आजादी की लड़ाई में मील का पत्थर माने जाने वाले काकोरी ट्रेन एक्शन का शताब्दी वर्ष यूपी सरकार मनाएगी. इसके लिए जहां 9 अगस्त से एक सप्ताह तक अलग-अलग आयोजन होंगे, वहीं 13-15 अगस्त हर घर तिरंगा फहराया जाएगा. इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी. इस अवसर पर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित भी किया जाएगा. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने काकोरी शताब्दी वर्ष समारोह के कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा कर उसके लिए निर्देश दिए.
दरअसल, यूपी की योगी सरकार ने काकोरी ट्रेन एक्शन के शताब्दी वर्ष के लिए कार्यक्रमों की शृंखला तैयार की है. काकोरी ट्रेन एक्शन आज़ादी के संघर्ष की महत्वपूर्ण घटना है. शताब्दी महोत्सव पर पूरे प्रदेश भर में अलग अलग तिथियों पर कार्यक्रम होंगे. 9 अगस्त से ये आयोजन शुरू होंगे. वहीं 13 से 15 अगस्त के बीच 'हर घर तिरंगा' अभियान आयोजित किया जाएगा, जिसमें घर-घर तिरंगा फहराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और विभागों की बैठक में शताब्दी वर्ष में होने वाले आयोजनों की तैयारी की समीक्षा की.
मंत्री-विधायक आयोजन में होंगे शामिल
शताब्दी वर्ष के आयोजन के लिए संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है. मंत्रियों और विधायकों को आयोजनों में मौजूद रहना होगा. सीएम योगी ने ये भी निर्देश दिया है कि पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, पैरामिलिट्री, मिलिट्री, एनसीसी व स्कूलों के बैंड का प्रशिक्षण कराते हुए 9 से 15 अगस्त प्रदेश के शहीद स्थलों, स्मारकों इत्यादि पर राष्ट्रधुन व राष्ट्रभक्ति के गीत बजाए जाएं. युवक व महिला मंगल दल, स्काउट गाइड, एनसीसी, एनएसएस के स्वयंसेवकों को भी काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव व हर घर तिरंगा कार्यक्रमों से जोड़ा जाए.
इसके साथ ही सामाजिक और व्यापारिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए. काकोरी शताब्दी वर्ष के लिए विशेष बुकलेट भी तैयार की जाएगी. 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन में जा रहे ख़ज़ाने को लूटकर क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी. इसे राम प्रसाद बिस्मिल, अश्फ़ाक उल्लाह खान, चंद्रशेखर आज़ाद, राजेंद्र लाहिड़ी, शचींद्र बक्शी कैसे क्रांतिकारियों ने अंजाम दिया था.
आखिर क्या था काकोरी कांड?
9 अगस्त, 1925 को घटे काकोरी कांड को हमेशा रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी और अन्य कई क्रांतिकारियों के लिए जाना जाता है. तब हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों ने इस घटना को अंजाम दिया था. ये घटना एक ट्रेन लूट से जुड़ी है, जो 9 अगस्त, 1925 को काकोरी से चली थी. आंदोलनकारियों ने इस ट्रेन को लूटने का प्लान बनाया था. जब ट्रेन लखनऊ से करीब 8 मील की दूरी पर थी, तब उसमें बैठे तीन क्रांतिकारियों ने गाड़ी को रुकवाया और सरकारी खजाने को लूट लिया.
स्वतंत्रता सेनानियों ने इसके लिए जर्मन माउज़र का इस्तेमाल किया और अंग्रेजों के सरकारी खजाने से चार हज़ार रुपये लूट लिए थे. काकोरी कांड के आरोप में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और रोशन सिंह को फांसी दे दी गई थी. इस घटना के बारे में बाद में शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने विस्तार से लिखा था.