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'12 घंटे काम, 13 हजार सैलरी… सरकारी कर्मचारियों की बढ़ जाती है, हमारी कौन सुनेगा' प्रर्दशनकारियों की दर्द भरी कहानी

12 घंटे काम के बाद 13 हजार में घर कैसे चलेगा ? नोएडा में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का यही सवाल सड़कों पर गूंज रहा है. सैलरी बढ़ोतरी के आदेश के बावजूद कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं और 18-20 हजार की मांग पर अड़े हैं. महंगाई, किराया और राशन के बढ़ते खर्च ने उनका संकट गहरा दिया है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी कर्मियों का वेतन तो समय-समय पर बढ़ता है हमारी कोई सुनता ही नहीं.

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नोएडा में प्रदर्शनकारी कई सवाल सरकार से पूछ रहे हैं  (Photo: Screengrab)
नोएडा में प्रदर्शनकारी कई सवाल सरकार से पूछ रहे हैं (Photo: Screengrab)

भैया, आप ही बताइए… महीने में रोज 12 घंटे काम करने के बाद अगर जेब में 13 हजार ही आएंगे तो घर कैसे चलेगा ? मेरा नाम अवधेश मिश्रा है और हमारा ये प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक हमारी सैलरी हमारे हिसाब से नहीं आ जाती है. अवधेश सवाल करते हैं आप 12 घंटे काम करते हैं ठीक है, लेकिन 12 घंटे काम करने के बाद जब उस हिसाब से सैलरी नहीं मिलेगी तो खाएंगे क्या, रहेंगे क्या और बचाएंगे क्या ? इसके साथ ही अवधेश कहते हैं कि सरकारी नौकरी वालों की सैलरी तो बढ़ जाती है, हमारी तो कोई सुनता ही नहीं. 

नोएडा में चल रहे प्रदर्शनकारियों ने सरकार द्वारा बढ़ाई गई सैलरी पर नाखुशी जातते हुए कहा कि सबके पास परिवार है, सबका अपना-अपना अधिकार है. अपने अधिकार के हिसाब से हमको सैलरी मिलनी चाहिए. पहले सिस्टम कुछ और था, महंगाई इतनी नहीं थी, अब महंगाई इतनी बढ़ गई है कि सब्जी 100 रुपये से नीचे नहीं मिलती. एक टाइम की सब्जी 100 रुपये की, दो टाइम की 200 की… बचाएंगे कहाँ से? अभी सरकार ने जो राहत दी है वह सही नहीं है.  अगर राहत मिलती तो हम धरना क्यों देते ? हमें 18000 से 20000 रुपये तक सैलरी चाहिए, उससे कम में काम नहीं होगा. ये धरना तब तक चलता रहेगा. वह कहते है कि जहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन समय-समय पर बढ़ता रहता है, वहीं दूसरी ओर हम लोगों  की आवाज कोई सुनता ही नहीं. 

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सोनी ने सरकार से पूछा सवाल 

गाजियाबाद से आईं सोनी कहती है कि क्या सरकार ये बता सकती है कि 13000 रुपये में क्या होता है? मकान मालिक तुरंत किराया बढ़ा देते हैं. गैस सिलेंडर महंगा हो जाता है. कंपनी ने खाना देना भी बंद कर दिया है. जो घर से खाना लाते हैं, वो खा लेते हैं… लेकिन जो नहीं ला पाते, उन्हें सिर्फ चार रोटियां मिलती हैं, वो भी बहुत पतली. 12-14 घंटे काम करवाया जाता है. ऐसे में गुजारा कैसे होगा? हमें 20000 सैलरी चाहिए.

धन्यवाद लेकिन सरकार तो दीजिए जनाब 

वहीं, शेर सिंह नाम के एक अन्य कर्मचारी कहते हैं कि सरकार ने जो बढ़ोतरी की है, उसके लिए धन्यवाद. लेकिन इतने में हमारा गुजारा नहीं हो रहा. 5000 किराया है, 4000 राशन में चला जाता है बचता क्या है? मजदूरों का कहना है कि यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं, बल्कि जिंदगी चलाने का सवाल है.

300 से ज्यादा हिरासत में, 7 एफआईआर दर्ज

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शन के मामले में अब तक 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और सात एफआईआर दर्ज की गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या आगे और बढ़ सकती है. पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने भीड़ को भड़काने या हिंसा फैलाने में भूमिका निभाई, उनकी पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे और गिरफ्तारियां होंगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. इस मामले में फंडिंग की भी जांच हो रही है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इस पूरे आंदोलन को कहीं से आर्थिक मदद मिल रही थी. लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, अगर जांच में यह सामने आता है कि आरोपियों को राज्य के बाहर या देश के बाहर से फंडिंग मिली है, तो उस आधार पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

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सोशल मीडिया पर भी सख्ती

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है. पुलिस के मुताबिक, Facebook से लेकर X तक कई प्लेटफॉर्म पर भ्रामक और भड़काऊ संदेश फैलाए गए. अब तक दो X हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा 50 से ज्यादा ऐसे बॉट हैंडल चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें पिछले 24 घंटे के भीतर बनाया गया और जिनका मकसद अफवाह फैलाना था. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित कोशिश थी, जिसके जरिए माहौल को भड़काने का प्रयास किया गया.

सरकार ने बढ़ा दी है सैलरी 

बीते सोमवार को नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन और आगजनी के बाद  उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है.अंतरिम वेतन वृद्धि के नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

साथ ही सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ₹20,000 प्रति माह निर्धारित कर दिया गया है.सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सूचना पूरी तरह से 'मनगढ़ंत और झूठी' है.लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की अपील की गई है.

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शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को देखते हुए न्यूनतम वेतन में तत्काल रूप से अंतरिम वृद्धि (Interim Hike) करने का निर्णय लिया है.अगले माह एक वेज बोर्ड (Wage Board) का गठन किया जाएगा, जिसकी अनुशंसाओं के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन का निर्धारण होगा.इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश में एक समान न्यूनतम आधार रेखा (फ्लोर वेज) तय करने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है.

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