मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका की राजनीति में भी बड़ा भूचाल आ गया है. ट्रंप प्रशासन में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के खिलाफ अमेरिकी संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ बिना कांग्रेस की मंजूरी के युद्ध छेड़ा और ऐसे हमलों को अंजाम दिया, जिन्हें "वॉर क्राइम" की श्रेणी में रखा जा सकता है.
यह प्रस्ताव यासामिन अंसारी के नेतृत्व में हाउस डेमोक्रेट्स ने पेश किया है. उन्होंने दावा किया कि हेगसेथ ने अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया, अमेरिकी सैनिकों को खतरे में डाला और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन नहीं किया. सबसे गंभीर आरोप ईरान के मिनाब इलाके में एक गर्ल्स स्कूल पर हमले को लेकर है.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को हुए हमले में कमोबेश 170 स्कूली बच्चियों की मौत हुई, जिनमें शिक्षक भी शामिल थे. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गलती से इस स्कूल पर जा गिरी. डेमोक्रेट्स का कहना है कि इस तरह के हमले जंग के नियमों का उल्लंघन हैं.
महाभियोग के पहले आर्टिकल में आरोप लगाया गया कि पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. अमेरिकी कानून के अनुसार, युद्ध छेड़ने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास होता है, न कि किसी एक अधिकारी के पास.
इसके अलावा उन पर "डबल टैप" स्ट्राइक जैसे विवादित सैन्य तरीकों के इस्तेमाल का भी आरोप है, जिसमें एक ही लक्ष्य पर दो बार हमला किया जाता है. आलोचकों का कहना है कि इससे नागरिकों के हताहत होने का खतरा बढ़ जाता है.
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डेमोक्रेट्स ने यह भी आरोप लगाया कि हेगसेथ ने संवेदनशील सैन्य जानकारी को संभालने में लापरवाही बरती और यमन में हमलों से जुड़ी जानकारी एक कमर्शियल मैसेजिंग ऐप के जरिए साझा की, जिससे सुरक्षा जोखिम पैदा हुआ.
हालांकि, इस महाभियोग प्रस्ताव के पास होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, क्योंकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है. इसके बावजूद यह कदम राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है.
पेंटागन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे "राजनीतिक स्टंट" बताया है. उनका कहना है कि ईरान में सैन्य अभियान ने अपने उद्देश्यों को हासिल किया है और यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत जरूरी थी.