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'अरे वो पुष्पा कहीं दिखाई नहीं दे रहा?', जहांगीर के फलता से नाम वापसी पर CM शुभेंदु का तंज

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान से पहले सियासी माहौल गरमा गया है. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने नामांकन वापस लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. फलता सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा और नतीजे 24 मई को आएंगे.

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी. (Photo: X/@BJP4WestBengal)
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी. (Photo: X/@BJP4WestBengal)

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार को पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले अपना नामांकन वापस ले लिया. जहांगीर खान ने कहा कि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता के विकास के लिए विशेष पैकेज देने का वादा किया है.

वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि वह इसलिए 'भाग गए क्योंकि उन्हें एक पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहा था.' मुख्यमंत्री ने जहांगीर खान के 'पुष्पा' वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा, 'पुष्पा कहता था झुकेगा नहीं. अब वही पुष्पा कहीं नजर नहीं आ रहा है.' शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को सतर्क करते हुए कहा कि यह टीएमसी की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

उन्होंने कहा, 'टीएमसी के लोग चाहते हैं कि फलता की जनता यह मान ले कि बीजेपी पहले ही जीत चुकी है और वोट डालने न जाए. लेकिन फलता के लोगों को याद रखना चाहिए कि 10 साल बाद उन्हें खुलकर मतदान करने का मौका मिला है. मैं फलता में 100 प्रतिशत मतदान की अपील करता हूं.' इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि फलता सीट पर उसके 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चुनाव आयोग आंखें मूंदे बैठा है.

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नाम वापस लेना जहांगीर का व्यक्तिगत फैसला: TMC

ममता बनर्जी की पार्टी ने कहा कि जहांगीर खान का नामांकन वापस लेना उनका व्यक्तिगत फैसला है, पार्टी का नहीं. टीएमसी ने आरोप लगाया कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद से फलता में उसके कई पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई, उन्हें जबरन बंद कराया गया और कब्जा किया गया. पार्टी ने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद चुनाव आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. टीएमसी ने यह भी कहा कि भारी दबाव और डराने-धमकाने के बावजूद उसके कार्यकर्ता डटे हुए हैं, हालांकि कुछ लोग (जहांगीर खान) दबाव में आकर पीछे हट गए.

फलता सीट पर 21 मई को री-पोलिंग, 24 मई को नतीजे

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब चुनाव आयोग ने फलता सीट के सभी 285 पोलिंग बूथों पर हुए मतदान को रद्द कर दिया था. आयोग ने कहा था कि 29 अप्रैल को हुए मतदान में गंभीर चुनावी गड़बड़ियां और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली घटनाएं सामने आई थीं. चुनाव पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में ईवीएम से छेड़छाड़, मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदान नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया गया था. 

कुछ बूथों में बैलेट यूनिट के बटन पर काली टेप लगाए जाने के आरोप लगे, जिससे मतदाता सही तरीके से वोट नहीं डाल सके. इसके अलावा कई जगहों पर अनधिकृत लोगों के मतदान केंद्रों में घुसकर दूसरों की ओर से वोट डालने की शिकायत भी सामने आई. कई बूथों की वीडियो रिकॉर्डिंग गायब या अधूरी पाई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे. अब फलता सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा और 24 मई को मतगणना की जाएगी.

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इससे पहले डायमंड हार्बर में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर खान पर सीधा हमला बोला था. जहांगीर ने खुद की तुलना फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ के किरदार से की थी. इस पर अधिकारी ने कहा था, 'वह डकैत पुष्पा अब कहां है? कहीं दिखाई नहीं दे रहा. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 2021 में 19 लोगों को कुख्यात अपराधी बताया था, जिनमें जहांगीर भी शामिल था. उसे मेरे ऊपर छोड़ दीजिए, इस पुष्पा को मैं देख लूंगा.'

रैली से पहले पुलिस ने जहांगीर के करीबी सहयोगी और फलता के टीएमसी उपाध्यक्ष सैदुल खान को कई आरोपों में गिरफ्तार किया था. सैदुल पर जान से मारने की धमकी देने समेत कई गंभीर आरोप लगे हैं. बता दें कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर टीएमसी के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया. वहीं टीएमसी को सिर्फ 80 सीटों पर जीत मिली.

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