scorecardresearch
 

मेरठ में SSP ने प्रदर्शनकारियों पर क्यों बरसाए थप्पड़? बताई बवाल की पूरी कहानी; रवि गौतम समेत 8 आरोपी भेजे गए जेल

मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन में बंद प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने के वीडियो पर मचे बवाल के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने अपनी सफाई दी है. उन्होंने पूरे घटनाक्रम को शहर में अराजकता फैलाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है.

Advertisement
X
मेरठ बवाल पर एसएसपी का एक्शन (Photo- Screengrab)
मेरठ बवाल पर एसएसपी का एक्शन (Photo- Screengrab)

Uttar Pradesh News: मेरठ के SSP अविनाश पांडेय ने कलेक्ट्रेट पर बीए की छात्रा ललिता गौतम की हत्या के विरोध में हुए उग्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर सफाई पेश की है.  पुलिस ने यह कदम तब उठाया जब विभिन्न दलों के प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर सड़क जाम कर दी थी. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस बल ने लाठीचार्ज किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया.  इसी दौरान बंदी वाहन में एक वकील द्वारा आत्महत्या के प्रयास की सूचना पर एसएसपी मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्थिति पर नियंत्रण पाया और बाद में इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की बड़ी साजिश का खुलासा किया. 

वैन में थप्पड़ मारने पर एसएसपी का बयान

वीडियो वायरल होने के बाद 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडेय ने बताया कि हिरासत में लिए गए नोएडा के वकील रवि गौतम ने पुलिस वैन के अंदर फंदा लगाकर खुदकुशी करने की कोशिश की थी. यह पता चलते ही वह तुरंत वहां पहुंचे और उसे रोकने के लिए बल प्रयोग किया. उन्होंने तल्ख तेवर में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क किसी के पिताजी की नहीं है और विरोध का यह तरीका बिल्कुल गलत है.

प्रदर्शन के पीछे साजिश 

एसएसपी ने खुलासा किया कि इस हंगामे के पीछे न्याय की मांग नहीं, बल्कि माहौल बिगाड़ने की साजिश थी. उन्होंने बताया कि भारतीय किसान यूनियन (अंबेडकर गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी ने यह ताना-बाना बुना था, जिस पर पहले से नौ मुकदमे दर्ज हैं. इस साजिश में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रवि गौतम ने पीड़ित परिवार को शस्त्र लाइसेंस का प्रलोभन देकर उकसाया और धरने में शामिल कई ग्रामीणों को तो प्रदर्शन की वजह तक नहीं पता थी.

Advertisement

अधिकारियों के मुताबिक, जब क्षेत्र की पुलिस पीड़ित परिवार के घर गई थीं, तो परिजन पुलिसिया कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट थे. लेकिन बाद उन्हें उकसा दिया गया. ऐसे में अब पुलिस उन असामाजिक तत्वों और साजिशकर्ताओं की पड़ताल में जुटी है, जो मेरठ जिले की शांति व्यवस्था को भंग करने के पीछे एक्टिव थे.

फिलहाल, इस मामले में आठ लोगों को सिविल लाइन पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. वहीं, 25 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. वीडियो फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है. एसएसपी का कहना है कि माहौल खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं, सोशल मीडिया पर इस मामले को तूल देने के मामले में साइबर एक्सपर्ट निगरानी कर रहे हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement