हमारा जो एक पौधा बचा था, वो हमे मिल गया... उत्तरकाशी में सुरंग के बाहर चेहरे पर मुस्कान लिए और आंखों में आंसू छिपाए एक पिता के मुंह से जब ये शब्द निकले तो हर किसी का दिल भर आया. 16 दिन बाद जैसे ही सुरंग से बेटा बाहर आया पिता ने माथा चूमकर अपने लाल का स्वागत किया. इस दौरान पिता-पुत्र दोनों भावुक हो उठे. भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा. वहीं, सीएम पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह और अन्य लोग उन्हें निहारते रहे.
दरअसल, ये कहानी है यूपी के लखीमपुर-खीरी में रहने वाले मंजीत चौधरी की. मंजीत उन 41 मजदूरों में शामिल था जो 12 नवंबर से सुरंग के अंदर फंसे हुए थे. जैसे ही ये खबर उसके घर पहुंची वहां कोहराम मच गया. वह अपने घर का इकलौता बेटा था. माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. ऐसे में मंजीत के पिता ने उत्तरकाशी जाकर बेटे की हाल खबर लेने की ठानी. लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो वहां तक जा सकें.
मजबूरी में चौधरी ने घर के जेवर गिरवी रखे और 9 हजार रुपये जुटाए. इन्हीं रुपयों की मदद से वो उत्तरकाशी तक पहुंचे. उत्तरकाशी में वो बेटे मंजीत के निकलने तक सुरंग के बाहर डटे रहे. ठंड के मौसम में दिन-रात उसके इंतजार में बैठे रहे. प्रार्थना करते रहे. आखिरकार, 28 नवंबर को वो दिन आ गया जब पिता-पुत्र का मिलन हुआ. लम्हा भावुक कर देने वाला था.
मंजीत के पिता का ये वीडियो हो रहा वायरल
जब मंजीत के सुरंग से बाहर आने में कुछ ही घंटे बचे थे तो पिता ने मीडिया से बातचीत में दिल छू लेने वाली बातें कहीं. उन्होंने भावुक होकर बताया कि बड़े बेटे की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. वहीं, दूसरा बेटा मंजीत टनल में फंसा हुआ है. उसे खोना नहीं चाहता. हमारा जो एक पौधा बचा था, वो हमे मिल गया. बहुत खुशी है.
मंजीत के पिता कहते हैं- घर में इतने पैसे भी नहीं थे कि उत्तरकाशी पहुंचने के लिये किराया दे सकें. बेटे तक पहुंचने के लिए घर के जेवर को गिरवी रख दिया. इससे करीब 9 हजार रुपये उधार मिले. फिर उन्हीं पैसे से लखीमपुर से हरिद्वार पहुंचा और वहां से उत्तरकाशी की बस लेकर टनल साईट पहुंच गया. अब सिर्फ 290 रुपये बचे हैं. मगर कोई बात नहीं, बेटा तो आ ही गया है.
बेटे का माथा चूमा, गले लगाया
मंजीत के सुरंग से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद पिता ने राहत की सांस ली. उन्होंने सबसे पहले बेटे का माथा चूमा फिर उसे गले से लगाया. बेहद सुकून देने वाले उस पल को सीएम धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह भी निहारते रहे. आसपास और भी तमाम लोग मौजूद थे. सभी के चेहरे पर खुशी झलक रही थी.
मां ने भावुक होते हुए कहा- बड़ी मुश्किल से गुजरे ये दिन
इधर, घर में मौजूद मंजीत की मां बीते 17 दिनों के इस भारी समय को याद करती हुई कहती हैं- हमारा एक-एक दिन कैसे गुजरा, ये हमें ही पता है. ना हमें नींद आई, न ठीक से खाना खा सके.
वह कहती हैं- बड़े बेटे की शादी के बचे हुए जेवर गिरवी रखकर उत्तरकाशी जाने के लिए किराए का इंतजाम किया. अब बेटा सुरक्षित आ गया है, जेवर-वेवर तो बनते रहेंगे. बड़े बेटे को खो चुके हैं, इसलिए मंजीत को लेकर अधिक चिंता थी. ये 17 दिन, 17 साल की तरह बीते हैं.

उन्होंने उत्तराखंड सरकार और रेस्क्यू टीम में लगी सभी संस्थाओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि मंजीत जब गांव आएगा, तो हम भंडारा करेंगे. पूजा-पाठ भी करवाएंगे. भगवान ने उसे नई जिंदगी दी है.
आपको बता दें कि उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में फंसे सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. ये मजदूर दिवाली के दिन (12 नवंबर) हुए हादसे के बाद से सुरंग में फंसे हुए थे. इन 41 मजदूरों में 15 झारखंड, 8 उत्तर प्रदेश, पांच-पांच बिहार और ओडिशा से, तीन पश्चिम बंगाल से, दो-दो असम और उत्तराखंड से थे. एक श्रमिक हिमाचल प्रदेश से था. सुरंग से निकाले जाने के बाद इन्हें अस्पताल ले जाया गया है. वहां से स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें जल्द घर भेजा जा सकता है.