प्रवर्तन निदेशालय (ED) लखनऊ ने 11 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर और आजमगढ़ में मौलाना शम्सुल हुदा खान के ठिकानों पर छापेमारी की. शम्सुल हुदा ने साल 2013 में भारतीय नागरिकता त्याग कर ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, लेकिन इसके बावजूद उसने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मतदान किया.
वह विशेष रूप से वोट डालने के लिए यूके से भारत आया था. जांच में सामने आया कि नागरिकता छिपाकर उसने 2017 तक सरकारी वेतन और 2023 तक पेंशन का लाभ उठाया. यूपी पुलिस की जालसाजी और धोखाधड़ी की एफआईआर के आधार पर ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है.
एनजीओ के जरिए करोड़ों का काला खेल
ईडी के अनुसार, खान ने अपनी विदेशी नागरिकता छिपाकर एनजीओ और व्यक्तिगत खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया. 2013 से 2017 के बीच उसके और उसकी संस्थाओं के खातों में 5.28 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए. इसमें से 3.83 करोड़ रुपये सीधे उसके व्यक्तिगत खातों में आए. वहीं, रजा फाउंडेशन और कुल्लियातुल बनातिर रजविया जैसी संस्थाओं के नाम पर भी करोड़ों रुपये का फंड रूट किया गया. इन पैसों का इस्तेमाल मदरसों के निर्माण और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया.
विदेश यात्राएं और 33 करोड़ का साम्राज्य
जांच एजेंसियों ने पाया कि शम्सुल हुदा खान ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और कई अन्य इस्लामिक देशों की यात्राएं कीं. अब इस बात की जांच की जा रही है कि क्या दान के नाम पर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया. छापेमारी के दौरान 17 अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं. हालांकि कागजों पर इनकी खरीद कीमत करीब 3 करोड़ रुपये दिखाई गई है, लेकिन बाजार में इनकी वर्तमान कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी गई है. कुल मिलाकर खान ने करीब 33 करोड़ रुपये की संपत्तियां जुटाई हैं.
बैंक खातों और दस्तावेजों की गहरी जांच
ईडी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी और एसबीआई सहित कई बैंकों के खातों की जांच की है. 2007 से 2025 के बीच हुए वित्तीय ट्रांजैक्शन से पता चलता है कि नागरिकता खत्म होने के बाद भी सरकारी खजाने से पैसा लिया गया. आरोपी ने मदरसा शिक्षक के रूप में 1984 से 2013 तक काम किया था. जब्त किए गए दस्तावेजों की फिलहाल गहनता से जांच की जा रही है ताकि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) के पूर्ण विस्तार का पता लगाया जा सके.