही है. तो क्या अब अमेरिका ने ईरान में आर-पार की पूरी तैयारी कर ली है. ये सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी जंग को लेकर बड़ा दावा किया है. रूबियो ने कहा कि युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है.

इस दावे के बीच माना जा रहा है कि अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान पर हमले और तेज हो सकते हैं. ईरान के सैन्य ठिकानों साथ न्यूक्लियर प्लांट निशाने पर होंगे. ऐसे में इन हमलों से जंग के और भड़कने की आशंका बढ़ती जा रही है.

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