एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अगर आयतुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना बेहद खतरनाक कदम है. उनके मुताबिक खामेनेई न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता हैं बल्कि पूरी इस्लामी दुनिया में, खासकर शिया समुदाय के बीच, बेहद ही सम्मानित धार्मिक प्राधिकारी हैं. शिया समुदाय के लिए उनका शब्द अंतिम माना जाता है.
ओवैसी ने कहा कि ऐसे नेता को निशाना बनाया जाता है तो यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि ईरान चुप रहेगा. उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिनेवा में बातचीत चल रही थी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परमाणु स्टॉकपाइल पर भी प्रगति हो रही थी, तो ऐसे समय में हमला करना और एक बुजुर्ग धार्मिक नेता को निशाना बनाना अमानवीय और अनैतिक है.
उन्होंने दावा किया कि इस हमले में 150 से अधिक स्कूली बच्चों की मौत हुई है और पूछा कि तथाकथित पश्चिमी मानवता अब कहां है.
“युद्ध फैला तो भारत पर भी असर”
ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध नहीं रुका तो पूरे क्षेत्र में फैल सकता है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जो भारत को विदेशी मुद्रा भेजते हैं. अगर युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा क्योंकि भारत 80 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है. उन्होंने कहा कि तेल की कीमत में एक डॉलर की वृद्धि भी भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका हो सकती है.
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उन्होंने यह भी बताया कि मक्का, मदीना, दुबई, सऊदी अरब और ओमान के एयरपोर्ट्स पर हजारों भारतीय फंसे हुए हैं क्योंकि उड़ानें बंद हैं. ओमान में एक भारतीय प्रवासी के घायल होने की खबर भी सामने आई है.
“भारत सरकार को भूमिका निभानी चाहिए”
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि भारत को इस युद्ध को रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर यह संघर्ष बढ़ा तो क्षेत्र में भारी अस्थिरता और उथल-पुथल होगी.
उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि इराक में कथित ‘वेपन्स ऑफ मास डिस्ट्रक्शन’, लीबिया और सीरिया के गृहयुद्ध और सूडान की स्थिति दुनिया के सामने है.
“ईरान झुकेगा नहीं”
ओवैसी ने कहा कि ईरान एक बड़ा देश है और 30-35 सालों से प्रतिबंधों के बावजूद खड़ा है. उन्होंने कहा कि यह उम्मीद करना गलत है कि ईरान दबाव में आकर झुक जाएगा.