tariq rehman Bangladesh General Election 2026: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान समाप्त होने के बाद गुरुवार को मतगणना शुरू हो गई. यह चुनाव देश में नई सरकार के गठन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद अंतरिम प्रशासन ने सत्ता संभाली थी.
इस बार चुनाव के साथ 84 सूत्रीय सुधार पैकेज ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर जनमत संग्रह भी कराया गया. मतदान स्थानीय समयानुसार शाम 4:30 बजे समाप्त हुआ, हालांकि जिन मतदान केंद्रों पर मतदाता कतार में मौजूद थे, वहां मतदान जारी रखने की अनुमति दी गई. चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता के अनुसार, शुरुआती महत्वपूर्ण नतीजे रात तक सामने आने की संभावना जताई गई है.
यह चुनाव मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसकी पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना जा रहा है. अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने पिछले वर्ष अवामी लीग को भंग कर दिया था और उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था.
देशभर में कुल 30 करोड़ से अधिक आबादी वाले बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाता इस चुनाव में वोट डालने के पात्र थे, जिनमें लगभग 50 लाख नए मतदाता शामिल हैं. देश के 300 में से 299 निर्वाचन क्षेत्रों के 42,779 मतदान केंद्रों पर मतदान कराया गया, जबकि एक क्षेत्र में उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया. चुनाव आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद के अनुसार, दोपहर 2 बजे तक करीब 48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के मतदान के दौरान हिंसा और अफरा-तफरी के बीच कम से कम नौ लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है. मृतकों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक नेता, एक प्रीसाइडिंग ऑफिसर और एक पोलिंग ऑफिसर शामिल हैं.
जानकारी के मुताबिक, ये मौतें देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदान के दिन हुईं. कुछ लोगों की तबीयत मतदान केंद्रों पर अचानक बिगड़ गई, कुछ मतदान करने के बाद घर लौटते समय गिर पड़े, जबकि कुछ मतदान ड्यूटी निभाते समय अपनी जान गंवा बैठे. इन घटनाओं को लेकर कई जगह आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं.
निर्वाचन आयोग (ईसी) ने जानकारी दी है कि पंजीकृत मतदाताओं में से 80.11 प्रतिशत मतदाताओं ने डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.
आयोग के अनुसार, पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान में बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी देखने को मिली है, जिसे चुनाव प्रक्रिया में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि डाक मतपत्रों की गिनती चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
बांग्लादेश में 13वीं राष्ट्रीय संसद चुनाव के नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) बड़े बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक आए नतीजों में BNP गठबंधन को भारी बढ़त हासिल हुई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार 129 सीटों के घोषित नतीजों में से BNP गठबंधन ने 96 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. वहीं, जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 32 सीटों पर सफलता मिली है, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा है. इन नतीजों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि BNP गठबंधन संसद में मजबूत स्थिति में पहुंच रहा है और सरकार बनाने की राह पर आगे बढ़ रहा है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव परिणाम BNP गठबंधन के पक्ष में जाते दिख रहे हैं, जिससे बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है. हालांकि, अन्य सीटों के नतीजे अभी आना बाकी हैं, लेकिन शुरुआती रुझानों से BNP की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है.
बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से अनौपचारिक रूप से जीत दर्ज की है. उन्होंने चुनाव में दो क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था. BNP मीडिया सेल के सदस्य शैरुल कबीर खान ने गुरुवार को बताया कि अनऑफिशियल नतीजों के अनुसार, BNP चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 चुनाव क्षेत्रों में जीत हासिल की है.
ताजा आकंड़ों के मुताबिक जमात ने 18 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. वहीं बीएनपी 50 सीटें जीतने में अबतक कामयाब रही है.
बांग्लादेश के आम चुनावों में 299 सीटों में से 52 सीटों के नतीजे आ चुके हैं. इनमें रहमान की पार्टी बीएनपी जमात+ पर भारी नजर आ रही है. 52 सीटों में से 50 पर बीएनपी की जीत हुई है जबकि जमात के खाते में 2 सीट गई हैं.
बांग्लादेश के आम चुनाव 2026 में कुरिग्राम-4 संसदीय सीट से बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मुस्तफिजुर रहमान ने अनौपचारिक रूप से जीत दर्ज की है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें इस सीट पर विजयी उम्मीदवार घोषित किया गया है.
‘देश रूपांतर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुरिग्राम-4 सीट पर हुए मुकाबले में मुस्तफिजुर रहमान को मतदाताओं का समर्थन मिला और वे अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ने में सफल रहे. हालांकि, इस परिणाम को अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
बांग्लादेश में इस बार का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अवामी लीग सरकार के पतन के बाद पहली बार संसदीय चुनाव कराए गए हैं. चुनाव में कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है और मतगणना जारी है.
बांग्लादेश के झेनाइदह-1 (शैलकुपा) संसदीय क्षेत्र में नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार एमडी असदुज्जमान ने अनौपचारिक नतीजों के अनुसार जीत दर्ज कर ली है. वह ‘शीफ ऑफ पैडी’ (धान की बालियां) चुनाव चिन्ह पर मैदान में थे और उन्हें कुल 1,71,598 वोट मिले. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार अबू सालेह एमडी मतीउर रहमान थे, जो ‘दरिपल्ला’ (तराजू) चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे थे. उन्हें कुल 55,577 वोट प्राप्त हुए.
अनौपचारिक चुनाव परिणामों की घोषणा गुरुवार शाम करीब 8 बजे से पहले रिटर्निंग ऑफिसर एमडी अब्दुल्ला अल मसूद द्वारा की गई. इस संसदीय क्षेत्र में कुल 3,25,278 पंजीकृत मतदाता हैं.
बांग्लादेश के आम चुनावों के तहत शुरुआती घोषित 48 सीटों के नतीजों के अनुसार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 29 सीटों पर मुकाबले में बनी हुई है, जबकि जमात-ए-इस्लामी 10 सीटों पर टक्कर दे रही है. इसके अलावा 2 सीटों पर अन्य उम्मीदवार और 7 सीटों पर निर्दलीय या अन्य दावेदार मुकाबले में हैं.
जिन सीटों पर कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है, उनमें ढाका की कई सीटें (ढाका-13, ढाका-1 और ढाका-19), मौलवीबाजार-2, गोपालगंज-2, कुश्तिया-4 और बोगरा-4 शामिल हैं. वहीं जमात-ए-इस्लामी बागरहाट-2, बागरहाट-3, कुरिग्राम-1, कुरिग्राम-3, ढाका-14, कुश्तिया-2, नाराइल-2, जॉयपुरहाट-1, सिलहट-5 और निलफामारी-4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. यह आंकड़े शाम 6:42 बजे तक के अपडेट पर आधारित हैं और आगे परिणामों में बदलाव संभव है.
बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार समाप्त हो गई है. दोपहर दो बजे तक 48 फीसदी मतदान दर्ज हुआ. भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे मतदान आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया, जिसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान समाप्ति के समय तक जो मतदाता मतदान केंद्रों पर कतार में मौजूद थे, उन्हें अपना वोट डालने की अनुमति दी जा रही है. चुनाव परिणामों पर पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस चुनाव को बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला बेहद महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है.
बांग्लादेश की बड़ी पार्टियों के टॉप नेताओं और अंतरिम चीफ मुहम्मद यूनुस ने भी अपना वोट डाल दिया है. देश के अहम 13वें संसदीय चुनावों में दोपहर तक 32 परसेंट से ज़्यादा वोटर वोट डाल चुके थे. आम चुनाव यूनुस के पेश किए गए 84-पॉइंट वाले मुश्किल सुधार पैकेज पर रेफरेंडम के साथ-साथ हो रहे हैं. चुनाव मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसकी कभी सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी के बीच है, क्योंकि प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब खत्म हो चुकी अवामी लीग इस चुनाव में नहीं है.
Akhon TV की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह मुजीबनगर के जॉयपुर और गंगनी उपजिला के मेहेरपुर के सहरबाती, तिरैल और ढाला गांवों में वोटरों को कथित तौर पर रोकने को लेकर हुई झड़पों में BNP और जमात-ए-इस्लामी के कम से कम 23 समर्थक घायल हो गए. पुलिस ने घटना के दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया. अकेले सहरबाती गांव में, पोलिंग स्टेशन तक पहुंचने को लेकर हुए विवादों से जुड़े BNP समर्थकों के साथ झड़पों में जमात के कम से कम 13 कार्यकर्ता घायल हो गए.
जमात-ए-इस्लामी चीफ शफीकुर रहमान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे प्यारे लोगों, आज आपकी जीत है. आज आपकी आज़ादी है.” उन्होंने वोटर्स के अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिशों के खिलाफ़ चेतावनी दी और कहा, “कुछ लोग आपकी चीज़ें छीनने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसा न होने दें. यह वह नाइंसाफ़ी है, जिसके खिलाफ़ हम 17 साल से खड़े हैं.”
शांति और सावधान रहने की अपील करते हुए, उन्होंने कहा, “शांत, सावधान और पक्के इरादे वाले बने रहें. जो आप देखें उसे रिकॉर्ड करें और इस पल को इतिहास के लिए संभाल कर रखें. सच सामने आए और इंसाफ़ मज़बूत रहे, क्योंकि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है."

देश रूपंतोर की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को दोपहर करीब 12:15 बजे (BDT) कॉकटेल ब्लास्ट के बाद भोला सदर के अलीनगर स्कूल और कॉलेज पोलिंग सेंटर पर वोटिंग कुछ समय के लिए रोक दी गई. पीठासीन अधिकारी मोहम्मद उमर फारुक ने कहा कि "गुंडों" का एक ग्रुप सेंटर में घुसा, बम फोड़े और अधिकारियों को परेशान किया, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.
OC मोहम्मद मोनिरुल इस्लाम ने कहा कि ग्रुप ने बैलेट पेपर छीनने की भी कोशिश की और एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया. दोपहर 1:15 बजे तक एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्रवाई करने के लिए मौके पर थे.
पुलिस ने पंचगढ़ के अतवारी में उपजिला जुबो शक्ति के प्रेसिडेंट सुकुमार दास बाबू को सैंपल बैलेट के साथ हिरासत में लिया. देश रूपंतोर की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें 3 साल जेल की सज़ा सुनाई गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने गुरुवार सुबह जिले के अतवारी मॉडल पायलट हाई स्कूल पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग के दौरान उन्हें सैंपल बैलेट के साथ हिरासत में लिया. बाद में, जब उन्हें तुरंत इलेक्शन ज्यूडिशियल कोर्ट में पेश किया गया, तो जज और असिस्टेंट जज राणा परवेज़ ने सुनवाई के बाद सुकुमार दास बाबू को 3 साल जेल और BDT 10,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई.
Desh Rupantor की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा और गड़बड़ी की खबरों के बीच, BNP नेता तारिक रहमान ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि उनकी पार्टी चुनाव के नतीजे तभी स्वीकार करेगी जब वोट निष्पक्ष रूप से होंगे. उन्होंने कहा कि अगर चुनाव स्वतंत्र रूप से होता है और वोटर शांति से वोट डाल पाते हैं तो नतीजे स्वीकार किए जाएंगे. उन्होंने ऐसे हालात को देश की डेमोक्रेसी के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताया. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर वोट को लेकर कोई कन्फ्यूजन या गड़बड़ी होती है, तो चुनाव नतीजे स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
उन्होंने कहा, "हम कल से देख रहे हैं कि कुछ राजनीतिक पार्टियां कुछ गलत घटनाएं कर रही हैं. हम नहीं चाहते कि ऐसी घटनाएं हों, लोगों को अपनी मर्ज़ी से और शांति से वोट देने का मौका मिलना चाहिए और कोई भी साज़िश कामयाब नहीं होगी."
BNP की उम्मीदों के बारे में उम्मीद जताते हुए तारिक रहमान ने कहा, "अल्हम्दुलिल्लाह, हमें चुनाव जीतने की उम्मीद है. हम उम्मीद करते हैं कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां शांतिपूर्ण वोटिंग प्रक्रिया सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगी."
ढाका के Somoy TV ने चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 43 पोलिंग सेंटर पर हाथापाई और मारपीट की घटनाएं हुईं. गोपालगंज के एक पोलिंग सेंटर पर कॉकटेल बम फेंका गया, जिसमें तीन लोग घायल हो गए. मुंशीगंज पोलिंग सेंटर पर क्रूड बम धमाका और झड़प की खबर है, जबकि ब्राह्मणबरिया के सराइल उपजिला में एक पोलिंग सेंटर पर BNP और एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के सपोर्टर्स के बीच हाथापाई हुई.
Desh Rupantor की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ रहे नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के चीफ कोऑर्डिनेटर नसीरुद्दीन पटवारी पर कथित तौर पर भीड़ ने हमला किया और उन्हें परेशान किया, जब वे ढाका के रेलवे कॉलोनी हाई स्कूल पोलिंग सेंटर जा रहे थे.
द बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BNP से जुड़े कई वोटरों ने आरोप लगाया कि पटवारी 100 से 150 बाहरी लोगों के साथ सेंटर में घुसे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोगों ने पटवारी और उनके साथियों को घेर लिया और उन्हें नकली कहते हुए नारे लगाने लगे, जबकि कुछ अन्य लोगों ने पटवारी का पीछा करने की कोशिश की. इस पर सेंटर पर तैनात आर्मी के जवानों ने पटवारी को इलाके से बाहर निकाला, और फिर हालात को संभालने की कोशिश की.
पटवारी ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो चुनाव में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीटों में से एक है, जहां उनका मुकाबला BNP नेता मिर्जा अब्बास से है.
साल 1994 से देश निकाला में रह रही बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने मुल्क में जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते वर्चस्व की चेतावनी दी और सेक्युलर राजनीति में वापसी की मांग की.
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "अगर BNP जीत हासिल करते है, तो जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार मुख्य विपक्ष बन जाएगी. ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि अवामी लीग पर बैन लगा दिया गया है. मुझे उम्मीद है कि चुनी हुई सरकार अवामी लीग पर से बैन हटा देगी, जिससे विपक्ष सेक्युलर या लेफ्ट-लीनिंग पार्टियों से आए, न कि धार्मिक पार्टियों को विपक्ष में बैठने का मौका मिले."

बांग्लादेश के इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने ढाका के Somoy TV को बताया है कि गुरुवार को वोटिंग के दौरान कई पोलिंग सेंटर्स से गड़बड़ियों और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आईं.
मीडिया आउटलेट ने बताया कि सूत्रों के मुताबिक, "देश भर के 140 सेंटर्स पर गड़बड़ियों की खबरें आईं. 43 सेंटर्स पर हाथापाई और मारपीट की घटनाएं हुईं और चार सेंटर्स पर पोलिंग एजेंटों को कथित तौर पर बाहर निकाल दिया गय.
आज सुबह, गोपालगंज के एक पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग के दौरान एक क्रूड बम फेंका गया. इसमें तीन लोग घायल हो गए, जिनमें अंसार के दो सदस्य और एक बच्चा शामिल है.
बांग्लादेश के इंग्लिश डेली अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, आज सुबह मुंशीगंज सदर उपजिला के मखाती गुरुचरण हाई स्कूल में एक क्रूड बम ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद दोनों तरफ से पीछा किया गया.
सदर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (OC), मोहम्मद मोमिनुल इस्लाम ने कन्फर्म किया कि यह झड़प सुबह करीब 10:00 बजे दो विरोधी उम्मीदवारों के सपोर्टर्स के बीच हुई. हालांकि, द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, OC यह कन्फर्म नहीं कर सके कि कोई कैजुअल्टी हुई है या नहीं.
बांग्लादेश में पोलिंग बूथों पर वोटर्स का हुजूम देखने को मिल रहा है. भारी संख्या में आम अवाम सड़क पर निकली है. लोगों ने आजतक से बात करते हुए बताया कि वे पॉजिटिव माहौल महसूस कर रहे हैं. हर जगह सिक्योरिटी का पुख्ता इंतजाम है. लोग शांति से मतदान करने के लिए बाहर निकले हैं.
सबके जेहन में यही सवाल है कि अवामी लीग के समर्थक किसको वोट डालेंगे. अवामी लीग की तरफ से कहा गया है कि नो बोट, नो वोट है. शेख हसीना भारत में हैं लेकिन उनके समर्थक किसको वोट देते हैं, ये सवाल है. लेकिन ग्राउंड पर नजर आ रहा है कि महिलाओं ने बड़ी तादात में वोटिंग में हिस्सा ले रही हैं.
इसी के साथ बांग्लादेश की हिंदू आबादी भी बड़ी संख्या में वोट देने निकली है. पोलिंग बूथों पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी नजर आई हैं. वहीं, जमात और बीएनपी ने एक दूसरे के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं.
अखोन टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राह्मणबरिया के सराइल उपजिला में BNP गठबंधन के उम्मीदवार जुनैद अल हबीब और निर्दलीय उम्मीदवार बैरिस्टर रूमिन फरहाना के समर्थकों के बीच हाथापाई होने के बाद अलीनगर सरकारी प्राइमरी स्कूल पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग कम से कम 10 मिनट के लिए रोक दी गई.
Prothom Alo की रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के साथ अलायंस को लेकर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) छोड़ने वाली इंडिपेंडेंट कैंडिडेट तस्नीम जारा ने आरोप लगाया है कि ढाका-9 के एक पोलिंग स्टेशन से उनके पोलिंग एजेंट्स को ज़बरदस्ती हटाया गया.
उन्होंने दावा किया कि उनके एजेंट्स को अंदर जाने से रोकने या उन्हें अंदर से निकालने के लिए कई बहाने बनाए जा रहे थे. जारा ने कहा, "हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अलग-अलग वजहों से, हमारे पोलिंग एजेंट्स को या तो अंदर आने से मना कर दिया जाता है या सेंटर से हटा दिया जाता है. इसे सही ठहराने के लिए झूठे नियम बनाए जा रहे हैं. कुछ से कहा जाता है, 'वे यहां वोटर नहीं हैं', जो सही नियम नहीं है. महिला एजेंट्स को पुरुष सेंटर्स से निकाला जा रहा है. कुछ मामलों में, कहा जाता है कि फोन अंदर लाए जा सकते हैं, लेकिन इस्तेमाल नहीं किए जा सकते.'"
उन्होंने आगे कहा कि मेरे पोलिंग एजेंट्स को निकाला जा रहा है, फिर भी अंदर लोग वोट डाल रहे हैं. यह साफ तौर पर मंज़ूर नहीं है.
तस्नीम जारा के आरोपों पर इलेक्शन अधिकारियों की तरफ से तुरंत कोई जवाब नहीं आया है.

Desh Rupator की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका-11 सीट से BNP उम्मीदवार एमए कय्यूम ने कहा कि 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव से एक रात पहले सोशल मीडिया पर फैली गुमराह करने वाली जानकारी ने वोटर टर्नआउट पर असर डाला है. बड्डा हाई स्कूल पोलिंग सेंटर पर वोट डालने के बाद कय्यूम ने रिपोर्टर्स से कहा, "मैंने 2008 के चुनाव में वोट दिया था. मैंने करीब 17 साल बाद फिर से वोट दिया. मैं सेंटर पर कम वोटर्स देख रहा हूं. लोगों को झूठ और प्रोपेगैंडा से गुमराह किया गया है. इसीलिए मैं सेंटर पर कम लोगों को देख रहा हूं."
Akhon TV की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के इलेक्शन कमीशन ने बताया कि 13वें नेशनल पार्लियामेंट्री इलेक्शन में सुबह 11 बजे (BDT) तक देश भर के 32,000 पोलिंग सेंटर्स पर 14.96% वोट डाले गए.
बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस ने ढाका के गुलशन मॉडल हाई स्कूल और कॉलेज पोलिंग सेंटर पर अपना वोट डालने के बाद कहा, "नए बांग्लादेश का प्रोसेस शुरू हो गया है."
रिपोर्टर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इस चुनाव के ज़रिए हमने अतीत को नकार दिया है. उन सभी बुरे सपनों वाले चैप्टर्स को पूरी तरह से छोड़ दिया है. आज से, हमें हर लेवल पर एक नया बांग्लादेश बनाने का मौका मिला है. ऐसा लगता है जैसे हम एक तरह का जन्मदिन मना रहे हैं और एक दिन का फेस्टिवल मना रहे हैं."
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने ढाका के एक पोलिंग सेंटर पर पार्लियामेंट्री इलेक्शन के लिए अपना वोट डाला.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने ढाका के एक पोलिंग सेंटर पर 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए अपना वोट डाला.
उन्होंने कहा, "लोगों की अपनी भागीदारी और प्यार से, इंशाअल्लाह, एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में BNP की जीत पक्की है. आइए, हम सब मिलकर इस देश को बनाएंय आइए, हम लोगों के अधिकारों और आज़ादी को पक्का करें और बांग्लादेश की आज़ादी और सम्मान की रक्षा करें. हम काम करेंगे, हम देश बनाएंगे, बांग्लादेश सबसे ऊपर है."
शेख हसीना की विदाई और 18 महीनों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में हो रहे अहम चुनाव भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया के लिए महत्वपूर्ण हैं. 127.7 मिलियन मतदाताओं में जेन Z और महिला वोटर निर्णायक भूमिका निभाकर सत्ता और लोकतांत्रिक दिशा तय कर सकते हैं.
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पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने अवामी लीग के साथ मिलकर बांग्लादेश में चल रहे चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है. उन्होंने “रात में वोटिंग” और बैलेट पेपर में धांधली के मामलों का दावा किया है. आरोपों के मुताबिक, पोलिंग ऑफिशियली शुरू होने से पहले बैलेट पेपर पर कुछ उम्मीदवारों के पक्ष में कथित तौर पर स्टैम्प लगाए गए थे. विपक्ष ने दावा किया है कि इस तरह के तरीकों से चुनावी ट्रांसपेरेंसी और वोटिंग प्रोसेस की ईमानदारी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं.
सजीब वाजेद और अवामी लीग के नेताओं ने इन दावों की इंडिपेंडेंट जांच की मांग की है. उनका कहना है कि पोलिंग से पहले बैलेट पेपर में कोई भी हेरफेर डेमोक्रेटिक नियमों को कमजोर करता है और चुनावी सिस्टम में लोगों का भरोसा कम करता है.
बांग्लादेश में लंबे अंतराल के बाद आम चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में Gen-Z और महिला वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाएंगे. बांग्लादेश के चुनाव आयोग के अनुसार, 18 से 29 साल की उम्र के 4 करोड़ से ज्यादा Gen-Z और 62 मिलियन से ज्यादा महिला मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगी. ये दो बड़े वर्ग बांग्लादेश में नई सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाएंगे.
बांग्लादेश का आम चुनाव एक उथल-पुथल भरे दौर के बाद हो रहा है. पिछले साल शेख हसीना की लंबे वक्त से चली आ रही सरकार गिर गई थी और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी थी. उस बदलाव के बाद यह पहला बड़ा चुनावी टेस्ट है, जो इसे देश के पॉलिटिकल रीसेट पर एक रेफरेंडम बनाता है.
पहली बार, इलेक्शन कमीशन के साथ रजिस्टर्ड करीब 8 लाख प्रवासी बांग्लादेशी IT-इनेबल्ड पोस्टल बैलेट सिस्टम से अपना वोट डालने के लिए एलिजिबल हैं.
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में वोट देने आए एक वोटर ने एएनआई से बात करते हुए कहा, "हम बहुत उत्साहित हैं क्योंकि हम पिछले 17 या 18 साल से वोट नहीं दे पाए हैं. हम इस चुनाव में सही उम्मीदवार चुनना चाहेंगे. माहौल काफी अच्छा है. सुरक्षा के इंतजाम अच्छे हैं, और हम आसानी से अपना वोट डाल सकते हैं."
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने आने वाले चुनावों की आलोचना करते हुए उन्हें गैर-कानूनी बताया है और वोटरों से चुनावों का बॉयकॉट करने की अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के तहत कट्टरपंथियों को रिहा कर दिया गया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया है. सरकार ने हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया है.
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नोबेल पुरस्कार विजेता और शेख हसीना को हटाने के बाद बनी अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने कहा, "यह चुनाव सिर्फ़ एक और रूटीन वोट नहीं है. लंबे वक्त से चले आ रहे गुस्से, असमानता, कमी और अन्याय के खिलाफ़ हमने जो जनजागरण देखा है, वह इस चुनाव में अपनी संवैधानिक अभिव्यक्ति पाता है."
नई सरकार चुनने के साथ-साथ, वोटर जुलाई चार्टर पर भी फैसला कर रहे हैं. यह एक प्रस्तावित संवैधानिक सुधार पैकेज है. अंतरिम लीडरशिप के सपोर्ट से, यह एग्जीक्यूटिव ताकतों को फिर से तय करने और अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश करता है. चार्टर के पास होने से बांग्लादेश में कई संवैधानिक संशोधन भी ज़रूरी हो जाएंगे.
संसद (जातीय संसद) – 300 सीटें
बहुमत का आंकड़ा – 151
मतदान का दिन – 12 फरवरी
वोटिंग का समय – सुबह 7 बजे – शाम 4 बजे IST
नतीजा – Feb 13
कुल वोटर – 12.77 करोड़
पुरुष – 6.48 करोड़
महिलाएं – 6.28 करोड़
थर्ड जेंडर – 1,120
15 सालों में सबसे ज़्यादा युवा वोटर
कुल उम्मीदवार – 2,028
पॉलिटिकल पार्टी के उम्मीदवार – 1,755
इंडिपेंडेंट उम्मीदवार – 273
महिला उम्मीदवार – 83
कुल पोलिंग सेंटर – 42,779
पोलिंग ऑफिसर – 8 लाख
तैनात लॉ एनफोर्समेंट ऑफिसर – 9.58 लाख
इसमें आर्मी, एयर फोर्स, नेवी, RAB और अंसार के लोग शामिल हैं
भाग लेने वाली कुल पॉलिटिकल पार्टियों की संख्या – 50
चुनाव मैदान में मौजूद बड़ी पॉलिटिकल पार्टियां:
BNP – 292
जमात-ए-इस्लामी – 225
जातियो पार्टी – 196
बांग्लादेश इस्लामी आंदोलन – 259
NCP – 30
394 इंटरनेशनल इलेक्शन ऑब्जर्वर और 197 विदेशी जर्नलिस्ट चुनाव को डॉक्यूमेंट करने के लिए ढाका पहुंचे हैं.
बांग्लादेश में वोटिंग सुबह 7:30 बजे (लोकल टाइम) शुरू हो गई है, जो देश के 42,779 सेंटर्स पर शाम 4:30 बजे तक चलेगी.

(फोटो- एपी)
बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री सिस्टम 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' मॉडल के तहत चलता है, जिसमें हर चुनाव क्षेत्र में सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है. जातीय संसद की 350 सीटों में से 300 पर सीधे चुनाव होता है, जबकि महिलाओं के लिए 50 रिज़र्व सीटें पार्टियों को उनके काम के आधार पर बराबर बांटी जाती हैं.
गुरुवार को 300 में से 299 सीटों पर वोटिंग हो रही है. कैंपेन के दौरान एक उम्मीदवार की मौत के बाद एक चुनाव क्षेत्र में वोटिंग टाल दी गई है.
बांग्लादेश में चुनाव राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में हो रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में नेताओं की हत्या और पोलिंग बूथ में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं. अधिकारियों ने हिंसा को रोकने और वोटर टर्नआउट पर असर न पड़े, यह पक्का करने के लिए पूरे देश में सुरक्षा बलों को तैनात किया है.
बांग्लादेशी मानवाधिकार संस्था ऐन ओ सलीश केंद्र (Ain o Salish Kendra-ASK)) ने मंगलवार को कहा कि फरवरी के पहले 10 दिनों में कम से कम 47 पत्रकारों को हिंसा का सामना करना पड़ा. ASK ने बताया कि इन 10 दिनों में पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक अशांति की कुल 58 घटनाएं दर्ज की गईं. दो लोगों के मारे जाने और 489 लोगों के घायल होने की खबर है. फरवरी के पहले 10 दिनों में हुई यह हिंसा जनवरी के आखिरी 10 दिनों के मुकाबले ज़्यादा है.
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बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने से पहले अल्पसंख्यकों पर हमले की खौफनाक खबर सामने आई है. मौलवी बाज़ार इलाके में एक 28 वर्षीय हिंदू युवक रतन साहूकार का शव बरामद हुआ है, जिसके हाथ-पैर बंधे थे और शरीर पर गहरे ज़ख्मों के निशान थे.
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बांग्लादेश चुनाव में मुख्य मुकाबला तारिक रहमान की लीडरशिप वाली BNP और शफीकुर रहमान की लीडरशिप वाली जमात-ए-इस्लामी के बीच है. जमात के साथ नई नेशनल सिटिजन पार्टी भी है, जो 2024 के हसीना विरोधी प्रदर्शनों से निकली है. सर्वे का अनुमान है कि बीएनपी जीतेगी और जमात अब तक का अपना सबसे अच्छा चुनावी प्रदर्शन दिखाएगी. हालांकि, कुछ फैक्टर नतीजे को बदल सकते हैं.
अगस्त 2024 में शेख हसीना को हटाए जाने के बाद बांग्लादेश अपने पहले नेशनल चुनाव में वोटिंग कर रहा है. देश में कई लोग इसे एक अहम पॉलिटिकल बदलाव के तौर पर देख रहे हैं. 127 मिलियन वोटर्स के साथ, एक साथ कॉन्स्टिट्यूशनल रेफरेंडम भी किया जाएगा. रेफरेंडम में "हां" वोट जीतने पर अगली चुनी हुई सरकार को कई ज़रूरी कॉन्स्टिट्यूशनल बदलाव करने होंगे.
हसीना की अवामी लीग को चुनाव से रोक दिया गया है. 15 साल से ज़्यादा वक्त में पहली बार, अवामी लीग (AL) चुनावी मैदान से गायब है. इसकी गैरमौजूदगी ने वोटरों के तालमेल को बदल दिया है. सर्वे बताते हैं कि AL के कई पुराने सपोर्टर, लीडरशिप की चुनावों का बॉयकॉट करने की अपील को नज़रअंदाज़ करते हुए, BNP या जमात-ए-इस्लामी को वोट दे सकते हैं.