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मिशन लारिजानी: इजरायल ने कैसे 'टारगेट' को किया ट्रैक और फिर अटैक...

अली लारिजानी को ट्रैक करने के लिए इजरायल ने अपनी खुफिया क्षमता का पूरा उपयोग किया. 13 से 16 मार्च की रात तक ईरान में इजरायली एसेट्स पूरी तरह से एक्टिव थे. इसी दौरान उन्हें लारिजानी की लोकेशन मिली. ये जानकारी वापस इजरायल भेजी गई. क्योंकि आखिरी फैसला IDF चीफ को लेना था.

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अली लारिजानी 13 से 16 मार्च तक छिपते रहे. (File Photo: X/Ali Larijani)
अली लारिजानी 13 से 16 मार्च तक छिपते रहे. (File Photo: X/Ali Larijani)

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद अली लारिजानी इजरायल का नंबर-1 टारगेट बन गए थे. 28 फरवरी को खामेनेई की मौत के बाद अली लारिजानी बेहद चौकन्ने हो गए थे. उन्होंने अपनी गतिविधियां सीमित कर ली थी. वे अपना स्थान लगातार बदल रहे थे. लेकिन इजरायल भी अपनी पूरी खुफिया ताकत के साथ उन्हें तलाश कर रहा था. पिछले 15 दिनों से इजरायल और अली लारिजानी के बीच चालाकी और चालबाजियों की पूरी आजमाइश हो रही थी. 

लेकिन इजरायल ने आखिरकार अपने 'Special capabilities' के बल पर लारिजानी का शिकार कर ही लिया. जी हां, इजरायल के अखबार द येरुशलम पोस्ट ने कहा है कि अली लारिजानी को मारने में इजरायल के 'Special capabilities' का अहल रोल रहा है. इजरायल का ये  Special capabilities क्या है, इस पर दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां माथा खपा रही हैं. 

इजरायली मीडिया ने देश के रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा है कि अली लारिजानी को ढूंढ निकालने के लिए खुफिया और ऑपरेशन से जुड़े भारी संसाधन झोंक दिए गए थे. 

द येरुशलम पोस्ट ने लिखा है कि लारिजानी का पता लगाना आसान नहीं था. ईरान की सत्ता में वर्षों तक रहे लारिजानी को पता था कि कई चोर निगाहें उनपर 24X7 उनपर नजर रखी हुई हैं. वे बचने में माहिर थे और उन्होंने इजरायल द्वारा खोजे जाने की प्रक्रिया में देरी करने और उससे बचने के लिए कई एहतियाती कदम उठा रखे थे. 

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इजरायली सूत्रों के अनुसार वह पिछले दो हफ़्तों के दौरान वह लगातार अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर आते-जाते रहे. 

सूत्र यह भी बताते हैं कि इजरायल के निशाने से बचने के लिए लारिजानी ने जिस हद तक सावधानियां बरतीं, इससे यह भी जाहिर होता है कि ईरान का बचा हुआ शीर्ष नेतृत्व खुद को कितना ज़्यादा निशाने पर महसूस कर रहा है. 

हाल ही तेहरान की सड़कों से लारिजानी ने अमेरिका को ललकारा था

हालांकि 13 मार्च को लारिजानी तेहरान की सड़कों पर कुद्स रैली पर दिखे थे. यह रमजान के आखिरी जुमे को होने वाली रैली होती है, जिसमें बड़े नेता आमतौर पर इजरायल-विरोधी बयान देते हैं. यहां वे ईरानी राष्ट्रपति और ईरानी विदेश मंत्री के साथ मौजूद थे.  इजरायल अमेरिका पर गरजते हुए लारिजानी ने कहा था कि अगर अमेरिका इजरायल ने ईरान या उसके हितों पर हमला जारी रखा, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी.

इसके बाद लारिजानी फिर से अंडर ग्राउंड हो गए. इजरायल ने लारिजानी पर ऑपरेशन 16-17 मार्च की रात को हुआ. 

इस लिहाज से 13 से 16-17 मार्च की दरम्यानी रात के घंटे अहम हो जाते हैं. 

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि  67 वर्षीय लारिजानी की तेहरान के बाहरी इलाके के पूर्वी छोर पर अपनी बेटी से मिलने के दौरान अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले में मौत हो गई. तेहरान में जहां लारिजानी मारे गए हैं उस जगह को पर्दिस के नाम से जाना जाता है.

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यानी कि इजरायल ने 13 से 16 मार्च के बीच लारिजानी की मूवमेंट की फूल रेकी की और मौका मिलते ही मिशन को अंजाम दिया.

1600 किलोमीटर तक उड़े जेट 

 'द जेरूशलम पोस्ट' ने कहा कि  "विशेष क्षमताओं" की मदद से लारिजानी पर नजर रखी गई. इसके साथ ही IDF के चीफ़ ऑफ स्टाफ़ लेफ्टिनेंट-जनरल एयाल जमीर और राजनीतिक नेतृत्व के त्वरित फैसले ने इस ऑपरेशन को संभव बनाया. 

रक्षा सूत्रों ने बताया कि ईरान से मिली खुफिया जानकारी को पहले टॉप डिसीजन मेकिंग बॉडी तक पहुंचाया गया. इसके बाद वायु सेना के फाइटर जेट्स को 1600 किलोमीटर दूर एक नए और महत्वपूर्ण मिशन पर भेजने का आदेश दिया गया. इस पर बेहद समन्वित तरीके से कार्रवाई हुई और मिशन सफल हुआ.

एक बार फिर उसी रात को लारिजानी और बासिज के शीर्ष अधिकारियों को अलग-अलग जगहों पर बिना किसी चूक के इजरायल ने मार गिराया. 

यह सब सुदूर ईरान में हुआ, जो गाजा या लेबनान के कई स्थानों पर अचानक हमले करने की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है; क्योंकि गाज़ा और लेबनान तो विमान से मात्र कुछ ही मिनटों की दूरी पर स्थित हैं, लेकिन इजरायल और ईरान की दूरी लगभग 2000 किलोमीटर है. 

'Special capabilities' का मतलब क्या

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आइए समझते हैं कि अगर ईरान कहता है कि उसने लारिजानी को पकड़ने के लिए  'Special capabilities' का इस्तेमाल किया तो इसका मतलब क्या होता है?

"स्पेशल कैपेबिलिटीज" इजरायल की वो जासूसी क्षमताएं है जो ईरान में चारों ओर बिखरी हैं. इनमें मनुष्य, मशीन और सर्विलांस का मिक्स शामिल है. इन सभी स्रोतों से मिली सूचनाएं का विश्लेषण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है. आइए इसे एक एक कर समझते हैं. 

ह्यूमन इंटेलिजेंस: लंबे समय से मोसाद के मुखबिर, ईरान के सिक्योरिटी सिस्टम के अंदर भर्ती किए गए जासूस, या सरकार के लोगों के करीबी एजेंट जो मूवमेंट या लोकेशन के बारे में रियल-टाइम टिप्स दे सकते थे. 

सिग्नल्स इंटेलिजेंस और साइबर टूल्स: एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट करना, डिवाइस की जियोलोकेशन पता करना, ईरानी नेटवर्क की हैकिंग करना और जानकारी प्राप्त करना. या फिर ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर में घुसपैठ करना जो कमजोर हैं. आपको जानकारी हैरानी होगी कि ईरान अली खामेनेई की  ट्रैकिंग के लिए ट्रैफिक कैमरा और टेलीकॉम सिस्टम को एक्सेस कर रही थी.

सर्विलांस टेक्नोलॉजी: इसमें ड्रोन ओवरवॉच, AI एनालिसिस वाली सैटेलाइट इमेजरी, चुपके से लगाए गए ट्रैकिंग डिवाइस, बग्स के जरिए जासूसी की जाती है. 

रियल-टाइम इंटेल: तुरंत हमले की मंजूरी के लिए तेजी से प्रोसेसिंग और फैसला लेने वालों तक पहुंचाना. 

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हालांकि इजरायल ने "स्पेशल कैपेबिलिटीज" शब्द को जानबूझकर अस्पष्ट रखा है. ताकि इससे जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सके. यह इस बात को दर्शाता है कि इजरायल अपने संवेदनशील अभियानों की जानकारी बहुत कम देता है ताकि दुश्मनों को उसकी कमजोरियों के बारे में पता न चले. 

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