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बंगाल में लागू हुई ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति, मालदा में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में 9 घुसपैठिए रखे गए

पश्चिम बंगाल में कथित अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति के तहत मालदा में पहला होल्डिंग सेंटर शुरू किया गया है, जहां फिलहाल नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. कड़ी सुरक्षा वाले इस सेंटर में उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जा रही है. सरकार ने इसे अवैध घुसपैठ रोकने की बड़ी कार्रवाई बताया है. वहीं भाजपा ने कदम का स्वागत किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

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घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बंगाल में डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति शुरू हुई है. File Photo ITG
घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बंगाल में डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति शुरू हुई है. File Photo ITG

पश्चिम बंगाल में कथित अवैध घुसपैठियों के खिलाफ राज्य सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है. मालदा जिला इस अभियान के तहत पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर शुरू किया गया है. फिलहाल यहां नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह होल्डिंग सेंटर मालदा के इंग्लिश बाजार इलाके के चंदन पार्क में बनाया गया है. रविवार को गाजोल के पांडुआ क्षेत्र से तीन महिलाओं और छह नाबालिगों समेत कुल नौ लोगों को यहां लाया गया, जिसके बाद केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया.

कड़ी सुरक्षा में रखा गया सेंटर
होल्डिंग सेंटर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. यहां सीसीटीवी निगरानी, 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती, सिविल डिफेंस स्टाफ और सिविक वॉलंटियर्स की व्यवस्था की गई है. साथ ही भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सेंटर उन विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया है, जिन्हें अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने या वैध दस्तावेज न होने के आरोप में पकड़ा जाता है. फिलहाल इन लोगों की नागरिकता और दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

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सरकार की नीति का हिस्सा
यह कदम राज्य गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें सभी जिलों को ‘पकड़े गए विदेशियों’ और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने को कहा गया था.

राज्य सरकार का यह अभियान भाजपा के लंबे समय से उठाए जा रहे घुसपैठ के मुद्दे को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा और राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर बीएसएफ को सौंपेगी.

बीएसएफ करेगी डिपोर्टेशन प्रक्रिया
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बीएसएफ, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स के साथ मिलकर कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध विदेशी नागरिकों को अधिकतम 30 दिनों तक ऐसे सेंटर में रखा जा सकता है, जहां उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच होगी.

नई इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार भी दिया गया है. साथ ही बायोमेट्रिक डेटा संग्रह, रिकॉर्ड अपलोड और केंद्रीय डेटाबेस से सत्यापन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी.

हालांकि केंद्र सरकार ने एक अलग आदेश में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों को राहत दी है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए हों.

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राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
उत्तर मालदा से भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग भारतीय नागरिक नहीं हैं और CAA के दायरे में नहीं आते, उन्हें अपने देश वापस जाना चाहिए.

वहीं तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने कहा कि यदि सरकार ठोस खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर रही है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है. अब यह मुद्दा केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रहकर प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी ढांचे के रूप में भी सामने आने लगा है.

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