scorecardresearch
 

4 लैपटॉप, मोबाइल और विदेशी लहजे में बात... नोएडा में बैठकर अमेरिका-यूरोप तक कर डाली करोड़ों की ठगी

नोएडा साइबर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को पकड़ा है. आरोपी खुद को टेक सपोर्ट एक्सपर्ट बताकर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को निशाना बनाते थे. वे स्क्रीन शेयरिंग के जरिए उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर ठगी को अंजाम देते थे.

Advertisement
X
विदेशी एक्सेंट में बात कर करते थे आरोपी. (Photo: Screengrab)
विदेशी एक्सेंट में बात कर करते थे आरोपी. (Photo: Screengrab)

नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने चार शातिर साइबर ठगों को अरेस्ट किया है. ये आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट एक्सपर्ट बताकर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को निशाना बनाते थे और उनसे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करते थे. पुलिस के मुताबिक, यह गैंग संगठित तरीके से काम कर रहा था और तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को अपने जाल में फंसाता था.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिलाल, देव कपाही, अभिषेक और कुशाग्र के रूप में हुई है. ये सभी आरोपी दिल्ली और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं. पुलिस ने इनके पास से 4 लैपटॉप, 8 मोबाइल फोन, 4 हेडफोन और 2 राउटर बरामद किए हैं. इन उपकरणों का इस्तेमाल आरोपी ठगी के पूरे ऑपरेशन को चलाने में करते थे.

डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि यह गिरोह इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टेक सपोर्ट के नाम से पेड विज्ञापन चलाता था.

noida tech support fraud foreign nationals cyber thugs arrested

इन विज्ञापनों में एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था, जिससे यह दिखाया जाता था कि यह किसी बड़ी और भरोसेमंद टेक कंपनी की सेवा है. जब कोई विदेशी नागरिक अपने कंप्यूटर या मोबाइल में समस्या आने पर इन नंबरों पर कॉल करता था, तो कॉल सीधे आरोपियों के सिस्टम तक पहुंच जाती थी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: चारधाम यात्रा में ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर साइबर फ्रॉड! ठग बना रहे लोगों को निशाना, I4C विंग ने जारी किया अलर्ट

इसके बाद आरोपी बेहद प्रोफेशनल अंदाज में बात करते थे और खुद को तकनीकी विशेषज्ञ बताते थे. वे पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनके कंप्यूटर या मोबाइल में वायरस आ गया है या उनका सिस्टम हैक हो चुका है. डर और घबराहट का फायदा उठाते हुए आरोपी पीड़ित को स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते थे. जैसे ही पीड़ित ऐसा करता, आरोपी उसकी डिवाइस का पूरा एक्सेस हासिल कर लेते थे.

डिवाइस का कंट्रोल मिलने के बाद आरोपी पीड़ित के सिस्टम में मौजूद निजी और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक पहुंच जाते थे. कई मामलों में आरोपी कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे, जिससे पीड़ित को लगता था कि उसका सिस्टम पूरी तरह हैक हो गया है. इस स्थिति में घबराकर पीड़ित आरोपियों के कहे अनुसार पैसे देने के लिए तैयार हो जाता था.

noida tech support fraud foreign nationals cyber thugs arrested

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पीड़ित के बैंक खाते की स्थिति देखकर ठगी की रकम तय करते थे. यदि खाते में कम बैलेंस होता था, तो वे 350 से 2000 अमेरिकी डॉलर तक वसूलते थे. वहीं, अगर पीड़ित के खाते में अधिक रकम होती थी, तो कॉल को उनके 'सीनियर' के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था, जो बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम देता था.

Advertisement

ठगी से मिलने वाली रकम को आरोपी सीधे अपने बैंक खातों में नहीं लेते थे, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए मंगाते थे, ताकि उनकी पहचान छुपी रहे. इसके बाद गिरोह के सदस्य आपस में रकम का बंटवारा कर लेते थे. पुलिस को जांच के दौरान करोड़ों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बड़े पैमाने पर ठगी कर रहा था.

डीसीपी शैव्या गोयल ने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपी पढ़े-लिखे हैं, विदेशी लहजे में बात करते थे, जिससे पीड़ितों को उन पर आसानी से भरोसा हो जाता था. इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ठगी को अंजाम देते थे. पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और बड़े नेटवर्क की जांच कर रही है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement