कमरे में घंटों लैपटॉप लेकर बैठने वाला लड़का... मां-बाप को लगता था बेटा इंजीनियर बनकर बड़ा नाम करेगा. लेकिन वही BTech इंजीनियर इंटरनेट की अंधेरी दुनिया में ऐसा नेटवर्क चला रहा था, जिसने पुलिस तक को चौंका दिया. इंटरनेट से वैसे वाले वीडियो डाउनलोड करता... टेलीग्राम चैनल पर बेचता... और इसी खेल से करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये कमा डाले.
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड प्रयागराज के एक रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर का बेटा था, जिसने अच्छे कॉलेज में पढ़ाई और बीटेक कर इंजीनियर बना था. इस इंजीनियर का नाम है विकास सिंह. पढ़ा-लिखा लड़का. लेकिन नौकरी और करियर छोड़कर उसने इंटरनेट की ऐसी दुनिया चुन ली, जहां वैसे वाले वीडियो डाउनलोड होते थे... फिर टेलीग्राम के चैनलों पर बेचे जाते थे. और ये कोई छोटा-मोटा खेल नहीं था. पुलिस के मुताबिक, जांच में करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक ट्रांजेक्शन सामने आया है.

दरअसल, 17 मई 2026 को हरदोई साइबर थाने में एक शिकायत पहुंची,. मामला गंभीर था. आरोप था कि एक नाबालिग छात्र का आपत्तिजनक वीडियो टेलीग्राम पर शेयर किया गया है. शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई. साइबर टीम ने जांच शुरू की. लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं रहा. पुलिस के सामने एक पूरा नेटवर्क सामने आने लगा.
यह भी पढ़ें: Pornography case: डेढ़ अरब का रेवेन्यू, 30 करोड़ का प्रॉफिट... राज कुंद्रा की पोर्न इंडस्ट्री का ये था फ्यूचर प्लान
पुलिस जांच में पता चला कि विकास सिंह ने 2019 में प्रयागराज के कॉलेज से BTech किया था. आमतौर पर इंजीनियरिंग के बाद लोग नौकरी ढूंढते हैं. लेकिन विकास ने दूसरा रास्ता चुना. वह घंटों कमरे में बंद रहता. लैपटॉप और मोबाइल उसकी दुनिया बन चुके थे. इंटरनेट पर कंटेंट खोजना धीरे-धीरे उसका शौक नहीं... उसका बिजनेस बन गया.
साल 2020 से उसने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर नेटवर्क बनाना शुरू किया. देखते ही देखते उसने 21 सीक्रेट चैनल और ग्रुप तैयार कर लिए. इन चैनलों पर वीडियो, प्राइवेट क्लिप और आपत्तिजनक फोटो अपलोड किए जाते थे.
सब्सक्रिप्शन लेकर चलता था कारोबार
हैरान करने वाली बात ये थी कि विकास ने इस पूरे नेटवर्क को बाकायदा बिजनेस मॉडल की तरह चलाया.
जो पैसे देता... उसे प्राइवेट चैनलों का एक्सेस मिल जाता. पुलिस जांच में करीब 10 हजार वो वाले वीडियो और 40 हजार फोटो मिलने की बात सामने आई है. करीब 7 हजार यूजर्स इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे. इनमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और नाबालिग छात्र भी बताए जा रहे हैं.
इंटरनेट से ढूंढता था ओरिजिनल वीडियो
पुलिस के मुताबिक, विकास तकनीकी रूप से बेहद शातिर था. अगर उसे किसी वीडियो का सिर्फ छोटा क्लिप या स्क्रीनशॉट भी मिल जाता था, तो वह गूगल लेंस और दूसरे टूल्स की मदद से उस वीडियो की असली फाइल तक पहुंच जाता था. फिर वीडियो डाउनलोड होता... टेलीग्राम चैनल पर अपलोड होता... और सब्सक्रिप्शन वालों तक पहुंच जाता. यानी इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल उसने करियर बनाने में नहीं... बल्कि डिजिटल गंदगी फैलाने में किया.

पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए जाल बिछाया. साइबर टीम ने मुखबिर के जरिए उसके चैनल का सब्सक्रिप्शन लेने की कोशिश की. विकास ने 350 रुपये मांगे और बैंक अकाउंट नंबर भेज दिया. जैसे ही पुलिस बैंक खातों तक पहुंची, पूरा नेटवर्क खुलता चला गया. जांच में करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये के ट्रांजैक्शन सामने आए. यानि वैसे वाले वीडियो का ये खेल सिर्फ टाइमपास नहीं था... बड़ा खेल बन चुका था.
हरदोई के सीओ सिटी अंकित मिश्रा के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है. उसके बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. पूछताछ के बाद हरदोई पुलिस प्रयागराज पहुंची और विकास सिंह को गिरफ्तार कर लिया. अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके तार कितने राज्यों तक फैले हुए थे.
ये कहानी सिर्फ एक इंजीनियर की गिरफ्तारी की नहीं है. ये उस डिजिटल अंधेरे की कहानी है, जहां मोबाइल स्क्रीन के पीछे एक पूरी अलग दुनिया चल रही है. जहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पढ़ाई, नौकरी या इनोवेशन के लिए नहीं... बल्कि नाबालिगों तक अश्लील कंटेंट पहुंचाने और उससे करोड़ों कमाने के लिए हो रहा है. अब खतरा सिर्फ बाहर की दुनिया में नहीं... बच्चों के मोबाइल के अंदर भी है.