यूपी के संभल में 1978 का दंगा पीड़ित परिवार अब करीब पांच दशक बाद जमीन का हक पाने जा रहा है. मामला संभल के सदर कोतवाली क्षेत्र के शेर खा सराय इलाके का है. यहां प्रशासन ने हाल ही में कब्रिस्तान की जमीन से अवैध कब्जा हटवाया था. उसी खाली कराई गई सरकारी जमीन का एक हिस्सा अब 1978 के दंगे से प्रभावित परिवार को दिया गया है.
करीब 100 वर्गमीटर का यह भूखंड उनके लिए एक तरह की वापसी है- उस शहर में, जहां से वो कभी हालात के चलते पलायन कर गए थे. आज इस आवंटन को औपचारिक रूप देने के लिए प्रशासनिक कार्यक्रम रखा गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी केके विश्नोई मंच पर मौजूद रहेंगे. इनके सामने दंगा पीड़ित परिवार की रूक्मन रस्तौगी को जमीन का पट्टा सौंपा जाएगा, जो राम सरन दास रस्तौगी के परिवार से हैं.

इस कहानी की जड़ें 1978 के उस सांप्रदायिक दंगे में हैं, जिसने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी थी. इसी हिंसा में राम सरन दास रस्तौगी की हत्या कर दी गई थी. उनका शव कुएं में मिला था. इस घटना के बाद उनका परिवार संभल से पलायन करने को मजबूर हो गया था.
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वर्षों तक यह परिवार अपने पुराने घर, जमीन और शहर से दूर रहा. लेकिन वक्त के साथ उन्होंने दोबारा अपने हक और पुनर्वास की उम्मीद नहीं छोड़ी. हाल के वर्षों में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से अपनी जमीन और पुनर्स्थापन की मांग उठाई. मामला सरकार तक पहुंचा और फिर धीरे-धीरे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई.
करीब 10 महीने पहले इस जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया था. प्रशासन ने इसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया और इसके बाद दंगा पीड़ित परिवार को पुनर्वास के तहत यह भूखंड आवंटित करने का फैसला लिया गया.
आज के कार्यक्रम में जमीन सौंपने से पहले पारंपरिक प्रक्रिया होगी. भूमि पूजन और हवन किया जाएगा, जिसमें परिवार के सदस्य, स्थानीय लोग और कुछ संत-महंत भी मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम में मौजूद एक महंत ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी और इस पुनर्वास को न्याय की दिशा में कदम बताया. प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी और पारदर्शी तरीके से की गई है.