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'धिक्कार है, जो काम मुगलों ने नहीं किया वो इस सरकार...', बटुकों की शिखा खींचने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद योगी सरकार पर हमला

लखनऊ में आयोजित शंखनाद कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि गौ माता और सनातन धर्म की रक्षा के लिए है. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की गई और अनुमति भी शर्तों के साथ दी गई. भीड़ को लेकर उठे सवालों पर भी उन्होंने जवाब दिया. साथ ही मुगलों का उदाहरण देते हुए कहा कि बटुकों की शिखा खींचने जैसा काम इस सरकार ने किया है, जो परंपरा का अपमान है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ज्यादा भीड़ शराब की दुकान पर होती है. Photo ITG
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ज्यादा भीड़ शराब की दुकान पर होती है. Photo ITG

लखनऊ में आयोजित शंखनाद कार्यक्रम के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि इस आंदोलन को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है, लेकिन जब कार्यक्रम में मौजूद लोगों से हाथ उठाकर पूछा गया तो ज्यादातर लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े निकले. उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा, 'धिक्कार है, मुगलों ने भी बटुकों की शिखा खींचने की हिम्मत नहीं की, जो इस सरकार ने कर दी.' उन्होंने कहा कि यह परंपरा और कुल का अपमान है. अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि ब्राह्मण सुख भोगने के लिए नहीं, बल्कि तपस्या करने के लिए बना है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि गौ माता की रक्षा और सनातन धर्म के मुद्दे पर आयोजित सभा है. उन्होंने कहा कि आज से एक नया इतिहास शुरू होने जा रहा है और जो लोग इस कार्यक्रम में आए हैं, वे अपना नाम और पता लिखकर दें ताकि उन्हें इस आंदोलन का संस्थापक सदस्य माना जा सके.

खाली कुर्सियों पर भी दिया जवाब
कार्यक्रम में भीड़ को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग कार्यक्रम शुरू होने से पहले खाली कुर्सियों की तस्वीरें दिखाकर इसे फ्लॉप बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी निष्कर्ष निकालना सही नहीं है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उदाहरण देते हुए कहा कि ज्यादा भीड़ अक्सर शराब की दुकानों पर दिखाई देती है, जबकि दूध की दुकानों पर कम भीड़ होती है. उन्होंने कहा कि यहां कम भीड़ इस बात का संकेत है कि यह शराब की नहीं बल्कि शुद्ध गाय के दूध की दुकान जैसी जगह है.

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सरकार पर कार्यक्रम रोकने की कोशिश का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि इस सभा को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की पूरी ताकत लगा दी गई. उन्होंने कहा कि पहले कोशिश की गई कि उन्हें वाराणसी से निकलने ही न दिया जाए, लेकिन वे निकल आए. इसके बाद रास्ते में और फिर लखनऊ में उन्हें रोकने की कोशिश की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि सभा स्थल में प्रवेश रोकने के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी गई.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब सरकार ने शर्तों के साथ अनुमति दी तो यह साफ हो गया कि उनके मन में इस आंदोलन के प्रति कोई सद्भावना नहीं है. ऐसे में अब यह संघर्ष और भी आसान हो गया है.

नोटिस और मैदान की अनुमति पर उठाए सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें 9 तारीख का नोटिस दिया, लेकिन वह 10 तारीख को दिया गया. इसे उन्होंने फंसाने की कोशिश बताया. उन्होंने यह भी कहा कि जिस मैदान में कार्यक्रम हो रहा है, उसका 4 लाख 64 हजार रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, लेकिन मैदान की अनुमति उसी दिन दोपहर 12 बजे बैक डेट में दी गई.

कांशीराम का उदाहरण देकर कही बड़ी बात
अपने संबोधन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि जब कांशीराम ने अपनी यात्रा शुरू की थी तो वे अकेले थे, लेकिन समय के साथ उनका आंदोलन इतना बड़ा हुआ कि उनकी शिष्या मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं.

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उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी संत नहीं, बल्कि असरकारी संत चाहिए. उन्होंने कहा कि बड़ी भीड़ कई बार गुब्बारे की तरह होती है, जबकि कम लेकिन समर्पित लोग हथौड़ी की तरह होते हैं, जो गंभीर चोट करते हैं.

सनातन और गौभक्तों को बताया असली ताकत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें ठोस और समर्पित गौभक्त सनातन धर्मी चाहिए थे और कार्यक्रम में आए लोग उसी का उदाहरण हैं. उन्होंने कहा कि गोमुख से निकलने वाली धारा छोटी होती है, लेकिन आगे चलकर वही बड़ी नदी बन जाती है.

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