पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनते ही जमीन पर बड़े बदलाव दिखने शुरू हो गए हैं. चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने एक वादा किया था. उन्होंने कहा था कि बंगाल को 'भाईपो टैक्स' से मुक्ति दिलाएंगे. अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार इस वादे को निभा रही है. हाईवे पर अवैध वसूली के अड्डों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हो गई है. आखिर यह 'भाईपो टैक्स' क्या बला है? इस पर इतना बड़ा एक्शन क्यों हो रहा है? आइए इसे समझते हैं.
सबसे पहले यह जान लेते हैं कि इसे 'भाईपो टैक्स' क्यों कहा जाता है. बांग्ला भाषा में 'भाईपो' का मतलब 'भतीजा' होता है. बीजेपी और अन्य विरोधी दल इस शब्द का इस्तेमाल पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए करते रहे हैं. वे टीएमसी के सांसद हैं. चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि 'पिसी-भाईपो' (बुआ-भतीजा) की जोड़ी बंगाल में वसूली सिंडिकेट चलाती है. बीजेपी का आरोप था कि अभिषेक बनर्जी बंगाल में सिंगल विंडो बन चुके थे. उनकी मर्जी के बिना राज्य में कोई काम आगे नहीं बढ़ता था. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी एक बात कही थी. उन्होंने दावा किया था कि ट्रक ड्राइवरों को सिलीगुड़ी में 'अभिषेक टैक्स' देना पड़ता है. इसी वजह से सामान महंगा हो जाता है.
सत्ता संभालते ही शुभेंदु सरकार ने इस वसूली तंत्र पर करारा प्रहार किया है. मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि हाईवे पर जितने भी अवैध वसूली वाले नाके हैं, उन्हें तुरंत हटा दिया जाए. वे दोबारा कभी शुरू नहीं होने चाहिए. इस कड़े एक्शन के साथ ही सरकार ने कानूनी शिकंजा भी कस दिया है. अवैध निर्माण को लेकर अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को नोटिस भेजा गया है. इसके अलावा कोलकाता में उनकी कथित 43 संपत्तियों की एक लिस्ट भी जारी की गई है.
बांस के बैरिकेड, लाठी वाले गुंडे और ट्रक ड्राइवरों का वो खौफनाक मंजर
अब समझते हैं कि यह अवैध वसूली का धंधा सड़कों पर कैसे चलता था. दरअसल, बंगाल से हर दिन लगभग 50 हजार ट्रक गुजरते हैं. क्योंकि यह पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश को जोड़ने वाला मुख्य जरिया है. झारखंड-असम-बंगाल रूट पर जगह-जगह बांस के बैरिकेड लगाकर अवैध चेकिंग पॉइंट बनाए गए थे. इन नाकों पर लाठी-डंडे लिए सिंडिकेट के गुंडे खड़े रहते थे. पैसे न देने पर ड्राइवरों को धमकाया जाता था, ट्रकों के शीशे तोड़ दिए जाते थे और टायर पंक्चर कर दिए जाते थे. पुरुलिया और पश्चिम बर्धमान जैसे जिलों में यह आतंक सबसे ज्यादा था. रमेश नाम के एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि हर कुछ किलोमीटर पर रास्ता रोका जाता था और रसीद मांगने पर वे हमलावर हो जाते थे.
लेकिन बुधवार को हुए कड़े एक्शन के बाद नेशनल हाईवे-2 (NH-2) और आसपास के रास्तों से ये सारे बांस के बैरिकेड और अवैध नाके अचानक गायब हो गए हैं. ऐसा लगता है जैसे सिंडिकेट के गुंडे कोई जादुई खेल दिखाकर गायब हो गए हों. 'फेडरेशन ऑफ ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन' के महासचिव सजल घोष ने बताया कि बंगाल में दो तरह की अवैध वसूली आम थी. अब 'भाईपो टैक्स' तो पूरी तरह खत्म हो गया है और वे 'डंडा टैक्स' को भी पूरी तरह बंद करने की मांग कर रहे हैं.
वैसे, सिर्फ सड़कों की सफाई ही नहीं, शुभेंदु सरकार ने आते ही टीएमसी शासन के कई फैसलों को पलट दिया है. इसमें सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर की जमीन तेजी से ट्रांसफर करना, धर्म के आधार पर चल रही योजनाओं को बंद करना और राज्य की पिछड़ा वर्ग लिस्ट को रद्द करना शामिल है.