यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद, जिसे इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है, एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है. फिलिस्तीनी निगरानी संगठन अल-कुद्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन ने आरोप लगाया है कि इजरायल ने मस्जिद परिसर के भीतर मौजूद चार महत्वपूर्ण इमारतों को खाली करा दिया है. ये सभी इमारतें जॉर्डन समर्थित इस्लामिक वक्फ के प्रशासनिक और धार्मिक कामों के लिए इस्तेमाल की जाती थीं.
संगठन का कहना है कि इजरायली अधिकारियों ने "सुरक्षा खतरे" का हवाला देकर इन इमारतों को निशाना बनाया. आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में इजरायली बलों ने इन परिसरों पर छापे मारे, उनके ताले तोड़ दिए और नए ताले लगाने की इजाजत भी नहीं दी. इसके बाद इन इमारतों को खुला छोड़ दिया गया और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने से रोक दिया गया.
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खाली कराए गए चार परिसरों में इमाम अल-गजाली गुम्बद, दार अल-हदीस अल-शरीफ, कुब्बत सुलेमान और कुब्बत मूसा शामिल हैं. खास बात यह है कि ये चारों इमारतें अल-अक्सा परिसर के चार अलग-अलग कोनों में स्थित हैं. इसी वजह से फिलिस्तीनी संगठन इसे कोई संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित कदम मान रहे हैं.
मस्जिद कंपाउंड को क्यों खाली करा रहा इजरायल?
अल-कुद्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन का दावा है कि इन परिसरों को खाली कराने का मकसद भविष्य में इजरायली पुलिस और प्रशासन के लिए वहां स्थायी नियंत्रण स्थापित करने का रास्ता तैयार करना हो सकता है. संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे इस्लामिक वक्फ की प्रशासनिक भूमिका धीरे-धीरे खत्म हो सकती है और इजरायल असल में अपना एक एडमिस्ट्रेटिव बॉडी स्थापित कर सकता है.
करीब 1.44 लाख वर्ग मीटर में फैला अल-अक्सा परिसर पूर्वी यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है. यहां मस्जिदों, मदरसों, प्रार्थना स्थलों, गुंबदों और ऐतिहासिक संरचनाओं का विशाल समूह मौजूद है. दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय "स्टेटस क्वो" समझौते के तहत इस परिसर का प्रशासन और रखरखाव मुस्लिम संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है.
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अल-अक्सा के रखरखाव की जिम्मेदारी जॉर्डन के हाथ में
1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से इस जिम्मेदारी को जॉर्डन द्वारा नियुक्त यरुशलम इस्लामिक वक्फ निभाता रहा है. हालांकि हाल के वर्षों में वक्फ अधिकारियों ने कई बार आरोप लगाया है कि इजरायली प्रतिबंधों की वजह से कर्मचारियों के लिए परिसर में प्रवेश करना और नियमित मरम्मत के काम करना मुश्किल होता जा रहा है.
मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीनी संगठन का कहना है कि हालिया कदमों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. उसने जॉर्डन से केवल बयान जारी करने के बजाय अल-अक्सा की सुरक्षा के लिए ठोस रणनीति अपनाने की मांग की है. साथ ही अरब और मुस्लिम देशों से भी अपील की गई है कि वे इस मुद्दे को अल-अक्सा के भविष्य से जुड़े गंभीर खतरे के रूप में देखें.