समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर भारतीय जनता पार्टी पर लोकतंत्र को खत्म करने और चुनाव मैनेज करने का आरोप लगाया. उन्होंने कुंदरकी, अयोध्या, और कन्नौज जैसी सीटों के आंकड़े पेश कर बताया कि कैसे बीजेपी ने 'मल्टीलेयर इलेक्शन माफिया मॉडल' के जरिए नतीजों को प्रभावित किया. अखिलेश ने बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि यूपी के ट्रेंड अधिकारी वहां लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से बंगाल मतगणना की लाइव फुटेज उपलब्ध कराने और संस्थानों के निष्पक्ष रहने की मांग की.
फंड की कमी और 2027 की चुनौती
इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनियों (IPAC) पर बात करते हुए अखिलेश ने स्वीकार किया कि पार्टी के पास फंड्स की कमी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड और धार्मिक चंदा भी बीजेपी ही ले रही है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि 2027 में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मिलकर चुनाव जीतेगा. अखिलेश ने कहा कि वे जल्द बंगाल जाकर ममता दीदी से मुलाकात करेंगे और बीजेपी के इस नए चुनाव मॉडल के खिलाफ रणनीति बनाएंगे, ताकि आने वाले समय में लोकतंत्र सुरक्षित रहे.
कुंदरकी और मिल्कीपुर में 'खेल' का आरोप
अखिलेश यादव ने कुंदरकी उपचुनाव का डेटा दिखाते हुए कहा कि 2017 और 2022 में हार के बावजूद सपा का वोट प्रतिशत बीजेपी से अधिक था, लेकिन 2024 में बीजेपी का ग्राफ अचानक बढ़ गया. उन्होंने मिल्कीपुर में एक बुजुर्ग की बेकरी तोड़े जाने और अधिकारियों की चहेती पोस्टिंग का मुद्दा उठाया. अखिलेश के मुताबिक, यूपी की हार के बाद बीजेपी ने मंत्रियों की फौज उतारकर गरीबों के घर छीने और भू-माफियाओं को जमीन दी. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर 'लाल स्याही' करार दिया.
संस्थानों और मीडिया पर तीखे सवाल
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई संस्थाएं और 'मीडिया हाउसेस' बीजेपी की इस 10 नंबरी योजना में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि एक विशेष रंगी सोच वाली पार्टी के 'अंडरग्राउंड साथी' बूथ स्तर पर खुफियागिरी कर रहे हैं. अखिलेश ने कन्नौज के पुराने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि कैसे सेंट्रल फोर्सेज और अधिकारियों ने सपा के लोगों को काउंटिंग से बाहर निकाला था. उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही बीजेपी के उन व्हाट्सऐप ग्रुप्स का भी खुलासा होगा जो पर्दे के पीछे काम कर रहे हैं.