काशी के गंगा घाट, जो अपनी रौनक के लिए जाने जाते हैं, इन दिनों बढ़ती गर्मी और बढ़ते तापमान की वजह से अपनी यह पहचान खोते जा रहे हैं. जो गंगा घाट कभी गुलजार रहते थे, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. श्रद्धालुओं, तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिसके चलते गंगा में स्नान करने, पूजा-पाठ करने और नौका विहार करने वालों की तादाद में कमी आई है.
भीषण गर्मी के चलते सुनसान घाट का नज़ारा देखने को मिल रहा है. काशी के 84 घाट, जहां पहले कदम रखने तक की जगह नहीं हुआ करती थी, अब वीरान नजर आ रहे हैं. गर्मी ने अपना सितम अभी से ही दिखाना शुरू कर दिया है और ऐसा लग रहा है जैसे गंगा घाट की रौनक खत्म होने लगी है.
अभी से तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा रहा है, जबकि अभी मई और जून की गर्मी बाकी है. समय से पहले ही इतने अधिक तापमान की वजह से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है. वहीं, गंगा घाट पर स्नान, नौका विहार और पूजन-पाठ करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार कमी आ रही है.
गर्मी के कारण बढ़ी मुश्किल
चाहे नौका चालक हों या पूजा-पाठ कराने वाले पंडा-पुरोहित, सभी का कहना है कि रोज़ाना की तुलना में अब केवल 20% लोग ही गंगा घाट पर आ रहे हैं. इसका सीधा असर उनकी रोज़ी-रोटी पर पड़ा है. तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने भी बताया कि जिस अनुभव की उम्मीद लेकर वे काशी आए थे, फिलहाल वह गर्मी और धूप की वजह से दिखाई नहीं दे रहा है. घाटों पर भीषण गर्मी के बीच सन्नाटा पसरा हुआ है.
वहीं छत्तीसगढ़ से गंगा घाट पर अनुष्ठान करने पहुंचे परिवार ने बताया कि धूप और गर्मी से बचाव के लिए नगर निगम की ओर से कोई ठोस व्यवस्था अभी तक नहीं दिखी है. हालांकि, वाराणसी जिला प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए कक्षा 8 तक के सभी स्कूलों को दोपहर 12 बजे तक ही संचालित करने की अनुमति दी है. मौसम विभाग की माने तो अभी अगले तीन-चार दिनों तक तापमान में गिरावट देखने को नहीं मिलेगी और हीटवेव का भी सामना करना पड़ेगा.