ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के चलते देश में ईंधन संकट लगातार गहराता जा रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील करनी पड़ी है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है. इस बीच संकट की घड़ी में भारत को अपने 'दोस्त देश' रूस की तरफ से बड़ा और मजबूत भरोसा मिला है.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कहा है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सभी समझौतों को हर हाल में पूरा किया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अनुचित और बेईमान प्रतिस्पर्धा के बावजूद रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के हितों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे. दिल्ली यात्रा से पहले दिए एक इंटरव्यू में लावरोव ने भारत-रूस संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते गहरी दोस्ती पर आधारित हैं. ऐसी कोई स्थिति पैदा नहीं हो सकती, जिसमें भारत-रूस के रास्ते अलग हो जाएं.
लावरोव ने कहा कि रूस ने ऊर्जा आपूर्ति के मामले में कभी भारत के प्रति अपने दायित्वों को निभाने में कोताही नहीं बरती है. उन्होंने कहा, ''मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूस से होने वाली आपूर्ति के संबंध में भारत के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. हम हर संभव प्रयास करेंगे कि यह अनुचित और बेईमान प्रतिस्पर्धा हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए. रूस भारत को गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की आपूर्ति लगातार जारी रखे हुए है. भविष्य में सहयोग और मजबूत होगा.''
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रूसी विदेश मंत्री ने तमिलनाडु में रूस की तकनीकी सहायता से बन रहे कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र को दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया. उन्होंने कहा, ''कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र हमारा प्रमुख प्रोजेक्ट है. यह भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है. इस परियोजना के तहत नई बिजली इकाइयों के निर्माण पर सहयोग जारी है.''
फरवरी 2016 से उसकी पहली बिजली इकाई अपनी निर्धारित क्षमता 1000 मेगावाट पर लगातार काम कर रही है. रूसी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस संयंत्र के 2027 तक पूरी क्षमता से काम शुरू करने की उम्मीद है. सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर तारीफ की है. उन्होंने मोदी को दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक बताया है.
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी में जबरदस्त ऊर्जा है और वह इसका इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने में करते हैं. चाहे अर्थव्यवस्था हो, सेना, रक्षा, संस्कृति या भारत की सभ्यतागत विरासत का संरक्षण. भारत अपनी संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.''
हिंदी-रूसी भाई-भाई सिर्फ नारा नहीं
भारत-रूस रिश्तों पर बात करते हुए लावरोव ने कहा कि हिंदी-रूसी भाई-भाई सिर्फ कोई राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. उन्होंने कहा, ''भारतीय सिनेमा, राज कपूर, और हाल के टीवी सीरियल और फिल्में रूस के हर कोने में बेहद लोकप्रिय हैं. हमारा रिश्ता चट्टान की तरह मजबूत है. वो किसी दबाव में टूट नहीं सकता.''
'हमारे रास्ते कभी अलग नहीं हो सकते'
उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, संयुक्त ऊर्जा उत्पादन, सैन्य सहयोग, परमाणु ऊर्जा, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों के साथ-साथ उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद बेहद मजबूत हैं. भारत-रूस संबंधों को लेकर लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा इतना गहरा है कि अलगाव की कल्पना भी नहीं की जा सकती. हमारा रिश्ता दोस्ती की नींव पर है.
'रिश्तों को कमजोर करने की कोशिश'
लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ ताकतें रूस-भारत रिश्तों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं और बंद ढांचे बनाकर अपने नियम थोपना चाहती हैं, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं. उन्होंने कहा, ''हम यह सब देख रहे हैं और हमारे भारतीय दोस्त भी इसे देख रहे हैं. यही बात हमारी दोस्ती को और ज्यादा कीमती बनाती है.''
BRICS और G20 पर होने वाली चर्चा
भारत यात्रा के दौरान सर्गेई लावरोव अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे. वह BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे. रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेता मौजूदा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे. खासतौर पर मध्य-पूर्व की स्थिति पर फोकस रहेगा. इसके साथ BRICS और G20 पर भी बात होगी.