वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट अजयपाल सिंह बंगा बुधवार तक चार दिनों के पाकिस्तान दौरे पर थे. कर्ज के भरोसे चल रहे पाकिस्तान ने भारतीय मूल के बंगा के लिए रेड कार्पेट बिछाए और उनके स्वागत में खूब गाना-बजाना किया. पाकिस्तान ने ये सब इसलिए किया ताकि भविष्य में उसे कर्ज मिलता रहे और सिंधु जल समझौते में भी उसके हितों की अनदेखी न हो.
बंगा चार दिनों के अपने पाकिस्तान दौरे में पंजाब प्रांत के खुशब शहर स्थित 'गली सिखान वाली' में अपने पैतृक घर भी पहुंचे.
पाकिस्तान दौरे में अपनी पैतृक जड़ों को याद करते हुए बंगा ने कहा, 'मैं जन्मा तो पुणे में था...विभाजन हर आदमी के लिए मुश्किल था...चाहे वो पाकिस्तान से भारत गए हों या भारत से पाकिस्तान आए हों, जिसने भी अपना घर छोड़ा, उसके लिए एक बड़ा ट्रॉमा था. हमारे घरों में इसे लेकर ज्यादा बात होती नहीं थी. मेरी मां ने गुजरने के दो-तीन साल पहले मुझे बताना शुरू किया कि खुशब गांव था, वहां हम लोग रहते थे, हमारी जमीन थी, मेरे पिताजी ये करते थे, वो कहते थे...'
उन्होंने बताया कि वो पहले भी पाकिस्तान आए हैं लेकिन कराची से ही लौट जाते थे, कभी अपने पैतृक गांव नहीं गए. अजय बंगा का कहना है कि उन्हें अपने गांव में बहुत प्यार मिला और लोगों के प्यार से वो बहुत खुश हैं. बंगा के मुताबिक, वो उस गुरुद्वारे में भी गए जिसे उनके नाना ने बनवाया था.
विभाजन से पहले पाकिस्तान में रहता था बंगा का परिवार
भारत के विभाजन से पहले बंगा का परिवार आज के पंजाब प्रांत के खुशब शहर में रहता था. बंगा के पिता का नाम हरभजन सिंह था जिनका जन्म और पालन-पोषण पाकिस्तान के खुशब शहर में हुआ था जिसे सैनिकों का शहर भी कहा जाता है.
यह शहर पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस और मियांवली के बीच झेलम के किनारे बसा हुआ है.
पाकिस्तान में किसानों की दी जानेवाली सब्सिडी पर भी बोले अजय बंगा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले बेलआउट पैकेज पर चल रहे पाकिस्तान ने अपने किसानों को सब्सिडी दे रखी है. पाकिस्तान पहुंचे वर्ल्ड बैंक के प्रमुख ने इस सब्सिडी का विरोध किया.
सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह के साथ मीडिया से बात करते हुए बंगा ने कहा, 'सब्सिडी से ज्यादा प्यार नहीं है मुझे. किसानों को हमें सशक्त बनाने की जरूरत है ताकि सरकारी सब्सिडी के सिस्टम से वो निकलें और अपने पैरों पर खड़े हों. सब्सिडी कभी-कभी काम करती है और कभी-कभी वो दूसरे हाथों में पड़ जाती है. ये सब जानते हैं. छोटे किसानों को समर्थन मिलना चाहिए, उनके लिए सहकारी संस्थाएं हों, किसान संघ हों.'
उन्होंने कहा कि जरूरत है, किसानों को नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताया जाए, उन्हें एआई का इस्तेमाल सिखाया जाए.
उन्होंने आगे कहा, 'पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक भैंसों की आबादी वाले देशों में शामिल है. पाकिस्तान दुनिया के तीन सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में आ चुका है. फिर पाकिस्तान का पनीर विदेशों में क्यों नहीं बिकता? ये आपके लिए मौका है.'