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TMC में फूट के बीच ममता का बड़ा एक्शन, सभी कमेटियां, फ्रंटल आर्गनाइजेशन भंग

TMC ने कहा है कि पार्टी अपने संगठन को सुदृढ़ बनाने और उसे नए उत्साह तथा उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 

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TMC को पार्टी के अंदर बगावत का सामना करना पड़ा रहा है. (File Photo: ITG)
TMC को पार्टी के अंदर बगावत का सामना करना पड़ा रहा है. (File Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने बड़ा एक्शन लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों, पार्टी से जुड़े संगठनों को तत्काल प्रभाव से विलय कर दिया है. टीएमसी ने कहा है कि सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का पुनर्गठन किया जाएगा. 

टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि गहन विचार-विमर्श के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी अनुषांगिक संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएंगे.

TMC ने कहा कि पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कार्य-निष्पादन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की एक व्यापक प्रक्रिया चलाएगी. इस प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मुख्य संगठन और सभी अनुषांगिक संगठनों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी.

पार्टी अपने संगठन को सुदृढ़ बनाने और उसे नए उत्साह तथा उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 

बता दें कि बंगाल विधानसभा में हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को TMC में फूट का सामना करना पड़ रहा है. कुछ आनुषांगिक संगठन आलाकमान के फैसले से इतर दूसरे गुट के फैसलों के साथ सहमति जता रहे हैं. 

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TMC के 16 फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन हैं.

टीएमसी की फ्रंटल संगठन की संख्या लगभग 16 है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये संगठन पार्टी के विभिन्न वर्गों जैसे युवा, महिला, छात्र, मजदूर आदि को संगठित करते हैं. 

कमेटियों की बात करें तो इसमें TMC की मुख्य कार्यकारी कमेटी है. इसके अलावा कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटी और अनुशासन समिति है. अब इन सभी का विलय कर दिया गया है और कमेटियों का गठन किया जाएगा. 

हालांकि पार्टी ने इस फैसले के पीछे के कारणों के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया.

राजनीतिक जानकारों ने इस कदम को नेतृत्व की ओर से संगठन पर फिर से नियंत्रण पाने और मौजूदा संकट के बीच पार्टी के ढांचे में बदलाव का रास्ता साफ करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. 

यह घटनाक्रम TMC के गठन के बाद से पार्टी द्वारा लिए गए सबसे बड़े संगठनात्मक फ़ैसलों में से एक है, और यह ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी हाल के वर्षों में अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है. 
 

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