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बांग्लादेश: कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के घोषणापत्र में भारत और हिंदू वोटर्स पर क्या लिखा है?

बांग्लादेश आम चुनाव के लिए कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने महिलाओं से लेकर हिंदू मतदाताओं से तमाम वादे किए हैं. भारत को लेकर जमात-ए-इस्लामी ने अपना स्टैंड बदला है और भारत सहित पड़ोसी देश के साथ बेहतर संबंध बनाने का वादा किया है.

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बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी ने तमाम बड़े वादे किए (Photo-ANI)
बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी ने तमाम बड़े वादे किए (Photo-ANI)

बांग्लादेश की कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने 2026 के आम चुनावों से पहले अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. जमात ने घोषणापत्र में पार्टी ने पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक संबंध बनाने का वादा किया है. साथ ही बांग्लादेश के अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने के लिए भी कई वादे किए हैं. खासकर हिंदु समुदाय को सरकार में प्रतिनिधित्व देने का भी वादा किया है. 

भारत से बेहतर संबंध बनाने का वादा

जमात-ए-इस्लामी ने पड़ोसी देश के साथ संबंध बेहतर बनाने का वादा किया है. जमात ने भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड जैसे पड़ोसी और निकटवर्ती देशों के साथ आपसी सम्मान और निष्पक्षता के आधार पर शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध स्थापित करने का वादा जाएंगे. जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना उसकी विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकता होगी. 

महिलाओं पर बदला जमात का स्टैंड
पार्टी के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान द्वारा महिलाओं को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के बाद, जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में यह वादा किया है कि यदि सरकार बनी तो योग्य और होनहार युवा महिलाओं को मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पद दिए जाएंगे. इससे पहले सोशल मीडिया पर डॉ. रहमान की एक पोस्ट सामने आई थी, जिसमें उन्होंने कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्यावृत्ति से की थी और इसे नैतिक रूप से गलत बताया था. हालांकि, जमात-ए-इस्लामी ने दावा किया कि उनका अकाउंट हैक हो गया था और इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई.

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हिंदु समुदाय के लिए किया बड़ा वादा
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और अत्याचार को रोकने में विफलता के आरोपों के बीच, और चूंकि कई क्षेत्रों में हिंदू मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, इसलिए इस मुस्लिम कट्टरपंथी राजनीतिक दल ने घोषणापत्र में धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने का वादा किया है. पार्टी का कहना है कि मंत्रिमंडल देश की विविधता को दर्शाएगा और इसमें धार्मिक व जातीय समुदायों तथा ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा.

जमात के घोषणा पक्ष में क्या-क्या वादे?
जमात-ए-इस्लामी ने 2026 चुनाव के लिए जारी अपने घोषणापत्र में शासन सुधार, आर्थिक पुनरुत्थान, सामाजिक न्याय और युवाओं के नेतृत्व वाले विकास के जरिए देश के पुनर्निर्माण का दावा किया है. भेदभाव-मुक्त, मजबूत और मानवीय बांग्लादेश” के रोडमैप के रूप में पेश किए गए इस घोषणापत्र में जुलाई क्रांति का उल्लेख किया गया है और ईमानदारी, एकता, दक्षता, रोजगार और न्याय पर जोर दिया गया है. घोषणापत्र के केंद्र में शासन व्यवस्था में बुनियादी सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली का वादा है.

पार्टी ने संसद को मजबूत करने, आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए चुनाव सुधार, और पुनर्गठित कार्यवाहक सरकार प्रणाली के तहत स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित करने की बात कही है. इसके अलावा स्थानीय सरकार संस्थाओं को सशक्त बनाकर सत्ता के विकेंद्रीकरण, तथा सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी वादा किया गया है.

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भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का वादा
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख घोषणापत्र की प्रमुख विशेषता है. जमात-ए-इस्लामी ने शून्य सहनशीलता नीति अपनाने, सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, जनप्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य संपत्ति घोषणा, त्वरित सुनवाई और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जब्ती का प्रस्ताव रखा है. कानून और न्याय सुधारों के तहत न्यायेतर हत्याओं, जबरन गुमशुदगी और राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों को समाप्त करने, अदालतों के आधुनिकीकरण और मानवाधिकार संरक्षण का वादा किया गया है.

 प्रवासी बांग्लादेशियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देते हुए प्रवासन लागत कम करने, कौशल प्रशिक्षण और विदेश में रह रहे नागरिकों को मतदान अधिकार देने का भी प्रस्ताव है. सामाजिक क्षेत्र में, जमात-ए-इस्लामी ने शिक्षा और स्वास्थ्य में व्यापक सुधारों का वादा किया है, जिसमें गरीब और कमजोर वर्गों के लिए चरणबद्ध तरीके से मुफ्त शिक्षा और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा शामिल है. इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और किफायती आवास पर भी विशेष जोर दिया गया है.

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