तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हिंदू धर्म के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में सिलीगुड़ी पुलिस ने उनके खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है. यह कार्रवाई एक स्थानीय महिला वकील की शिकायत के बाद की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी के बयानों से देश-विदेश में रह रहे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है.
शिकायतकर्ता वकील रिंकी चटर्जी के अनुसार, यह पूरा विवाद साल 2025 में कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित एक ईद मिलन समारोह के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा है. आरोप है कि इस धार्मिक मंच से भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा के हिंदुत्व की तुलना करते हुए परोक्ष रूप से सनातन धर्म को टारगेट किया, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है.
इन गंभीर धाराओं में केस दर्ज
सिलीगुड़ी पुलिस ने वकील चटर्जी की तहरीर पर ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है. प्राथमिकी (FIR) में मुख्य रूप से धारा 351 (1) यानी आपराधिक धमकी देना, धारा 352 यानी शांति भंग करने और उकसाने के उद्देश्य से जानबूझकर किया गया अपमान, धारा 353 यानी विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच नफरत, शत्रुता या वैमनस्य की भावना को बढ़ावा देना शामिल है.
चुनावों के दौरान हिंदुओं को धमकाने का भी आरोप
दर्ज शिकायत में केवल साल 2025 का ही नहीं, बल्कि हालिया विधानसभा चुनाव का भी संदर्भ दिया गया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से डराने और धमकाने का काम किया था. शिकायतकर्ता के मुताबिक, ऐसे बयानों का उद्देश्य मतदाताओं के मन में भय पैदा कर चुनावी लाभ उठाना और सामाजिक व सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना था.
इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर से भी सुर बदलते दिखाई दे रहे हैं. टीएमसी की दार्जिलिंग जिला इकाई के महासचिव और वकील अत्रि शर्मा ने पार्टी प्रवक्ता के तौर पर तो कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी के बयान से पल्ला झाड़ लिया.
अत्रि शर्मा ने साफ शब्दों में कहा, 'जब पार्टी सत्ता में थी, तब भी संगठन के भीतर कई लोग इन बयानों के खिलाफ थे. राज्य की सत्ता की बागडोर संभालते हुए इस तरह की टिप्पणी करना पूरी तरह से अनुचित था. हममें से जो लोग आज भी पार्टी के प्रति वफादार हैं, वे भी इस बयान का समर्थन नहीं करते. कानूनन शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार हर नागरिक के पास है.'