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मालिक MP का, रजिस्ट्रेशन बिहार में, चलती दिल्ली से है, फिटनेस राजस्थान से... हादसे वाली बस पर गजब का फर्जीवाड़ा

ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. जिस बस में आग लगी, उस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान है. बस का मालिक छतरपुर का रहने वाला है और संचालन मध्य प्रदेश से होता है. रजिस्ट्रेशन बिहार में है, फिटनेस राजस्थान और पॉल्यूशन प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ है. बस दिल्ली से महोबा चलती थी और हादसा यूपी में हुआ.

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ग्रेटर नोएडा में हुए इस हादसे ने सिस्टम की पूरी पोल खोल दी है (Photo: PTI)
ग्रेटर नोएडा में हुए इस हादसे ने सिस्टम की पूरी पोल खोल दी है (Photo: PTI)

ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में लगी आग के बाद एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया. जिस बस में हादसा हुआ, उसका कनेक्शन एक नहीं, बल्कि छह अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से जुड़ता है. 

बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का रहने वाला है. बस का संचालन भी मध्य प्रदेश से होने वाली राज कल्पना ट्रैवल्स के जरिए बताया गया है, लेकिन बस का रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में नहीं, बल्कि बिहार के मधुबनी जिले के परिवहन विभाग में हुआ है. यही नहीं, बस का फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान से जारी किया गया है, जबकि उसका पॉल्यूशन प्रमाणपत्र हरियाणा ने जारी किया. बस नई दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा के बीच चलती थी और हादसा यूपी के जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ. यानी एक बस की पूरी कहानी को जोड़ें तो मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश का कनेक्शन सामने आता है. 

इतना ही नहीं यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब सिर्फ हादसे की वजह जानने से नहीं मिलेगा. सवाल यह भी है कि जिस बस पर बार-बार नियम तोड़ने के चालान होते रहे, वह सड़क पर चलती कैसे रही?  क्या किसी ने कभी इसकी चेकिंग नहीं की और यही हुई तो फिर क्या कार्रवाई हुई.

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जिस बस में बुधवार देर रात आग लगी, उसपर  1.75 लाख रुपये के 19 चालान होने की बात सामने आई है. इनमें कम उम्र के चालक से बस चलवाने, फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग नियमों के उल्लंघन के साथ परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन के चालान भी शामिल हैं. अब नौ लोगों की मौत के बाद सबसे लोगों का बड़ा सवाल यही है कि जब बस की कमियों को लेकर कार्रवाई होती रही तो उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगी? क्या सिर्फ चालान काट देना ही व्यवस्था की जिम्मेदारी थी? अगर बस लगातार नियमों का उल्लंघन कर रही थी तो उसे सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिलती रही?

बस का रजिस्ट्रेशन नंबर BR32PA8647 है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे. जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने का भी चालान हुआ था. इसके अलावा जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का चालान भी हुआ था. बस के परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन के भी चालान हुए थे. यानी बस की कहानी में चालक से लेकर रेट्रोफिटिंग और परमिट तक कई स्तरों पर नियमों के उल्लंघन की बातें सामने आ रही हैं. इसके बावजूद बस चलती रही.

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इंजन से आवाज आने की शिकायत का भी दावा

बस को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है. बस के इंजन से आवाज आने की लगातार शिकायत का भी दावा किया गया है. अगर बस में पहले से तकनीकी दिक्कतों को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं, तो यह भी जांच का विषय होगा कि उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई. हादसे के बाद शुरुआती जानकारी में बस में आग लगने का कारण एसी में स्पार्क या ब्लास्ट के कारण इंजन लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगना बताया गया है. आग तेजी से फैल गई. एडीएम अजीत सिंह के अनुसार रात करीब 11:15 बजे बस में आग लगी. शुरुआती जानकारी में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया. बस दिल्ली से महोबा जा रही थी. बताया गया कि बस में करीब 35 लोग सवार थे. आग की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं. रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. लेकिन धुएं और आग के बीच बस के अंदर फंसे नौ लोगों को बाहर नहीं निकाला जा सका. पुलिस और फायर सर्विस के प्रयास के बावजूद नौ लोगों की मौत हो गई. कुछ यात्रियों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया.

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सुनील ने बताई उस रात की पूरी कहानी

इस मामले में सुनील कुमार नाम के यात्री की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई है. सुनील भी उसी बस में सवार थे. सुनील के मुताबिक बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे. जब बस यमुना एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 33 के पास पहुंची तो ड्राइवर कैबिन की ओर से जलने जैसी बदबू आने लगी. उन्होंने बताया कि बस में सवार कुछ यात्रियों ने चालक और परिचालक को बदबू के बारे में बताया और बस रोकने को कहा. लेकिन आरोप है कि चालक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. शिकायत के मुताबिक चालक ने कहा कि बस में इस तरह की जलने की बदबू आती रहती है. सुनील के अनुसार इसके बाद भी बस तत्काल नहीं रोकी गई.

बस रोकने को कहा, लेकिन नहीं रोकी

एफआईआर में सुनील कुमार ने आरोप लगाया है कि कुछ समय बाद ड्राइवर सीट के पास से अचानक तेज आग की लपटें निकलने लगीं. यात्रियों ने शोर मचाकर बस रोकने के लिए कहा. एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उस समय चालक और परिचालक यात्रियों की बात को गंभीरता से नहीं ले रहे थे. शिकायत में यह भी आरोप है कि यात्रियों को बस रोकने की बात पर धमकाया गया. इसके बाद आग तेजी से फैल गई और बस के अंदर धुआं भर गया. बस रुकने के बाद यात्रियों ने बाहर निकलने की कोशिश की. सुनील कुमार के मुताबिक वह और कई अन्य यात्री किसी तरह बस से बाहर निकल आए, लेकिन कुछ यात्री आग और धुएं के कारण बस के अंदर फंस गए. नौ लोग बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौत हो गई.

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अगर समय पर बस साइड में लग जाती तो...

सुनील के बयान में एक बात सबसे ज्यादा झकझोरती है. उनका कहना है कि अगर बस को समय रहते साइड में लगा दिया जाता तो यात्रियों को बाहर निकलने का मौका मिल सकता था. बस में आधे लोग सो रहे थे और आधे जाग रहे थे. रात का समय था और करीब 11:30 बजे यात्रियों के सोने का वक्त था. ऐसे में अचानक आग और धुएं के बीच बाहर निकलने के लिए यात्रियों के पास बहुत कम समय बचा. सुनील के मुताबिक कुछ यात्री बस के अंदर ही फंस गए.

ड्राइवर और कंडक्टर हिरासत में

घटना के बाद बस के चालक और परिचालक को हिरासत में लिया गया है. चालक का नाम पवन और कंडक्टर का नाम योगेश बताया गया है. जानकारी के मुताबिक आग लगने के बाद दोनों मौके से भाग गए थे. बाद में नोएडा पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया. पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत करते हुए चालक और परिचालक को हिरासत में लिया है. आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

बस मालिक के खिलाफ क्या होगी कार्रवाई?

इस पूरी घटना के बीच एक और बड़ा सवाल बस के मालिक को लेकर है. जिस बस में आग लगी, उसका मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का रहने वाला बताया गया है. अब सवाल उठ रहा है कि बस के मालिक की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं? अगर बस पर पहले से 19 चालान थे, जिनमें कम उम्र के चालक, फ्यूल चेंज, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन की कार्रवाई शामिल थी, तो इन सबकी जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? क्या सिर्फ चालक और परिचालक की जिम्मेदारी तय होगी या बस मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?

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हादसे के बाद व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सवाल सिर्फ बस में आग लगने का नहीं है. सवाल उस पूरी व्यवस्था का है, जिसमें किसी वाहन के नियम उल्लंघन पर बार-बार चालान तो होते हैं, लेकिन उसके संचालन को रोकने की कार्रवाई कब और कैसे होती है, यह स्पष्ट नहीं हो पाता. 19 चालान के बावजूद बस चलती रही. कम उम्र के चालक से लेकर रेट्रोफिटिंग और परमिट तक नियमों के उल्लंघन की बातें सामने आती रहीं. इंजन से आवाज आने की शिकायत का दावा भी सामने आया. और आखिर में वही बस यमुना एक्सप्रेसवे पर आग की लपटों में घिर गई.

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