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जुलाई में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक, लिया जाएगा ये फैसला

राम मंदिर दान विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक जुलाई में अयोध्या में होगी. वीएचपी प्रमुख आलोक कुमार ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर इसी बैठक में फैसला लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा है. वीएचपी ने मामले की फास्ट ट्रैक जांच, दोषियों को जल्द सजा और मंदिर प्रबंधन के लिए भविष्य में CEO जैसी व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई है.

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(File Photo: ITG)
(File Photo: ITG)

अयोध्या राम मंदिर में दान संग्रह से जुड़े विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक 11 जुलाई को अयोध्या में होगी, जिसमें ट्रस्ट के भविष्य की कार्ययोजना और हालिया घटनाक्रम पर फैसला लिया जाएगा. यह बैठक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद बुलाई गई है.

आलोक कुमार ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने राम मंदिर दान विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों ने नैतिक आधार पर यह फैसला लिया है और उनके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए. उनके इस्तीफे पर अंतिम फैसला बैठक में लिया जाएगा.

गौरतलब है कि हाल ही में विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर में दान संग्रह को लेकर कथित अनियमितताओं और कुप्रबंधन की बात सामने आई थी. इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया. हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम एफआईआर में शामिल नहीं है, लेकिन समय पर मामले की जानकारी नहीं देने को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठे हैं. गिरफ्तार लोगों में चंपत राय का पूर्व चालक भी शामिल है, जिस पर बिना अधिकार दान पेटियों की चाबी रखने का आरोप है.

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वीएचपी प्रमुख ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से श्रद्धालुओं का भरोसा प्रभावित हुआ है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले की तेजी से जांच हो, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और दोषियों को जल्द सजा मिले, ताकि लोगों का विश्वास दोबारा कायम हो सके.

आलोक कुमार ने यह भी कहा कि भविष्य में राम मंदिर के प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव की नियुक्ति पर फैसला होगा या नहीं.

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