यूपी में वाराणसी के केदार घाट पर स्थित श्री विद्या मठ इन दिनों चर्चाओं में है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने दावा किया कि यह मठ पांच मंजिला है, इसके ऊपर स्विमिंग पूल और शीश महल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. इन आरोपों ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी. लेकिन इन दावों की सच्चाई क्या है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए जब मौके पर पड़ताल की गई, तो तस्वीर कुछ अलग ही सामने आई.
केदार घाट की संकरी गलियों से होकर जब श्री विद्या मठ तक पहुंचा जाता है, तो सबसे पहले इलाके की भौगोलिक स्थिति ही कई सवाल खड़े करती है. इतनी तंग गलियां हैं कि यहां चार पहिया वाहन का पहुंचना बेहद मुश्किल है.
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मठ के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले बेसमेंट की ओर जाने वाली सीढ़ियां दिखाई देती हैं. नीचे जाने पर एक बड़ा हॉल मिलता है, जिसे कांच के पार्टिशन से विभाजित किया गया है. यही वह स्थान है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह पूजा करते हैं और अपने शिष्यों व बाहर से आने वाले भक्तों से मुलाकात करते हैं. इसी हॉल में शंकराचार्य का सिंहासन भी स्थापित है.

मठ की संरचना को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने जानकारी दी. उनके अनुसार, मठ कुल तीन मंजिला है और बेसमेंट को जोड़कर यह चार स्तरों में बना है. सबसे नीचे बेसमेंट में पूजा स्थल और अतिथियों से मिलने का स्थान है.
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इसके ऊपर पहली मंजिल पर गुरुकुल है, जहां बटुकों के रहने और पढ़ने की व्यवस्था की गई है. दूसरी मंजिल पर रसोईघर है, जहां मठ से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार होता है. तीसरी मंजिल पर सत्संग स्थल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आवास है.
इस तरह, मौके पर की गई पड़ताल में पांच मंजिला मठ का दावा सही नहीं पाया गया. मठ की संरचना साधारण और पारंपरिक है, जो पुराने काशी की स्थापत्य शैली के अनुरूप दिखाई देती है.
मठ की छत पर बनाई गई है हौदी
अब बात उस सबसे चर्चित दावे की- स्विमिंग पूल और शीश महल की. जांच में सामने आया कि मठ की छत पर किसी भी प्रकार का स्विमिंग पूल मौजूद नहीं है. हालांकि, एक पानी की हौदी (टब) जरूर बनाई गई थी. यह भी स्वास्थ्य कारणों से तैयार की गई थी.

बताया गया कि ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को डॉक्टरों ने रोजाना चलने की सलाह दी थी, लेकिन शारीरिक कारणों से वह लंबी दूरी तक पैदल नहीं चल पाते थे. ऐसे में उनके लिए यह पानी की हौदी बनाई गई, जिसमें बैठकर वह पैरों की हलचल कर सकें. यह एक तरह की मेडिकल व्यवस्था थी, न कि कोई स्विमिंग पूल. वर्तमान में यह हौदी उपयोग में नहीं है और उसमें मठ से संबंधित पुराने कागज और सामान रखे हुए हैं.
दावों से काफी अलग दिखी मठ की संरचना
जहां तक शीश महल के दावे की बात है, पड़ताल में ऐसा कोई निर्माण या संरचना नहीं मिली, जिसे शीश महल कहा जा सके. मठ के अंदर का निर्माण साधारण है और धार्मिक गतिविधियों के अनुरूप ही दिखाई देता है.
मठ की वास्तविक संरचना और वहां मौजूद व्यवस्थाएं उन दावों से काफी अलग हैं. श्री विद्या मठ एक पारंपरिक धार्मिक स्थल है, जहां गुरुकुल, पूजा और सत्संग की गतिविधियां संचालित होती हैं. ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि काशी के इस मठ को लेकर जो दावे किए गए, उनकी सच्चाई काफी अलग नजर आई.