मोबाइल आज सिर्फ एक गैजेट नहीं रह गया है. इसमें लोगों की यादें, जरूरी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी, तस्वीरें और रोजमर्रा की जिंदगी का बड़ा हिस्सा कैद होता है. ऐसे में जब मोबाइल खो जाता है तो सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि व्यक्ति का एक अहम हिस्सा उससे दूर हो जाता है.
प्रयागराज में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. किसी का मोबाइल बाजार में गुम हो गया, किसी का बस में छूट गया तो किसी का सफर के दौरान कहीं खो गया. धीरे-धीरे लोगों ने अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी. लेकिन कई महीनों बाद जब पुलिस का फोन आया और कहा गया कि आपका मोबाइल मिल गया है, तो लोगों को पहले यकीन ही नहीं हुआ. पुलिस लाइन सभागार में जब एक-एक कर लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल लौटाए गए तो वहां का दृश्य किसी सम्मान समारोह से कम नहीं था. किसी के चेहरे पर मुस्कान थी, कोई मोबाइल हाथ में लेकर बार-बार उसे देख रहा था, तो कोई पुलिसकर्मियों का धन्यवाद करते नहीं थक रहा था.
210 लोगों की लौटी खुशी
पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज की गंगानगर जोन की सर्विलांस सेल ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 210 खोए हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इन मोबाइलों की कुल कीमत 63 लाख 24 हजार रुपये बताई गई है. बरामदगी के बाद सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए. पुलिस लाइन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत की मौजूदगी में मोबाइल स्वामियों को उनके फोन लौटाए गए. जैसे ही लोगों ने अपने हाथों में महीनों पहले खोया मोबाइल देखा, उनके चेहरे खिल उठे. कई लोगों ने कहा कि उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उनका मोबाइल कभी वापस मिल पाएगा.
हमें लगा था अब कभी नहीं मिलेगा
मोबाइल लेने पहुंचे कई लोगों की कहानी लगभग एक जैसी थी. किसी का मोबाइल ट्रेन यात्रा के दौरान गुम हुआ था, किसी का बाजार में भीड़ के बीच खो गया था, तो किसी का फोन चोरी हो गया था. मोबाइल मिलने के बाद लोगों ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने तलाश की, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीद खत्म हो गई थी. ऐसे में जब पुलिस की ओर से सूचना मिली तो उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ. एक युवक ने बताया कि उसके मोबाइल में पढ़ाई से जुड़े महत्वपूर्ण नोट्स और निजी तस्वीरें थीं. मोबाइल वापस मिलने के बाद उसे ऐसा लगा जैसे कोई खोई हुई चीज फिर से मिल गई हो.
कैसे ढूंढ निकाले गए इतने मोबाइल
सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर इतने मोबाइल बरामद कैसे हुए? डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि भारत सरकार की ओर से CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल शुरू किया गया है. इस पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति अपना मोबाइल गुम होने या चोरी होने की जानकारी दर्ज करा सकता है. शिकायत दर्ज होने के बाद सर्विलांस सेल सक्रिय हो जाती है और तकनीकी माध्यमों से मोबाइल की तलाश शुरू करती है.
तकनीक बनी सबसे बड़ी मददगार
डीसीपी के अनुसार मोबाइल खोजने के लिए सिर्फ एक तरीका नहीं अपनाया जाता. सर्विलांस टीम कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, लोकेशन ट्रैकिंग और भौतिक सत्यापन समेत कई स्तरों पर काम करती है. सबसे खास बात यह है कि जब खोया हुआ मोबाइल कोई दूसरा व्यक्ति इस्तेमाल करना शुरू करता है तो सिस्टम के जरिए इसकी सूचना सर्विलांस टीम तक पहुंच जाती है. यानी मोबाइल चाहे किसी भी जिले या क्षेत्र में पहुंच जाए, उसके सक्रिय होते ही उसकी जानकारी जुटाई जा सकती है. इसी तकनीकी निगरानी और पुलिस टीम की मेहनत के कारण 210 मोबाइलों को खोजकर उनके असली मालिकों तक पहुंचाया गया.
सिर्फ मोबाइल नहीं, भरोसा भी लौटा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ मोबाइल रिकवरी का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के विश्वास को मजबूत करने का भी प्रयास है. आज के दौर में जब मोबाइल व्यक्ति की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, तब उसे वापस मिल जाना किसी बड़ी राहत से कम नहीं होता. कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने कहा कि पुलिस की इस पहल ने उनके मन में भरोसा बढ़ाया है कि यदि समय पर शिकायत दर्ज कराई जाए तो खोई हुई चीज वापस मिलने की संभावना रहती है.
पहले भी हुई हैं सफल रिकवरी
डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब सर्विलांस सेल ने इस तरह की सफलता हासिल की हो. इससे पहले भी कई बार बड़ी संख्या में मोबाइल बरामद कर लोगों को लौटाए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी तरह तकनीक और पुलिस टीम के समन्वय से खोए हुए मोबाइल रिकवर किए जाते रहेंगे.
क्या करें मोबाइल खो जाए तो?
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल गुम होने पर घबराने की बजाय तुरंत शिकायत दर्ज कराएं. इसके लिए भारत सरकार के CEIR पोर्टल पर मोबाइल की जानकारी दर्ज की जा सकती है. जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, मोबाइल रिकवर होने की संभावना उतनी अधिक रहेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल खोने के बाद कई लोग शिकायत नहीं करते, जिससे रिकवरी की प्रक्रिया प्रभावित होती है. प्रयागराज में 63 लाख रुपये से अधिक कीमत के 210 मोबाइल बरामद होने की खबर अब चर्चा का विषय बनी हुई है.
लोग इसे तकनीक और पुलिसिंग के बेहतर तालमेल का उदाहरण मान रहे हैं. पुलिस लाइन सभागार में जब एक साथ दर्जनों लोगों को उनके मोबाइल लौटाए गए तो वह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों के लिए खुशी का ऐसा पल था जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था. किसी के चेहरे पर संतोष था, किसी की आंखों में चमक थी और किसी के हाथों में वह मोबाइल था जिसे उसने हमेशा के लिए खोया हुआ मान लिया था. यही वजह है कि प्रयागराज पुलिस की यह पहल सिर्फ मोबाइल रिकवरी नहीं, बल्कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौटाने वाली कहानी बन गई.